
फ्रांस, बेल्जियम, इटली और अल्बानिया में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका भी चर्चा में है। आलोचकों का आरोप है कि ग्लोबल साउथ के देशों में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर संयुक्त राष्ट्र तेजी से प्रतिक्रिया देता है। लेकिन पश्चिमी देशों के मामलों में उसका रुख उतना सक्रिय नहीं दिखता।
संयुक्त राष्ट्र की यह बेबसी इस बार फिर फ्रांस, बेल्जियम, इटली, अल्बानिया जैसे देशों में हो रहे प्रदर्शनों में साफ दिखाई दे रही है, जहां प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर से की जा रही बर्बरता पर वह चुप है।
यूएन ने जारी नहीं किया एक भी बयान
आमतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों पर तत्काल एक्शन दिखाने वाला संयुक्त राष्ट्र कई दिन बाद भी यूरोपीय देशों में प्रदर्शनकारियों पर दंगा रोधी उपकरणों का इस्तेमाल किए जाने के बाद भी मौन है। रिपोर्ट के अनुसार अल्बानिया में अत्यधिक बल प्रयोग के कथित आरोपों के कारण सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। वहीं इटली और बेल्जियम में, दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि फ्रांस के अधिकारियों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और हिंसक झड़पों के बाद जांच का सामना करना पड़ा, जिसमें पुलिस अधिकारी और प्रदर्शनकारी दोनों घायल हुए।
यूरोप पर क्यों नहीं बोलता यूएन
वरिष्ठ पत्रकार और जियोपॉलिटकल एक्सपर्ट रंजीत कुमार ने कहा कि फ्रांस समेत, बेल्जियम, इटली, अल्बानिया, पुर्तगाल में जो दंगे हो रहे हैं, वह सब महंगाई बढ़ने के कारण हैं। मगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसके लिए माइग्रेशन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। सच्चाई यह है कि ट्रंप के एक्शन के कारण ही यूरोप समेत पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी है। चाहे वह रूस और ईरान के तेल पर टैरिफ और बैन लगाने की बात हो, ईरान पर युद्ध छेड़ने का मामला हो या माइग्रेशन को टारगेट करने का केस हो। इन सभी की वजह से महंगाई बढ़ी है। इसीलिए लोग सड़क पर हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और यूरोपीय देशों का ही बोलबाला है, इसलिए वहां पुलिस की बर्बरता पर यूएन मौन रहता है।
वहीं विदेश और रक्षा नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि प्रवासियों ने यूरोप और अमेरिका को बनाने में और वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बड़ा योगदान दिया है। अगर प्रवासी निकल जाएंगे तो इन देशों की हालत और ज्यादा बुरी हो जाएगी। प्रवासी वहां बहुत सस्ते वेतन पर काम कर रहे हैं, उसका फायदा पश्चिमी उद्योगों को मिल रहा है।
यूएन का डबल स्टैंडर्ड
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक इन चारों देशों में हुई पुलिस बर्बरता के संबंध में निंदा करने वाला एक भी बयान जारी नहीं किया है। इससे पश्चिमी देशों के प्रभाव में काम करने का यूएन पर लगने वाला आरोप एक बार फिर सही साबित होता दिख रहा है। इसमें यूएन का डबल स्टैंडर्ड भी सामने आया है।
📹 European Police Unleash Riot Gear Against Mass Protests; UN Remains Silent 🤐 Seven police officers were suspended in Albania over alleged excessive force. In Italy and Belgium, riot police deployed tear gas and water cannons, while French authorities faced scrutiny after mass arrests and violent clashes left officers and protesters injured. The UN is yet to issue a single condemnation of police brutality across all four countries.
— RT_India (@RT_India_news) October 19, 2026
इस पर रंजीत कुमार कहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका दोनों का दोहरा मापदंड है। यह सिर्फ ग्लोबल साउथ के देशों पर प्रहार करते हैं। यूरोपीय देशों में जब आम लोगों पर अत्याचार और बर्बरता होती है तो उसपर चुप रहते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका दोनों ही यूरोपीय देशों को बचाने में जुटे हैं, जबकि आम आदमी ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने से परेशान है। महंगाई रोकने के लिए वह कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।
फ्रांस में बिगड़े हालात, गृहमंत्री के इस्तीफे को मैक्रों ने किया नामंजूर
इधर फ्रांस में हिंसा और आगजनी का दौर सोमवार को भी जारी है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने सप्ताहांत के दौरान फ्रांस के बड़े शहरों में हुई हिंसा, दंगे और लूटपाट को लेकर अपने इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनसे पद पर बने रहने को कहा है। मैक्रों के कार्यालय ने सोमवार को कहा कि उन्होंने इस्तीफा इसलिए खारिज कर दिया, क्योंकि कानून-व्यवस्था की कमान लगातार बनाए रखना जरूरी है।
Macron Refuses Interior Minister’s Resignation as Riots Rock France President Macron has declined Laurent Nunez’s offer to quit despite ‘failures in anticipation and intelligence.’ France's Interior Minister should stay to 'ensure a chain of command is retained within the police and security forces,' Macron added, as per the Elysee Palace. Nunez admitted on Monday that police had ‘lost control’ in several cities with stores ransacked and govt buildings torched.
— RT_India (@RT_India_news) October 19, 2026
अब तक 2400 लोग गिरफ्तार
मैक्रों ने नुनेज को निर्देश दिया कि वे उन प्लानिंग और खुफिया जानकारी जुटाने की विफलताओं को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से सामने लाएं, जिनकी वजह से यह हिंसा भड़की। रविवार शाम को पेरिस, ल्यों और मार्सिले में प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर आग लगा दी। साथ ही दुकानों में लूटपाट की। बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति के खिलाफ शनिवार को देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। पूरे देश में कम से कम 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।







