सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ते संघर्ष में यमन के अंदर क्या चल रहा है? सऊदी के एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों के बीच पाकिस्तान और तुर्किये ने सैन्य मदद देने की बात कही है। मक्का डिफेंस अलायंस की बैठक के बाद क्षेत्रीय समीकरण भी चर्चा में हैं। लेकिन यमन में जमीनी स्तर पर सैन्य स्थिति क्या है और हूती नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को किस नजरिए से देख रहा है?
इन सवालों पर आरटी इंडिया के मैनेजिंग एडिटर अशोक बागड़िया ने यमन की सना सरकार (हूती नियंत्रित) के विदेश और प्रवासी मामलों के कार्यवाहक मंत्री अब्दुल वाहिद अबू रास से एक्सक्लूसिव बातचीत की।
बातचीत में अब्दुल वाहिद ने दावा किया कि हालिया घटनाक्रम के दौरान यमन में सऊदी शासन के किराए के सैनिकों की लामबंदी हुई है और उन्होंने कई इलाकों में आगे बढ़ने की कोशिश की है। यमन की सैन्य स्थिति पर हूती नियंत्रित सरकार का यह पक्ष ऐसे वक्त में सामने आया है, जब सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव बढ़ रहा है।
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हालांकि, सना सरकार से जुड़ी यमनी सेनाओं ने इन कोशिशों को नाकाम कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि कई इलाकों में लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर जमीन वापस हासिल करने में भी कामयाब रहीं, खासकर पश्चिमी तट और रणनीतिक रूप से अहम 'ताइज गवर्नरेट' में। जमीनी हकीकत यही है।
मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि जहां तक टकराव की मौजूदा स्थिति की बात है, सऊदी शासन लगातार यमनी इलाकों को निशाना बना रहा है और सऊदी लोग रोजाना नरसंहार कर रहे हैं। उन्होंगे आगे बताया कि इसके जवाब में, यमनी पक्ष भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है और सऊदी पक्ष को निशाना बना रहा है। इसमें उनके तेल ठिकाने, जरूरी बुनियादी ढांचे और सैन्य कैंप शामिल हैं। ऐसा इसलिए है कि यमन और यमन के लोगों के खिलाफ किए गए इन अपराधों का बदला लिया जा सके।
पाकिस्तान और तुर्की के इस संघर्ष में शामिल होने को लेकर सवाल पर मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि हमें यकीन है कि इन देशों में इतनी समझदारी और हालात को समझने की क्षमता है कि वे ऐसी अन्यायपूर्ण लड़ाइयों में शामिल नहीं होंगे जो यमनी लोगों को निशाना बनाती हैं, जबकि यमनी लोग खुद किसी को निशाना नहीं बनाते।
अब्दुल वाहिद ने कहा, दूसरी बात है कि पिछले कुछ समय में सऊदी सरकार ने कई नाम दिए हैं- जैसे अरब गठबंधन, फिर इस्लामिक गठबंधन, समुद्री गठबंधन में भागीदारी, और अब मक्का गठबंधन। उन्होंने कहा कि ये सब बस नाम भर हैं। सऊदी सरकार अभी यमनी लोगों का सामना अकेले कर रही है। यह सच है कि उसे अमेरिका और इजरायल का समर्थन हासिल है, और कभी-कभी पश्चिमी देश भी राजनीतिक समर्थन और हथियारों की बिक्री के जरिए इसमें शामिल होते हैं।
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मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा, हमें यकीन है कि इस क्षेत्र के देश ऐसे संघर्षों में शामिल नहीं होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे इस लड़ाई की प्रकृति को अच्छी तरह समझते हैं। वे यमनी लोगों की सच्चाई जानते हैं और वे इस लड़ाई में यमनी लोगों की सही और जायज मांगों से भी वाकिफ हैं।
किस दिशा में बढ़ रहा सऊदी-सना टकराव?
अब सऊदी हवाई हमलों और रियाद पर सना के मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ, यह टकराव असल में किस ओर बढ़ रहा है? इस सवाल के जवाब में मंत्री अब्दुल वाहिद का कहना है कि यह उस घोषित समीकरण के अनुसार आगे बढ़ रहा है: घेराबंदी के बदले घेराबंदी, एयरपोर्ट के बदले एयरपोर्ट, बंदरगाहों के बदले बंदरगाह, और तनाव बढ़ाने के बदले तनाव बढ़ाना। मंत्री ने आगे कहा कि जब भी सऊदी सरकार तनाव बढ़ाने और अधिक जगहों को निशाना बनाने की ओर बढ़ती है, तो यमनी सेना भी उसी दिशा में कदम उठाती है।
उन्होंने कहा कि हमने सभी को (अंतरराष्ट्रीय समुदाय, क्षेत्रीय देशों और यहां तक कि सऊदी सरकार को भी) यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारी मांग न्यायपूर्ण, स्पष्ट और जायज है। यह है हमारे देश पर लगी घेराबंदी को हटाना लेकिन हमारी बात अनसुनी कर दी गई। मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि यमन में सऊदी सरकार का एक एजेंडा है; उन्होंने यमन की जमीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है और उसी के आधार पर वे यह लड़ाई लड़ रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि इसलिए, अगर सऊदी सरकार को अक्ल आए और वह यमन की जमीन से पीछे हटने का फैसला करे, यमनी लोगों के खिलाफ नुकसान पहुंचाना, बुराई और आक्रामकता बंद करे, एयरपोर्ट और यमनी बंदरगाहों से घेराबंदी हटा ले, और यमनी लोगों को उनके तेल और गैस संसाधनों तक पहुंचने दे, तो ये टकराव निश्चित रूप से रुक जाएंगे। हालांकि, हम सऊदी सरकार की जिद देख रहे हैं क्योंकि वह तनाव बढ़ाने के रास्ते पर चल रही है। इस तरह वह हालात को और अधिक तनाव की ओर ले जा रही है।
सना सरकार तुरंत क्या हासिल करना चाहती है?
अब सऊदी अरब अपने हमलों को जवाबी कार्रवाई कहता है। सना सरकार उसे आक्रामकता कहते हैं। ऐसे में सना सरकार का तुरंत का मकसद क्या है? इस पर मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि इस साल जुलाई में जो हुआ, वह हमारी बात और सना के इस दावे की पुष्टि करता है कि हमलावर, शुरुआत करने वाला और तनाव कम करने के दौर (de-escalation phase) को खत्म करने वाला सऊदी पक्ष ही है। मंत्री ने कहा कि उसने तनाव कम करने के दौर में ही सना एयरपोर्ट को निशाना बनाया ताकि आम नागरिकों के लिए मानवीय सहायता वाली उड़ान में बाधा डाली जा सके।
मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि यमन अभी जो कर रहा है, वह मुकाबला करना है। ये सऊदी के व्यवहार और कार्यों पर प्रतिक्रियाएं हैं। इस तरह, सऊदी सरकार के दावे असलियत के उलट हैं। अगर सऊदी सरकार अपने दावों को लेकर सच में गंभीर है, तो उसे यह घोषित करना चाहिए कि यमन से उसका कोई लेना-देना नहीं है। वह एयरपोर्ट और यमनी बंदरगाहों से घेराबंदी हटा लेगी; और तब पूरी दुनिया देखेगी कि असल में कौन सा पक्ष घटनाओं और मामलों को और बड़े तनाव की ओर धकेल रहा है।
सऊदी से लड़ाई खत्म करने पर होगी बातचीत?
क्या सना सरकार लड़ाई खत्म करने के लिए सऊदी अरब के साथ सीधी बातचीत के लिए तैयार है? इस सवाल पर कार्यवाहक मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि हां, हमने सऊदी सरकार से बातचीत की मेज पर बैठकर उन बातों को लागू करने के लिए कहा है और अपील भी की है जिन पर सहमति बनी थी, लेकिन वे इससे बचते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड और लोगों की जानकारी के लिए (क्योंकि बहुत से लोग पिछली घटनाओं के बारे में नहीं जानते) मैं बताना चाहूंगा कि तनाव कम करने के दौर में सालों तक बातचीत चली थी और कई मुद्दों पर सहमति बनी थी, जिनमें सबसे अहम मानवीय मुद्दा था।
हालांकि, सऊदी सरकार उन सहमत बातों को लागू करने से पूरी तरह पीछे हट गई। इसलिए, हम अभी मानवीय मुद्दे को टकराव से अलग रखने, इन लड़ाइयों में मानवीय सुविधाओं को सुरक्षित रखने और आम लोगों को नुकसान पहुंचाने वाले सभी लक्ष्यों को टकराव से दूर रखने की मांग कर रहे हैं, और हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि हम लगातार राजनीतिक समाधान की बात करते रहे हैं, लेकिन सऊदी सरकार इससे पूरी तरह बच रही है और दूसरी भूमिकाएं निभाना चाहती है, जबकि वही मुख्य पक्ष है जो यमन को निशाना बनाने, यमन में संघर्ष जारी रखने, यमनी लोगों को बाँटने और यमन के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है।
ब्रिटेन, इजरायल के समर्थन का असर
क्या सऊदी अरब ब्रिटेन और इजरायल का समर्थन मांग रहा है और क्या इससे टकराव और बढ़ जाएगा? इस पर मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि समर्थन तो मिल ही रहा है। जहां तक सऊदी सरकार की बात है, तो जायोनी इजरायली सत्ता से उन्हें बिना घोषित समर्थन मिल सकता है। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन की बात करें तो उनका रुख साफ है।
हाल ही में सुरक्षा परिषद की बैठकों में भी ब्रिटेन ने यमन के लोगों के खिलाफ रुख अपनाया। मंत्री ने आगे कहा कि ब्रिटेन ने सऊदी की कार्रवाइयों का बचाव किया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्हें सही ठहराया। सच तो यह है कि इस तरह के दखल से टकराव और उलझ जाता है और इलाका एक बड़े टकराव की ओर बढ़ सकता है। इसके नतीजे और असर सभी पर पड़ सकते हैं।
ईरान-US समझौते से क्या बदल जाएगा?
अगर ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता या युद्धविराम होता है, तो क्या सना के ऑपरेशन्स में कोई बदलाव आएगा? इस पर सना सरकार के कार्यवाहक मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि यमन का रुख अपने आंतरिक और राष्ट्रीय मुद्दों तथा घरेलू मांगों को पूरा करने को लेकर स्पष्ट है। इनका किसी बाहरी एजेंडे से कोई लेना-देना नहीं है। मंत्री ने कहा कि हमने लड़ाई में शामिल सभी पक्षों (यमन और सऊदी अरब दोनों) से इसे परखने के लिए कहा है: सऊदी अरब यमन से अपना हाथ हटा ले, यमन की घेराबंदी खत्म करे, अपनी आक्रामक गतिविधियां रोके और यमनी जमीन से हट जाए; तब असलियत सबके सामने आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और अमेरिका के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं, यह पूरी तरह से एक अलग मुद्दा है। यह सच है कि क्षेत्र में हो रहे बदलावों से यमन को अपने राष्ट्रीय मकसद, अपनी जनता और अपनी आजादी व स्वतंत्रता हासिल करने में फायदा हुआ है। यमन लगातार इस बात पर जोर देता है कि लड़ाई की असल प्रकृति यही है, और सबूत व घटनाएं भी इसी बात की पुष्टि करते हैं।
सऊदी F-15 को गिराने का दावे पर जवाब
RT ने पूछा कि अब आपकी सेना का दावा है कि उसने सऊदी F-15 को मार गिराया है। इसे कैसे गिराया गया? इस पर मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि जैसा कि यमनी सशस्त्र बलों ने बताया, इसे एक उपयुक्त सतह-से-हवा में मार करने वाले हथियार से गिराया गया था। यमनी सशस्त्र बल सैन्य पहलुओं से जुड़ी ऑपरेशनल वजहों से इस जानकारी का पूरा विवरण अपने पास ही रखते हैं।
चैनलों और मीडिया आउटलेट्स ने इस विमान के कुछ हिस्से, टारगेट करने के ऑपरेशन के सबूत और विमान के बचे हुए मलबे की तस्वीरें दिखाई हैं—बस यही सब मौजूद है और इसकी पुष्टि करता है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है; पिछले समय और पिछले वर्षों में हुए हमलों के दौरान भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, और आखिर में दूसरे पक्ष—यानी सऊदी पक्ष—इससे इनकार करते रहे हैं, लेकिन अंततः वे इसे स्वीकार कर ही लेते हैं।
सना सरकार-US के बीच हो रही बातचीत?
RT ने ओमान में सना और अमेरिका के बीच बातचीत की खबरों की पुष्टि को लेकर सवाल पूछा। इस पर मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि कोई सीधी बातचीत या बैठक नहीं हुई थी, और उस समय यह बताया गया था कि फिलिस्तीनी लोगों के समर्थन और गाजा में जायोनी दुश्मन द्वारा किए जा रहे नरसंहार को रोकने की कोशिश के दौरान, सना ने वह मानवीय और सम्मानजनक रुख अपनाया और इजरायली दुश्मन को निशाना बनाना शुरू किया। फिर अमेरिकी पक्ष ने दखल दिया और यमन को निशाना बनाना शुरू किया।
उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह, यमन ने इस हमले का जवाब दिया और जवाबी कार्रवाई जारी रखी। जब अमेरिकी पक्ष यमनी लोगों को झुकाने या वश में करने और यमन को फिलिस्तीनी मुद्दे से अलग करने में अपनी अक्षमता के कारण लाचारी और निराशा की स्थिति में पहुंच गया, तो उसने खुद ही यमन के खिलाफ अपनी आक्रामकता रोकने की घोषणा कर दी, और नतीजतन यमन ने भी कार्रवाई रोक दी, क्योंकि यमन का रुख केवल एक प्रतिक्रिया थी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ओमान को इस बारे में बताया, और ओमान ने हमें बताया कि अमेरिकी दुश्मन अपने हमले रोकना चाहता है, और हमने उन्हें बताया कि हम पूरी तरह तैयार हैं, क्योंकि असल में हमारा रुख अमेरिकियों की हरकतों के जवाब के अलावा और कुछ नहीं था। बस इतना ही हुआ; कोई सीधी बातचीत, कोई सीधी समझ या कोई सीधी बैठक नहीं हुई-बस यही सब हुआ।
सना के मक्का पर हमले के आरोप का जवाब
सऊदी अरब ने सना पर मक्का को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। RT के इस सवाल पर मंत्री अब्दुल वाहिद ने कहा कि सऊदी सरकार पवित्र स्थलों का गलत इस्तेमाल करती है और मक्का-मदीना को अपनी उन योजनाओं में इस्तेमाल करती है जिनका मकसद यमन, इस क्षेत्र और इस्लामी समुदाय [उम्माह] के लोगों को निशाना बनाना है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले, सऊदी सरकार अपने सभी दावों में झूठ बोल रही है, और हमने इसे बार-बार साबित और कन्फर्म किया है। हाल ही में सशस्त्र बलों ने सऊदी हवाई क्षेत्र को बंद करने और सभी कंपनियों को मक्का-मदीना को छोड़कर सऊदी हवाई क्षेत्र से न गुजरने की चेतावनी देने की घोषणा की थी। यमनी सशस्त्र बलों ने साबित कर दिया है कि उनमें हर जगह सभी लक्ष्यों तक पहुँचने की क्षमता है- ऐसे लक्ष्य जो बहुत सक्षम और एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित थे, जिन्हें सशस्त्र बलों ने निशाना बनाया- जबकि मक्का और मदीना लक्ष्य के दायरे से बाहर हैं।
मंत्री अब्दुल हामिद ने कहा कि मक्का और मदीना हमारे लिए पवित्र स्थल हैं, और ऐसी हरकतें न तो कभी हुई हैं और न ही कभी होंगी। सऊदी सरकार ही है जो अलग-अलग तरीकों से मक्का और मदीना को निशाना बना रही है, और इस्लामी लोग यह बात और इस स्थिति की सच्चाई जानते हैं। सऊदी सरकार ही है जो समुदाय को मक्का-मदीना से और मुख्य मुद्दों पर अपनी असली भूमिका से दूर कर रही है।
उन्होंने कहा कि इसलिए, इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है। ये झूठे दावे हैं और बहुत बड़ा आरोप है। यमनी लोगों ने इन दावों को खारिज करते हुए लाखों की संख्या में प्रदर्शन किए। यहां तक कि ट्रंप ने भी कुछ समय पहले पवित्र मक्का का अपमान किया था और जबानी तौर पर उसे निशाना बनाया था।
अब्दुल वाहिद ने कहा कि तब यमनी लोग लाखों की संख्या में बाहर निकले और इस रुख को खारिज किया, इसकी निंदा की और इसका विरोध किया, जबकि सऊदी सरकार ने कोई रुख नहीं अपनाया। यहां तक कि वहां के किसी अधिकारी ने कोई बयान भी नहीं दिया। इसलिए, सऊदी जो कुछ भी दावा करते हैं, उसमें झूठ बोलते हैं, और इन दावों का कोई आधार नहीं है।