आसमान में धुएं की लकीर और समुद्र में धमाके की गूंज। उत्तर कोरिया के लिए यह अब कोई असाधारण घटना नहीं, बल्कि शक्ति-प्रदर्शन का नियमित तरीका बन चुका है। किम जोंग उन के प्रशासन को न तो अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों की परवाह है, न ही आर्थिक पाबंदियों की। वह अपने तरकश से लगातार एक के बाद एक घातक मिसाइलें दाग रहा है। इससे दक्षिण कोरिया से लेकर जापान और अमेरिका तक खलबली मच जाती है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने गुरुवार को अपने पूर्वी तट के पास समुद्र की ओर करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। इसकी वजह प्योंगयांग को महीने के आखिर तक भारी सुरक्षा वाले सीमा क्षेत्र में प्रचार के लिए लाउडस्पीकर चालू करने की तय समयसीमा है।
वहीं, उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण के बाद जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के पुख्ता इंतजाम रखने के निर्देश दिए।
मगर क्या आपने कभी सोचा है कि उत्तर कोरिया बार-बार बैलिस्टिक और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें क्यों दागता है? आखिर इन मिसाइलों के परीक्षण के पीछे उसकी क्या रणनीति है? आइए, एक्सपर्ट से समझते हैं पूरा मामला।
अक्सर मिसाइलें लॉन्च क्यों करता है उत्तर कोरिया?
जामिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राजीव नयन ने RT हिंदी से बातचीत में कहा कि उत्तर कोरिया के जल्दी-जल्दी मिसाइल टेस्टिंग करने के कई कारण हैं। वह अपना क्षेत्रीय दबदबा बनाए रखने, टेक्नोलॉजी वैलिडेशन समेत कई वजहों से इस तरह की लॉन्चिंग करता रहता है।
1.टेक्नोलॉजी टेस्टिंग एंड वैलिडेशन
प्रोफेसर राजीव नयन कहते हैं कि इस माध्यम से उत्तर कोरिया मिसाइल टेक्नोलॉजी को लगातार वैलिडेट करता रहता है। उसका मकसद टेक्नोलॉजिकल रिफाइनमेंट करना है, क्योंकि बार-बार टेस्टिंग से टेक्नोलॉजी में लगातार सुधार और अपग्रेडेशन का मौका मिलता है। कमियों को दूर किया जा सकता है और इसे और अधिक उन्नत बनाया जा सकता है। उत्तर कोरिया अपनी टेक्नोलॉजी को इस तरह अत्यधिक हाईटेक और भरोसेमंद बनाने के लिए वैलिडेट करता रहता है।
2. डिजाइन प्रोलिफरेशन
प्रोफेसर राजीव नयन ने कहा कि लगातार टेस्टिंग की दूसरी वजह मिसाइल प्रोलिफरेशन है, जिसका मतलब मिसाइल तकनीक, सिस्टम और नॉलेज को बढ़ाना है। इसमें उसके कई भरोसेमंद सहयोगी देश भी आंतरिक रूप से शामिल होते हैं। इसमें बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइल संबंधी तकनीक का विकास यानी रॉकेट इंजन, गाइडेंस सिस्टम, वारहेड आदि का विकास करना, टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर करना और मिसाइल प्रसार शामिल होता है। इस मिशन में ऐसी खतरनाक मिसाइलें शामिल हो सकती हैं, जो परमाणु वारहेड या रासायनिक हथियारों को ले जाने में सक्षम होती हैं।
3. मिसाइल टेस्टिंग का हब
प्रोफेसर नयन बताते हैं कि वह दूसरे देशों के लिए ‘मिसाइल टेस्टिंग लैब’ की तरह भी काम कर रहा है। चीन जैसे देश भी उत्तर कोरिया के इस काम में भागीदार हो सकते हैं। उत्तर कोरिया टेक्नोलॉजी रिफाइनमेंट के जरिये चीन जैसे देशों की टेक्नोलॉजी को भी वैलिडेट करता रहता है।
वह कहते हैं, "किम जोंग उन एक तरह से अपने देश को मिसाइल टेस्टिंग का हब बना चुके हैं। वह दूसरे देशों की टेक्नोलॉजी का भी अपने देश में परीक्षण करते हैं। इसकी वजह यह है कि उत्तर कोरिया को किसी तरह के प्रतिबंधों का डर नहीं है। इसलिए वह बेफिक्र होकर लगातार नई-नई मिसाइलें लॉन्च करता रहता है।"
4. मजबूत क्षेत्रीय ताकत का संदेश
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट राज यादव ने RT हिंदी से बातचीत में कहा कि उत्तर कोरिया एक न्यूक्लियर पावर है। वह अपनी उस ताकत की रिलेवेंसी को साबित करने और खुद को मजबूत देश के रूप में प्रदर्शित करने के लिए ऐसा करता है।
वहीं प्रोफेसर नयन बताते हैं कि उत्तर कोरिया खुद को क्षेत्रीय ताकत के रूप में प्रदर्शित करता है, ताकि क्षेत्र में उसका प्रभाव, दबदबा या कहें कि धौंस बनी रहे। उन्होंने आगे कहा कि उसे अपनी यह पावर केवल दक्षिण कोरिया या जापान को नहीं दिखानी होती, बल्कि उसकी मदद के लिए आने वाले अमेरिका को इसका एहसास कराने के लिए भी वह अक्सर मिसाइल टेस्टिंग करता है।
इसके साथ ही प्रोफेसर नयन कहते हैं कि उत्तर कोरिया मिसाइल लॉन्च के जरिये खुद के स्ट्रॉन्ग रीजनल पावर होने का सिग्नल देता रहता है। यह उसकी मजबूत मौजूदगी का संकेत होता है। इसके अलावा, वह खुद को मिलिट्री के पावर हाउस के रूप में देखता है।
5. वार स्ट्रैटेजी
जानकार उत्तर कोरिया के बार-बार मिसाइल दागने को उसकी वार स्ट्रैटेजी के तौर पर भी देखते हैं। इसके जरिए वह अपने दुश्मनों को यह बताने की कोशिश करता है कि वह हमेशा युद्ध के लिए तैयार है।
वहीं, प्रोफेसर राज यादव कहती हैं कि किम जोंग उन अमेरिका को यह एहसास कराना चाहते हैं कि अगर वह दक्षिण कोरिया या जापान के बीच में आया, तो खुद को सुरक्षित न समझे, क्योंकि उत्तर कोरियाई मिसाइलों की रेंज पूरे अमेरिका तक है। इसके साथ ही वह बताती हैं कि उत्तर कोरिया चीन और रूस के जरिए अपनी टेक्नोलॉजी को लगातार अपग्रेड और मजबूत कर रहा है।
उत्तर कोरियाई हथियारों के प्रमुख खरीदार:
प्रोफेसर नयन के मुताबिक, उत्तर कोरिया के इन मिसाइल परीक्षणों के पीछे एक बड़ा मकसद अपने हथियारों का बाजार तलाशना और खरीदार देशों को आकर्षित करना भी है। हालांकि, कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते उसके हथियारों के सीधे खरीदारों में ईरान, सीरिया और युगांडा जैसे कुछ गिने-चुने देश ही शामिल हैं।
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