एशिया के शेयर बाजारों में गुरुवार, 22 अक्टूबर को भारी गिरावट देखने को मिली। चीन के शेयर बाजार पर भी गिरावट का असर दिखा। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े एशियाई इंडेक्स में 2 से 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसमें दक्षिण कोरिया का KOSPI 3.5% और जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 2.4% नीचे आ गया।
हॉन्गकॉन्ग का हैंग सेंग 3% गिर गया। शंघाई और शेन्जेन में लिस्टेड 300 प्रमुख कंपनियों को ट्रैक करने वाला CSI 300 इंडेक्स भी 1.6 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि शंघाई कंपोजिट 1.4% नीचे आ गया।
इस गिरावट के साथ शेयर मार्केट जून के अपने टॉप लेवल से लगभग 20 प्रतिशत नीचे आ गया है। मई 2026 में अपने उच्चतम स्तर के बाद से चीनी शेयरों के बाजार मूल्य में 2.4 ट्रिलियन डॉलर की गिरावट आई है, जिससे CSI 300 इंडेक्स जैसे प्रमुख सूचकांक 'बियर मार्केट' (मंदी के दौर) की स्थिति में पहुंच गए हैं।
हाल के टॉप लेवल से 20 प्रतिशत की गिरावट को तकनीकी रूप से 'बियर मार्केट' माना जाता है। हालांकि, भारत के बाजार में एशिया के अन्य बाजारों की तुलना में गिरावट कम रही। भारत में सेंसेक्स में करीब 0.62% की गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट की वजह
एशियाई बाजारों में गिरावट की मुख्य वजह टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली रही। वॉल स्ट्रीट के नतीजों से AI निवेश की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं कम नहीं हो सकीं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया। इससे निवेशकों का रिस्क लेने का उत्साह कम हो गया।
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की नई सैन्य योजनाओं की खबरों के बाद तेल की कीमतों में भी उछाल आया। जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर तेल बाजारों पर दिखा।
सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के और हमले होने के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष और सप्लाई में बाधा आने का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 2% से ज्यादा बढ़कर 111.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का उच्चतम स्तर है।
ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स की कीमतों में उछाल के साथ ही अर्निंग सीजन के दौरान AI से जुड़े शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसका असर बाजार पर दिखा।
अमेरिका की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के मिले-जुले नतीजों ने निवेशकों को इस बात का भरोसा नहीं दिलाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में किए गए भारी-भरकम निवेश से अच्छा रिटर्न मिलेगा। निवेशक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या डेटा सेंटरों और कंप्यूटिंग क्षमता पर भारी खर्च से पर्याप्त रिटर्न मिल पाएगा।
इसके साथ ही, फाइनेंसिंग की लागत और बहुत अधिक वैल्यूएशन ने ‘AI बबल’ बनने की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। इससे सेमीकंडक्टर शेयरों और चीनी इक्विटी पर दबाव फिर से बढ़ गया है।
टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बिकवाली का सबसे ज्यादा असर दक्षिण कोरिया की चिप बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा। इसमें SK हाइनिक्स 4% और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स 3.6% गिर गए। जापान की किओक्सिया (Kioxia) में 3.3% और मुराता मैन्युफैक्चरिंग में 2.1% की गिरावट आई। ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग 0.6% नीचे आ गई। वहीं, फॉक्सकॉन में 1% की गिरावट दर्ज की गई। हांगकांग के टेक्नोलॉजी शेयरों में 4.6% की गिरावट दर्ज की गई।
क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि चीन के शेयर बाजार को यह समझ आ रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उछाल भी निवेशकों को हमेशा उत्साहित नहीं रख सकता। टेक्नोलॉजी को लेकर महीनों की उम्मीद, सरकारी मदद की आस और आर्थिक सुधार की संभावनाओं के बाद देश के सबसे बड़े शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है।
यह बिकवाली हांगकांग में लिस्टेड चाइनीज कंपनियों तक भी फैल गई है। शहर के प्रमुख शेयरों पर नजर रखने वाला एक सूचकांक 2.9% तक गिर गया। ये चीन के आर्थिक परिदृश्य और टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर बढ़ती घबराहट को दर्शाता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुश्किलें किसी एक तरफ से नहीं आ रही हैं। इन्वेस्टर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शेयरों की संभावनाओं का फिर से आकलन कर रहे हैं। साथ ही, घरेलू मांग की मजबूती पर सवाल उठा रहे हैं। निवेशक नीतिगत समर्थन के स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
चीनी बाजार में क्यों आई गिरावट?
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी शेयर बाजार में गिरावट के तीन कारण बताए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि गुरुवार को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की नई सैन्य योजनाओं की खबरों के बाद तेल की कीमतों में भी उछाल आया। इससे बाजार में जोखिम से बचने (रिस्क-ऑफ) का माहौल और गहरा गया।
वहीं, बड़ी इकोनॉमी की बेहतर ग्रोथ की वजह से प्रोत्साहन (Stimulus) पैकेज की उम्मीदें खत्म होने, बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL के मुनाफे में कमी और अलग-अलग कंपनियों की प्रॉफिट ग्रोथ धीमी होने की बात कही गई है। इसके साथ ही चीनी बाजार को लेकर ग्लोबल और लोकल इन्वेस्टर्स का मूड भी प्रभावित हुआ है।
1. बेहतर ग्रोथ से बडे़ प्रोत्साहन की उम्मीद धूमिल
आमतौर पर मजबूत ग्रोथ के आंकड़े शेयरों में तेजी लाते हैं। लेकिन इस बार शायद इनका उल्टा असर हुआ है। जुलाई-सितंबर तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था में सालाना आधार पर 4.5% की वृद्धि हुई, जो पिछली तिमाही के 4.3% से अधिक है और विश्लेषकों के 4.4% के अनुमान से भी बेहतर है।
पहले नौ महीनों में ग्रोथ 4.6% रही, जो बीजिंग के 4.5–5% के लक्ष्य दायरे के भीतर है। इससे बीजिंग सही रास्ते पर बना हुआ है और उसे कोई बड़ा कदम उठाने की खास जरूरत नहीं दिखती।
कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि इन मजबूत आंकड़ों के कारण साल की आखिरी तिमाही में किसी बड़े प्रोत्साहन (Stimulus) की जरूरत कम हो गई है। वैश्विक निवेशक जिस तरह के बड़े वित्तीय पैकेज की उम्मीद कर रहे थे, उसके बजाय बीजिंग ने छोटे और लक्षित समर्थन उपायों को ही अपनाया है।
जो बाजार प्रोत्साहन की उम्मीदों के सहारे चल रहा था, उसके लिए यह निराशाजनक है। ग्रोथ के इन आंकड़ों के पीछे कुछ कमजोरियां भी छिपी हैं। सितंबर में खुदरा बिक्री (retail sales) में केवल 1.1% की वृद्धि हुई, जो दिखाता है कि आम लोग अभी भी खर्च करने को लेकर सतर्क हैं।
2. CATL के शेयरों में गिरावट, कंपनियों का मुनाफा घटा
रिपोर्ट के अनुसार, चीनी बाजार में गिरावट का दूसरा बड़ा कारण कॉर्पोरेट कमाई है। इसमें सबसे बड़ा झटका बैटरी बनाने वाली कंपनी CATL की तरफ से लगा है। बुधवार को शेन्जेन स्टॉक एक्सचेंज में CATL के शेयर 12.03% गिरकर बंद हुए, जबकि हांगकांग में इसके शेयरों में 11% से ज्यादा की गिरावट आई।
समस्या बिक्री की नहीं थी। सालाना आधार पर रेवेन्यू 58.6% बढ़कर 165.2 अरब युआन हो गया, लेकिन नेट प्रॉफिट केवल 14.5% बढ़कर 21.2 अरब युआन रहा। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 5.8% कम है।
LSEG के अनुमानों के अनुसार, मार्केट एनालिस्ट्स ने लगभग 41% प्रॉफिट ग्रोथ की उम्मीद जताई थी, लेकिन नतीजे इससे काफी कम रहे। CATL ने मार्जिन पर दबाव के लिए अपने प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव, बैटरी खपत टैक्स की वापसी और एक्सपोर्ट टैक्स रिबेट (छूट) में कमी को जिम्मेदार ठहराया है।
यह समस्या काफी समय से पनप रही थी। बुधवार को बाजार बंद होने के समय यह स्टॉक 6 मई के अपने 460 युआन के टॉप लेवल से लगभग 50% नीचे आ गया था। CATL कोई अकेला मामला नहीं है।
चीन के अलग-अलग सेक्टरों की कंपनियों में प्रॉफिट ग्रोथ धीमी हुई है। इसकी वजह है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उनके मार्जिन घट रहे हैं। सितंबर में औद्योगिक मुनाफे की वृद्धि दर भी इस साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई। चूंकि इंडेक्स में CATL का वेटेज (भारांक) काफी ज्यादा है, इसलिए इसमें आई गिरावट ने मुख्य चीनी स्टॉक एक्सचेंजों पर बैटरी, एनर्जी-मेटल्स और न्यू-एनर्जी से जुड़े शेयरों को भी नीचे खींच लिया।
3.ग्लोबल और लोकल निवेशकों का मूड
रिपोर्ट में चीनी मार्केट में भारी गिरावट का तीसरा कारक निवेशकों का मूड बताया गया है। ये निवेशक ग्लोबल और लोकल, दोनों लेवल पर हैं। 'चाइना मार्केट रिसर्च ग्रुप' के मैनेजिंग डायरेक्टर शॉन रेन ने CNBC से बातचीत में कहा कि बाजार में और बिकवाली देखने को मिल सकती है। उन्होंने बाजार में गिरावट के लिए भू-राजनीतिक अनिश्चितता, AI बबल का डर और उपभोक्ताओं के घटते भरोसे को जिम्मेदार ठहराया।
गुरुवार को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की नई सैन्य योजनाओं की खबरों के बाद तेल की कीमतों में भी उछाल आया। इससे बाजार में जोखिम से बचने (रिस्क-ऑफ) का माहौल और गहरा गया। चीन के बाजार की बनावट ऐसी है कि वहां उतार-चढ़ाव और भी तेज होते हैं।
HSBC के आंकड़ों के अनुसार, चीन में रोज होने वाले कारोबार में खुदरा निवेशकों (रिटेल इन्वेस्टर्स) की हिस्सेदारी लगभग 90% है, जबकि न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में यह आंकड़ा करीब 20-25% है। अनिश्चितता बढ़ने पर व्यक्तिगत निवेशक अक्सर तेजी से बिकवाली करते हैं। इसके चलते बाजार में मामूली गिरावट भी बहुत जल्दी बड़ी गिरावट में बदल सकती है।
भारत में लगातार तीसरे दिन सेंसेक्ट में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लगातार तीसरे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 400 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 22,700 के स्तर से नीचे आ गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण निवेशकों पर असर पड़ा।
सेंसेक्स 460.30 अंक (0.62%) की गिरावट के साथ 73,249.39 पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 73,709.69 पर था। इसी तरह, निफ्टी 123.70 अंक (0.54%) गिरकर 22,687.65 पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 22,811.35 पर था।
बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेक्टोरल सूचकांकों में से ज्यादातर लाल निशान में रहे। इसमें मीडिया सेक्टर सबसे ज्यादा 2% से अधिक टूटा। इसके बाद FMCG, मिड-स्मॉल IT और टेलीकॉम तथा IT सेक्टर में भी गिरावट दर्ज की गई।
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