भारत के लिए चाबहार के रास्ते 730 किमी का रेल रूट तैयार, ईरान से RT रिपोर्टर की ग्राउंड रिपोर्ट

भारत से दूर ईरान में एक रेल पटरी बिछाई गई है। इसका फायदा भारत को भी होने वाला है। चाबहार-जहेदान रेल लिंक आखिर भारत के व्यापार के लिए कैसे गुड न्यूज है? RT की ग्राउंड रिपोर्ट में समझिए।

भारत के लिए पाकिस्तान से होकर गुजरे बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक ट्रेड रूट तैयार हो गया है। इससे रूस और यूरेशिया के दूसरे बाजारों तक पहुंचने की भी संभावनाएं बढ़ गई हैं। जी हां, ईरान ने जहेदान-चाबहार रेलवे लाइन का निर्माण पूरा कर लिया है। RT के रिपोर्टर समन खजूरी ने मौके पर पहुंचकर इस परियोजना का जायजा लिया।

करीब 730 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन चाबहार बंदरगाह को जहेदान और ईरान के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। रेल सेवा शुरू होने से पहले अभी सुरक्षा जांच पूरी होनी बाकी है। उम्मीद है अगले दो से तीन महीनों में ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। आगे समझिए ये रेलवे लाइन ईरान के साथ-साथ भारत के लिए कितनी उपयोगी साबित होगी।  

चाबहार मतलब यूरोप-रूस तक जाने का कनेक्शन

चाबहार बंदरगाह से पिछले कुछ महीनों में होने वाला पारगमन कारोबार (Transit Trade) पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 10 गुना बढ़ा है। रेलवे लाइन शुरू होने के बाद इसमें और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और दोबारा निर्यात के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

चाबहार बंदरगाह ईरान और उसके पड़ोसी देशों को यूरोप, रूस, काकेशस और मध्य एशिया के बाजारों से जोड़ने की क्षमता रखता है। स्वेज नहर के पारंपरिक समुद्री मार्ग के विकल्प के तौर पर चाबहार का इस्तेमाल करने से दूरी करीब 16,000 किलोमीटर से घटकर 7,200 किलोमीटर रह सकती है। इससे दूरी में लगभग 40 प्रतिशत और परिवहन लागत में करीब 30 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है।

39 सुरंगों और 201 पुलों से होकर गुजरेगी ट्रेन

दक्षिण-पूर्व ईरान के पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली यह रेलवे की एक बड़ी इंजीनियरिंग परियोजना है। इसके रास्ते में 39 सुरंगें, 201 से ज्यादा पुल और 33 स्टेशन हैं। चाबहार मुक्त व्यापार क्षेत्र के परिवहन और पारगमन विभाग के उपप्रमुख के मुताबिक, इस रेलवे से हर साल 70 लाख टन से ज्यादा माल और 9 लाख से 10 लाख यात्रियों के आवागमन की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क के साथ संपर्क मजबूत हो सकता है और सामान की आवाजाही के लिए नए विकल्प मिल सकते हैं।

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अब समझिए चाबहार और जहेदान कहां हैं?

चाबहार ईरान के दक्षिण-पूर्व में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत (Sistan and Baluchestan Province) में स्थित बंदरगाह शहर है। यह ओमान की खाड़ी के तट पर है और हिंद महासागर से सीधे जुड़ा है। वहीं जहेदान इसी प्रांत की राजधानी है, जो ईरान के अंदर की तरफ और अफगानिस्तान-पाकिस्तान की दिशा में स्थित है।

यानी नक्शे पर देखें तो चाबहार समुद्र से जुड़ा दक्षिणी गेट-वे है, जबकि जहेदान ईरान के अंदर से अफगानिस्तान और आगे मध्य एशिया की ओर बढ़ने वाली कड़ी। दोनों के बीच लंबी रेल लाइन बिछाई गई है।

पाक से होकर जाने की जरूरत नहीं

हां, भारत के लिए इस रेलवे का सबसे अहम पहलू अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक वैकल्पिक पहुंच है। चाबहार बंदरगाह पर समुद्र के रास्ते पहुंचने वाला माल वहां से रेल के जरिए जहेदान तक ले जाया जा सकेगा। इसके बाद उसे व्यापक क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।

आगे के संपर्क विकसित होने पर भारत के लिए रूस और यूरेशिया के अन्य बाजारों तक पहुंच की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे भारत को अपने व्यापार मार्गों में विविधता लाने और ऐसे क्षेत्रों के साथ आर्थिक संपर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है, जहां तक उसकी सीधी पहुंच लंबे समय से चुनौती रही है।

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भारत चाबहार के शहीद बेहेश्ती बंदरगाह के संचालन में 10 साल के समझौते के तहत शामिल है। ईरान के एक अधिकारी के मुताबिक, क्षेत्रीय तनाव और नौसैनिक नाकेबंदी के कारण जहाजों की आवाजाही कभी-कभी प्रभावित हुई है, लेकिन भारत ने बंदरगाह से अपना जुड़ाव नहीं छोड़ा है।

उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से जुड़ने की संभावना

जहेदान-चाबहार रेलवे की व्यापक योजना ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों को उत्तर में कैस्पियन सागर और उससे आगे के परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की है। इसमें अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा भी शामिल है। इस नेटवर्क के विकसित होने पर हिंद महासागर से मध्य एशिया और यूरेशिया के बाजारों तक माल पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

रेल लाइन बनकर तैयार हो गई है, लेकिन प्रतिबंधों और दूसरे देशों की सीमाओं के पार सामान की आवाजाही आसान बनाना अब भी चुनौती है। इस रेल मार्ग से व्यापार शुरू करने के लिए जरूरी सुविधाएं और कारोबारी समझौते भी विकसित करने होंगे।

इसके बावजूद, 730 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण पूरा होना क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम है। अगर आगे की कड़ियां योजनानुसार विकसित होती हैं, तो चाबहार क्षेत्रीय व्यापार और माल ढुलाई के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है। इससे ईरान, भारत और मध्य एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

इस रेलवे नेटवर्क से भारत को कौन-कौन से फायदे?

पहला फायदा- अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच।

भारतीय सामान समुद्र के रास्ते चाबहार पहुंचकर वहां से रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए अफगानिस्तान और आगे मध्य एशिया के बाजारों तक जा सकता है।

दूसरा फायदा- पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भरता से बचने का विकल्प।

भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे भूमि मार्ग से व्यापारिक आवाजाही सीमित है। ऐसे में चाबहार ऐसा वैकल्पिक रास्ता देता है, जिसमें भारतीय माल को पाकिस्तान से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती।

तीसरा फायदा- मध्य एशिया के साथ व्यापार को बढ़ाने का विकल्प।

भारत की मध्य एशिया तक सीधी भौगोलिक पहुंच मुश्किल है। चाबहार और INSTC जैसे नेटवर्क समुद्र के रास्ते ईरान पहुंचने और वहां से आगे रेल-सड़क कनेक्टिविटी का विकल्प देते हैं।

अफगानिस्तान के लिए क्यों अहम?

अफगानिस्तान के पास समुद्र तक अपनी सीधी पहुंच नहीं है। चाबहार उसके लिए हिंद महासागर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक एक वैकल्पिक रास्ता बन सकता है।

अफगान मीडिया के मुताबिक आगे चलकर अगर चाबहार-जहेदान रेल और अफगानिस्तान की खाफ-हेरात रेलवे जैसी परियोजनाएं प्रभावी रूप से जुड़ती हैं, तो अफगानिस्तान से आने-जाने वाले माल को चाबहार के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

हालांकि इसके लिए सिर्फ रेल लाइन का तैयार होना पर्याप्त नहीं होगा। ट्रांजिट समझौते, सीमा शुल्क, माल ढुलाई की लागत, अफगानिस्तान की रेल कनेक्टिविटी और चाबहार पोर्ट की क्षमता भी अहम होगी।