स्टारलिंक ने जहां रखे कदम, वहीं खड़ा हुआ विवाद... ईरान से ब्राजील तक लंबी लिस्ट

स्टारलिंक जहां पहुंचता है, वहां सिर्फ इंटरनेट नहीं पहुंचता। साथ में लाइसेंस, राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक प्रभाव और संप्रभुता के सवाल भी पहुंचते हैं। अमेरिका की इस कंपनी और विवादों का नाता काफी पुराना है।

अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी SpaceX का स्टारलिंक दुनिया को हाई-स्पीड इंटरनेट देने के लिए आसमान में सैटेलाइट का जाल बिछा रही है। लेकिन जहां-जहां यह जाल फैल रहा है, वहां-वहां इसके साथ विवाद भी सामने आ रहे हैं। ताजा मामला ईरान का है, जहां स्टारलिंक के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर नॉर्वे के राजदूत को ही तलब कर लिया गया। ईरान का कहना है कि उसके इलाके में स्टारलिंक के टर्मिनल बिना अनुमति काम कर रहे हैं और इन्हें रोकने की जिम्मेदारी नॉर्वे और स्टारलिंक के ऑपरेटर की भी बनती है। मामला इतना गंभीर हुआ कि तेहरान ने नॉर्वे के राजदूत को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।

लेकिन सवाल सिर्फ ईरान का नहीं है। बांग्लादेश में स्टारलिंक की एंट्री राजनीतिक बहस का मुद्दा बनी, दक्षिण अफ्रीका में लाइसेंस को लेकर सवाल उठे, यूक्रेन में इसका नेटवर्क संघर्ष के मैदान की जरूरत बन गया और इटली में सरकारी संचार के लिए इसके इस्तेमाल पर राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस छिड़ी।

आखिर एक अमेरिकी निजी कंपनी का सैटेलाइट नेटवर्क इतना ताकतवर कैसे हो गया कि कई देशों में अब सवाल सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सरकारी नियंत्रण का है?

ईरान: स्टारलिंक पर विवाद इतना बढ़ा कि नॉर्वे के राजदूत को तलब किया

स्टारलिंक को लेकर ईरान और पश्चिम के बीच विवाद अब कूटनीतिक स्तर तक पहुंच गया है। 4 अक्टूबर 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने तेहरान में नॉर्वे के राजदूत को तलब किया। वजह थी ईरान में स्टारलिंक के टर्मिनलों का बिना अनुमति संचालन। ईरान ने राजदूत को औपचारिक विरोध-पत्र सौंपते हुए मांग की कि नॉर्वे स्टारलिंक की इन सेवाओं को तुरंत रोकने के लिए कदम उठाए।

ईरान का तर्क है कि स्टारलिंक के इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन (ITU) रजिस्ट्रेशन में नॉर्वे की अहम भूमिका है, इसलिए नॉर्वे की जिम्मेदारी बनती है कि ईरानी क्षेत्र में बिना अनुमति चल रहे स्टारलिंक ट्रांसमिशन को रोका जाए। ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर भी स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट प्रणालियों का इस्तेमाल अपने खिलाफ गतिविधियों के लिए करने की बात कही है।

मामला सिर्फ ईरान का दावा नहीं है। ITU का रेडियो रेगुलेशन बोर्ड भी इस विवाद पर कई बार चिंता जता चुका है। उसके रिकॉर्ड के मुताबिक ईरान ने लगातार अपने इलाके में अनधिकृत स्टारलिंक टर्मिनलों की मौजूदगी की शिकायत की है। बोर्ड ने नॉर्वे और अमेरिका से यह भी पूछा कि जब स्टारलिंक दूसरे देशों में अवैध टर्मिनलों को तकनीकी तौर पर बंद कर चुका है, तो ईरान में ऐसा व्यवस्थित तरीके से क्यों नहीं किया जा सका।

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ITU के एक फैसले में बोर्ड ने नॉर्वे से Starlink ऑपरेटर के जरिए ईरान में चल रहे अनधिकृत टर्मिनलों के ट्रांसमिशन को तुरंत बंद कराने के लिए उपलब्ध सभी उचित कदम उठाने को कहा था। उसी रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि Starlink ने एक दूसरे क्षेत्र में 2,500 से ज्यादा अवैध टर्मिनलों की पहचान कर उन्हें दूर से बंद किया था, यानी सिस्टम में टर्मिनलों को जियोलोकेट और निष्क्रिय करने की क्षमता मौजूद है।

यहीं से इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल निकलता है कि अगर Starlink तकनीकी रूप से यह पता लगा सकता है कि उसके टर्मिनल कहां इस्तेमाल हो रहे हैं और उन्हें दूर से बंद भी कर सकता है, तो किसी देश की स्पष्ट आपत्ति के बावजूद वहां सेवा जारी रहने पर जिम्मेदारी किसकी है- देश की, ITU की, नॉर्वे की या अमेरिकी कंपनी SpaceX की?

बांग्लादेश: इंटरनेट बंद हुआ तो Starlink बना समाधान, फिर विरोध का मुद्दा

बांग्लादेश में Starlink की कहानी और दिलचस्प है। 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शन बढ़ने के दौरान इंटरनेट और टेक्स्ट मैसेजिंग सेवाएं बंद की गई थीं। इसके बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने स्टारलिंक को ऐसे विकल्प के तौर पर देखा, जिसे भविष्य में कोई सरकार आसानी से बंद नहीं कर सके। मार्च 2025 में यूनुस ने कहा था कि स्टारलिंक आने पर कोई सरकार लोगों को इंटरनेट से काट नहीं सकेगी। मई 2025 में स्टारलिंक ने बांग्लादेश में सेवा शुरू कर दी। लेकिन कुछ ही समय बाद यही कंपनी राजनीतिक विरोध का हिस्सा बन गई। जून 2025 में वामपंथी और दूसरे राजनीतिक संगठनों के गठबंधन ने ढाका से चटगांव तक मार्च निकाला। उनकी मांगों में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के साथ समझौता रद्द करना भी शामिल था। प्रदर्शनकारियों ने इसे विदेशी प्रभाव और राष्ट्रीय संप्रभुता से जोड़ा।

यानी बांग्लादेश में Starlink की कहानी दो बिल्कुल उलटे सवाल सामने रखती है-

पहले सवाल था: सरकार इंटरनेट बंद कर दे तो जनता के पास क्या विकल्प होगा?

बाद में सवाल बना: उस विकल्प का कंट्रोल आखिर किसके हाथ में होगा?

दक्षिण अफ्रीका: लाइसेंस नहीं तो सेवा कैसे?

दक्षिण अफ्रीका में विवाद सीधे नियमन और लाइसेंस का है। मई 2025 में वहां के टेलीकॉम रेगुलेटर ICASA ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें मिली हैं कि Starlink देश में जरूरी अनुमति के बिना सेवाएं दे रहा है। रेगुलेटर ने SpaceX से जवाब मांगा और औपचारिक जांच शुरू कर दी। उसने फील्ड इंस्पेक्शन भी शुरू किए और कहा कि नियमों का उल्लंघन मिलने पर ITU में शिकायत की जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका पहले से ही सैटेलाइट सेवाओं के लिए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क तैयार कर रहा था। इसमें विदेशी सैटेलाइट कंपनियों के लिए देश में यूजर टर्मिनल और सेवाओं को लेकर नियम बनाने की बात थी।

यानी सवाल वही था कि क्या तकनीक इतनी तेज है कि वह किसी देश के कानून से आगे निकल जाए?

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यूक्रेन: जब इंटरनेट युद्ध के मैदान का हथियार बन गया

Starlink का सबसे बड़ा और गंभीर विवाद यूक्रेन में सामने आया। रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद Starlink यूक्रेनी सेना के लिए संचार का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया। हजारों टर्मिनलों के जरिए सैनिकों को इंटरनेट कनेक्टिविटी मिली और ड्रोन तथा दूसरे सैन्य अभियानों में इसका इस्तेमाल हुआ। लेकिन 2025 में Reuters की एक जांच ने Starlink की ताकत का दूसरा पहलू सामने रखा। Reuters के मुताबिक, 2022 में यूक्रेन के खेरसॉन क्षेत्र में रूसी सेना के खिलाफ अभियान के दौरान Elon Musk के आदेश पर कुछ इलाकों में Starlink सेवा बंद की गई। इससे यूक्रेनी सैनिकों का संचार प्रभावित हुआ और ड्रोन तथा आर्टिलरी ऑपरेशन में भी परेशानी आई। SpaceX ने Reuters की रिपोर्ट को गलत बताया और कहा कि वह यूक्रेन को सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्राजील: Musk का X विवाद, Starlink तक पहुंचा

ब्राजील में मामला इंटरनेट सेवा से ज्यादा एलन मस्क की कंपनियों के आपसी संबंधों से जुड़ा था। 2024 में ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट और मस्क की सोशल मीडिया कंपनी X के बीच टकराव हुआ। अदालत ने X पर लगाए गए जुर्माने की वसूली के लिए स्टारलिंक के बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया, क्योंकि अदालत ने स्टारलिंक और X के बीच मस्क के कारोबारी संबंधों को ध्यान में रखा था।

बाद में स्टारलिंक और X के खातों से करीब 18.35 करोड़ ब्राजीलियन रियाल यानी लगभग 3.3 करोड़ डॉलर की रकम ट्रांसफर होने के बाद फ्रीज हटाया गया। यह मामला एक अलग तरह का सवाल उठाता है कि क्या किसी कारोबारी की एक कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का असर उसकी दूसरी कंपनी पर भी पड़ सकता है?

इटली: सरकार को स्टारलिंक चाहिए, लेकिन सुरक्षा की चिंता भी

इटली में विवाद अभी अलग मोर्चे पर है। सरकार सुरक्षित सरकारी और राजनयिक संचार के लिए सैटेलाइट सेवाओं पर विचार कर रही थी और स्टारलिंक प्रमुख दावेदारों में था। लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाया कि किसी संवेदनशील सरकारी नेटवर्क के लिए यूरोप के बाहर की एक निजी कंपनी पर इतनी निर्भरता कितनी सुरक्षित होगी। विपक्ष ने ऐसे प्रस्ताव भी रखे जिनमें गैर-EU कंपनियों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त पाबंदियां और एन्क्रिप्शन तथा सॉफ्टवेयर पर इटली का कंट्रोल सुनिश्चित करने की मांग थी। Reuters के मुताबिक Starlink के प्रतिनिधि ने इसे 'anti-Musk' अभियान बताया। यानी यूरोप में सवाल यह बन गया है कि सुविधा बड़ी है या रणनीतिक आत्मनिर्भरता?

कनाडा: अमेरिकी टैरिफ विवाद का असर स्टारलिंक पर

स्टारलिंक का असर भू-राजनीतिक टकराव से भी बच नहीं पाया। 2025 में अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ विवाद बढ़ा तो कनाडा में मस्क की कंपनियों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई। Ontario के Premier Doug Ford ने स्टारलिंक के साथ करीब 6.8 करोड़ डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने की बात कही। यहां विवाद इंटरनेट का नहीं था। यह सवाल था कि क्या किसी अमेरिकी कंपनी की कारोबारी मौजूदगी उसके देश की विदेश और व्यापार नीति से अलग रह सकती है?

स्टारलिंक और विवादों का पुराना नाता

स्टारलिंक सिर्फ इंटरनेट नहीं दे रहा। हजारों सैटेलाइट के जरिए एक अमेरिकी कंपनी दूसरे देशों की डिजिटल सीमाओं के भीतर पहुंच बना रही है। जहां सरकारें अपने इंटरनेट नेटवर्क को नियंत्रित करती हैं, वहां स्टारलिंक का सिग्नल आसमान के रास्ते सीधे यूजर तक पहुंच सकता है। ईरान में बिना अनुमति टर्मिनलों का आरोप हो, बांग्लादेश में विदेशी प्रभाव का सवाल, दक्षिण अफ्रीका में लाइसेंस विवाद या यूक्रेन में सैन्य इस्तेमाल... स्टारलिंक का नाम बार-बार ऐसे विवादों में सामने आया है, जहां इंटरनेट और राष्ट्रीय संप्रभुता आमने-सामने हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि स्टारलिंक इंटरनेट किसे दे रहा है। सवाल यह है कि अमेरिका की एक निजी कंपनी दूसरे देशों में सूचना के प्रवाह पर कितनी पकड़ बना सकती है?

इंटरनेट आसमान से आ रहा है, लेकिन उसका नियंत्रण किसके हाथ में है। देश की सरकार के या अमेरिकी कंपनी के? यही स्टारलिंक के साथ जुड़ा सबसे बड़ा विवाद है।