पोल वॉल्ट से MMA तक... एशियन गेम्स में भारत के इन ‘First Medalists’ से मिलिए

एशियन गेम्स में कुछ मेडल सिर्फ जीत का प्रतीक नहीं होते, बल्कि एक नया अध्याय लिख जाते हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने 2026 के एशियन गेम्स में अब तक पोल वोल्ट, MMA और सॉफ्ट टेनिस में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। कौन हैं ये खिलाड़ी और इन ऐतिहासिक मेडल्स के पीछे की कहानी क्या है... जानिए।

एशियन गेम्स (Asian Games) में मेडल जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन कुछ मेडल सिर्फ पदक तालिका (Medal Tally) में एक नंबर नहीं जोड़ते। वे किसी खेल में भारत के लिए एक नया दरवाजा खोलते हैं और रिकॉर्ड बुक में पहली बार तिरंगे का नाम दर्ज कराते हैं।

2026 के एशियन गेम्स में भी भारत पहली बार कई खेलों में नया इतिहास लिख रहा है। कहीं पोल वॉल्ट (Pole Vault) में नया अध्याय जुड़ा, कहीं MMA में भारत ने पहली बार इतिहास बनाया, तो कहीं Soft Tennis में भारतीय खिलाड़ी ने पहली बार पोडियम पर जगह बनाई। ये मेडल सिर्फ जीत की कहानी नहीं, बल्कि उन खेलों में भारत की पहली दस्तक की कहानी हैं।

पोल वॉल्ट में पहली बार लहराया तिरंगा

भारत के लिए ऐसा ही एक ऐतिहासिक पल आया बारानिका इलांगोवन(Baranica Elangovan) के साथ। तमिलनाडु की इस 29 वर्षीय एथलीट ने महिला पोल वॉल्ट में 4.15 मीटर की ऊंचाई पार कर ब्रॉन्ज मेडल (Bronze Medal) जीता। इसके साथ ही वह एशियन गेम्स के इतिहास में पोल वॉल्ट में भारत को मेडल दिलाने वाली पहली एथलीट बन गईं।

दिलचस्प बात ये है कि पोल वॉल्ट बारानिका की पहली प्रायोरिटी भी नहीं थी। कॉलेज के दिनों में वह लॉन्ग जंप और ट्रिपल जंप से जुड़ी थीं। ट्रिपल जंप के लिए कोच की तलाश के दौरान उन्हें पोल वॉल्ट आजमाने का मौका मिला और यहीं से उनकी नई कहानी शुरू हुई।

नागोया में 4.15 मीटर की छलांग के बाद बारानिका का मुकाबला कजाकिस्तान की Polina Ivanova से बराबरी पर रहा। दोनों के समान प्रयास रहे, लेकिन 4.25 मीटर पार नहीं कर सकीं। आखिरकार काउंटबैक के जरिए ब्रॉन्ज बारानिका के नाम हुआ।

मेडल जीतने के बाद उन्होंने इसे अपने कोच Milber Bertrand Russell को समर्पित करते हुए कहा- “This is for you, Anna.” बारानिका ने यह भी बताया कि वह प्रतियोगिता में मेडल के बजाय अपने प्रदर्शन और प्रशनल बेस्ट पर ध्यान दे रही थीं। उनके मुताबिक, जब उन्होंने पोल वॉल्ट शुरू किया था, तब इस इवेंट में सिर्फ कुछ ही खिलाड़ी थे, लेकिन अब युवा एथलीटों की संख्या बढ़ रही है।

मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी पहली बार मेडल

एक और ऐसा ही इतिहास बनाया सुचिका तरियाल ने। महिलाओं के Traditional Mixed Martial Arts (MMA) 60kg वर्ग में ब्रॉन्ज जीतकर सुचिका ने एशियन गेम्स में MMA का भारत के लिए पहला मेडल अपने नाम किया।

सुचिका का सफर सिर्फ एक मुकाबले की कहानी नहीं था। 36 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने इस नए खेल में भारत की पहली पदक कहानी लिखी और यह दिखाया कि एशियन गेम्स में भारत की मेडल लिस्ट अब सिर्फ पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है।

उनका ब्रॉन्ज भले ही पदक तालिका में एक और नंबर हो, लेकिन MMA के लिहाज से यह भारत के लिए एक शुरुआत है।

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सॉफ्ट टेनिस में 24 साल के जय ने रचा इतिहास

तीसरी कहानी और भी खास है। मध्य प्रदेश के देवास के 24 साल के जय मीणा ने पुरुषों के सॉफ्ट टेनिस (Soft Tennis) Singles में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इस खेल में भारत का पहला एशियन गेम्स मेडल हासिल किया।

सेमीफाइनल में जापान के Takuya Kurosaka से हार के बाद जय को ब्रॉन्ज मिला। लेकिन उस हार से ज्यादा महत्वपूर्ण वह उपलब्धि थी, जो उनके नाम दर्ज हो चुकी थी- एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस के पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी का नाम अब जय मीणा है।

2026 के एशियन गेम्स में भारत के खाते में कई मेडल आए हैं, लेकिन इन तीन पदकों की कहानी थोड़ी अलग है। बारानिका ने पोल वॉल्ट में शुरुआत की, सुचिका ने MMA में पहला अध्याय लिखा और जय ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का नाम पहली बार पोडियम तक पहुंचाया।

जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चल रहे एशियन गेम्स में 26 सितंबर को खबर लिखे जाने तक भारत के खाते में 27 पदक आ चुके हैं- 3 Gold, 11 Silver और 13 Bronze। लेकिन इन ‘First Medals’ की अहमियत सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि इस बात में है कि इनके साथ भारतीय खेलों के रिकॉर्ड में कुछ नए पन्ने भी जुड़ गए हैं। एशियन गेम्स अभी 4 अक्टूबर तक चलना है, ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि कई अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी नई इबारत लिखेंगे।