भारत और रूस के नागरिकों को एकदूसरे के देश में रोजगार देने का समझौता अब कानून बन गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इससे संबंधित दस्तावेज पर दस्तखत कर दिए हैं।
इस समझौते का मकसद भारतीय नागरिकों को रूस में अस्थायी नौकरियों को व्यवस्थित करना है। इसका फायदा छात्रों को भी मिलेगा, जो भारत या रूस में रहकर पढ़ाई करते हुए पार्ट-टाइम नौकरी कर सकेंगे। पिछले साल दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति जब भारत आए थे, उस वक्त ये समझौता हुआ था।
कुछ दिन पहले भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया था कि रूस इस साल करीब 70,000 स्किल्ड भारतीयों को अपने यहां रोजगार देगा।
भारत-रूस संबंधों पर बैठक की अध्यक्षता करते हुए जयशंकर ने सदस्यों को बताया था कि भारतीय लोगों के लिए रूस में खासतौर से निर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रोजगार के रास्ते खुलेंगे।
इससे पहले, 1 अक्टूबर 2026 को रूस की State Duma ने भारत के साथ हुए टेंपरेरी लेबर एक्टिविटी एग्रीमेंट (Temporary Labour Activity Agreement) को औपचारिक मंजूरी दी थी। 2 अक्टूबर को फेडरेशन काउंसिल (Federation Council) यानी ऊपरी सदन से भी इसे मंजूरी मिल गई।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि अब कोई भी भारतीय सीधे रूस पहुंचकर नौकरी शुरू कर देगा। असली बदलाव कहीं ज्यादा व्यवस्थित है।
कौन रूस में काम कर सकेगा, भर्ती कैसे होगी, वर्क परमिट के क्या नियम होंगे और नौकरी जाने की स्थिति में वर्कर्स के अधिकार क्या होंगे? इन सबके लिए भारत और रूस के बीच एक औपचारिक ढांचा यानी फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है।
यह समझौता 4 दिसंबर 2025 को भारत और रूस के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के दौरान नई दिल्ली में हुआ था।
आखिर इस समझौते की जरूरत क्यों पड़ी?
रूस में पिछले कुछ समय से कई सेक्टर्स में वर्कर्स की कमी की बात सामने आती रही है। इसी दौरान भारतीय वर्कर्स की रूस में मौजूदगी भी बढ़ी है।
Reuters की फरवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नागरिकों के लिए रूसी वर्क परमिट की संख्या 2021 में करीब 5,000 से बढ़कर 2025 में लगभग 72,000 हो गई थी। यानी भारतीयों का रूस जाकर काम करना पहले ही बढ़ रहा था। नया एग्रीमेंट इसी बढ़ती लेबर मोबिलिटी को तय नियमों के तहत ज्यादा व्यवस्थित करने की कोशिश है।
पहले और अब में फर्क क्या होगा?
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए।
पहले: भारतीय नागरिक रूस के सामान्य इमीग्रेशन और वर्क-परमिट रूस के तहत नौकरी करते थे।
एग्रीमेंट लागू होने के बाद: भारत और रूस के बीच एक द्विपक्षीय ढांचा होगा, जिसमें रिक्रूटमेंट , वर्क परमिट, नौकरी की शर्तें और वर्कर्स के अधिकारों की सुरक्षा और कुछ मामलों में एम्प्लायर बदलने जैसी प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया गया है।
वर्क परमिट को लेकर क्या प्रावधान?
नहीं। आम भारतीय वर्कर के लिए वर्क परमिट जरूरी रहेगा।
एग्रीमेंट के तहत वर्कर उसी काम के लिए रोजगार कर सकेगा, जिसके लिए परमिट जारी किया गया है। नियमों के खिलाफ दूसरी पेड जॉब करने पर परमिट रद्द होने की स्थिति बन सकती है।लेकिन स्टूडेंट्स के लिए अलग प्रावधान है।
भारतीय स्टूडेंट्स के लिए क्या बदलेगा?
रूस में फुल टाइम पढ़ने वाले योग्य भारतीय स्टूडेंट्स भी इस एग्रीमेंट के दायरे में हैं। Secondary vocational education institutions यानी व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान, यूनिवर्सिटीज या वैज्ञानिक संस्थान में फुल टाइम पढ़ने वाले स्टूडेंट्स अपने खाली समय में अस्थायी नौकरी कर सकेंगे।
ऐसे पात्र स्टूडेंट्स को इस तरह के पार्ट टाइम वर्क के लिए अलग वर्क परमिट की जरूरत नहीं होगी।यानी पढ़ाई के साथ काम करने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए भी एग्रीमेंट एक स्पष्ट ढांचा देता है।
यह भी पढ़ें: पुतिन ने की पीएम मोदी की तारीफ, रूस के भरोसे का मतलब क्या?
भारतीय वर्कर को सैलरी कितनी मिलेगी?
एग्रीमेंट में वर्कर प्रोटेक्शन का भी महत्वपूर्ण प्रावधान है। भारतीय वर्कर्स को पेमेंट और दूसरी वर्किंग कंडीशंस उस काम पर लागू स्थानीय मानक के मुकाबले कमतर नहीं होनी चाहिए।
अगर नौकरी चली गई तो?
मान लीजिए कोई भारतीय रूस में नौकरी कर रहा है और कंपनी अचानक बंद हो जाती है या वर्कफोर्स में कटौती कर देती है।
ऐसे मामले में कर्मचारी को स्थानीय कानून और नौकरी के समझौते के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
एक और अहम प्रावधान है।
अगर वर्क परमिट खत्म होने में अभी कम से कम तीन महीने बाकी हैं, तो कर्मचारी कुछ शर्तें पूरी करके दूसरी कंपनी में नौकरी कर सकता है। यानी नौकरी खत्म होने के बाद हर स्थिति में तुरंत रूस छोड़ना जरूरी नहीं होगा।
पेंशन और मेडिकल इंश्योरेंस का क्या?
एग्रीमेंट सिर्फ रिक्रूटमेंट तक सीमित नहीं है। समझौते में पेंशन, सामाजिक बीमा और मेडिकल इंश्योरेंस जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत और रूस के बीच पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर कोई अलग समझौता हो गया है। इन मामलों में रूस के स्थानीय कानून और दोनों देशों के बीच पहले से लागू समझौतों के नियम लागू होंगे।
भारतीयों की डिमांड किस-किस सेक्टर में बढ़ी?
रूस में लेबर की कमी के बीच भारतीय वर्कर्स की मांग कई सेक्टर्स में बढ़ी है।
ऐसे में नया एग्रीमेंट अचानक शुरू हुई कोई अलग प्रक्रिया नहीं है। यह पहले से बढ़ रहे I यह भारत से रूस जाने वाले कामगारों की बढ़ती संख्या को एक तय और व्यवस्थित व्यवस्था के तहत लाने की कोशिश है।
तो भारतीयों के लिए सबसे बड़े क्या-क्या बदलाव?
इसे पांच बातों में समझिए-
1. आम वर्कर्स के लिए वर्क परमिट की जरूरत बनी रहेगी।
2. पात्र भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ अस्थायी नौकरी कर सकेंगे।
3. सैलरी और वर्किंग कंडीशंस को लेकर वर्कर प्रोटेक्शन का ढांचा होगा।
4. नौकरी जाने पर, कुछ शर्तों के तहत परमिट की अवधि में दूसरी कंपनी में काम किया जा सकेगा।
5. रूस अपनी जरूरत के हिसाब से विदेशी कामगारों की संख्या और काम के क्षेत्र तय कर सकेगा।
लेकिन फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है- संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन एग्रीमेंट अभी लागू नहीं हुआ है। दोनों देशों की घरेलू प्रक्रियाएं पूरी होने और फाइनल लिखित नोटिफिकेशन्स एक्सचेंज होने के बाद ही यह प्रभावी होगा।
यानी रूस जाने वाले भारतीयों के लिए कहानी सिर्फ नौकरी के नए मौके की नहीं है। असली बदलाव यह है कि भारत से रूस जाने वाले अस्थायी वर्कर्स की भर्ती, रोजगार और अधिकारों को एक औपचारिक भारत-रूस ढांचा के भीतर लाने की कोशिश की जा रही है।
यह भी पढ़ें: पुतिन बोले, यूक्रेन संघर्ष खत्म करने के लिए PM मोदी के पास है आइडिया