भारत में अब एक ऐसा स्वदेशी ड्रोन तैयार किया जा रहा है, जो भारी सामान लेकर लंबी दूरी तक उड़ सकेगा। इसका नाम 'YETI' है। यह एक हैवी-लिफ्ट ऑटोनॉमस एरियल लॉजिस्टिक्स व्हीकल है। यानी ऐसा ड्रोन जो बिना पायलट के खुद उड़ान भरकर दुर्गम इलाकों में सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाएगा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने इसके लिए मुंबई की आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ करार किया है। इसके तहत कंपनी को रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन (RDI) फंड से ₹151 करोड़ की मदद लोन के रूप में दी जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत ₹302 करोड़ है। इसका मकसद इस तकनीक को शुरुआती स्तर TRL-4 से पूरी तरह तैयार यानी TRL-9 लेवल तक पहुंचाना है।
नई पीढ़ी की लॉजिस्टिक्स क्षमता को मिलेगी मजबूती
इस ड्रोन का मुख्य उद्देश्य भारत के ऑटोनॉमस फ्लाइंग सिस्टम और आधुनिक लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करना है। इसे खासतौर पर ऐसे इलाकों में जरूरी सामान और रसद पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है, जहां रोड से पहुंचना मुश्किल, जोखिम भरा या बहुत ज्यादा समय लेने वाला होता है।
यह हाइब्रिड तकनीक पर काम करेगा। इसमें वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) के साथ फिक्स्ड-विंग की खूबी जोड़ी गई है। यानी यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठने और नीचे उतरने में सक्षम होगा, जबकि आगे का सफर यह हवाई जहाज की तरह लंबी दूरी तक तय करेगा।
यह 200 किलोग्राम तक का वजन (पेलोड) उठाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी रेंज 200 किलोमीटर तक और समुद्र तल से उड़ान भरने की ऊंचाई 6,500 मीटर तक होगी। इसका वेदर-रेसिस्टेंट डिजाइन बर्फीले ऊंचे पहाड़ों, तपते रेगिस्तान और समुद्री इलाकों जैसे बेहद कठिन माहौल में भी काम करने में पूरी तरह सक्षम होगा।
बिना रनवे छोटी सी जगह से उड़ान भरने की खूबी
YETI को उड़ान भरने या लैंड करने के लिए किसी लंबे रनवे या एयरपोर्ट की जरूरत नहीं होगी। इसे लगभग 15×15 मीटर की कच्ची या छोटी सी जगह से भी ऑपरेट किया जा सकेगा। इससे उन इलाकों में इसकी तैनाती आसान हो जाएगी जहां बुनियादी ढांचे की कमी है।
इंजन या पावर में तकनीकी खराबी आने पर भी इसका संतुलन न बिगड़े, इसके लिए इसमें डिस्ट्रीब्यूटेड और रिडंडेंट पावर सिस्टम होगा। इसके अलावा, जीपीएस सिग्नल जाम या बंद होने की स्थिति में भी यह रास्ता नहीं भटकेगा (GNSS-डिनाइड नेविगेशन)। इसमें 200 किलोमीटर तक का कम्युनिकेशन लिंक, कई ड्रोनों का झुंड बनाकर मिशन पूरा करने (स्वार्म ऑपरेशंस) की क्षमता होगी। इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और जरूरत पड़ने पर जल्दी तैनात करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
इन कामों में हो सकता है इस्तेमाल:
घायलों की मदद: दूरदराज इलाकों से घायलों को तुरंत निकालना और दवाएं पहुंचाना।
सेना को सप्लाई: फॉरवर्ड पोस्ट पर जवानों तक गोला-बारूद, हथियार और खाना पहुंचाना।
इंसानों को लाना-ले जाना: दुर्गम इलाकों में 2 जवानों को सुरक्षित उतारना या निकालना।
आग बुझाना: जंगलों या पहाड़ों की आग बुझाने के लिए जरूरी केमिकल और उपकरण पहुंचाना।
समंदर में डिलीवरी: बीच समंदर जहाजों और ऑयल प्लेटफॉर्म्स तक तेजी से पार्ट्स पहुंचाना।
पहाड़ों में कंस्ट्रक्शन: बिना सड़क वाले ऊंचे इलाकों में भारी मशीनरी और औजार पहुंचाना।
सरकार ने क्या कहा?
टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि एडवांस्ड ऑटोनॉमस सिस्टम मुश्किल ऑपरेशनल और लॉजिस्टिक्स चुनौतियों से निपटने के नए रास्ते खोल रहे हैं।
उन्होंने कहा, “देश में बने हैवी-लिफ्ट एरियल प्लेटफॉर्म दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक पहुंच बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आइडियाफोर्ज के साथ यह समझौता ऑटोनॉमस सिस्टम, रोबोटिक्स और अगली पीढ़ी की एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में भारत की क्षमता को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।”
आइडियाफोर्ज ने क्या कहा?
आइडियाफोर्ज के सीईओ और को-फाउंडर ने YETI को भारत की ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। उनके मुताबिक, यह ड्रोन उन परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है, जहां सड़कें खत्म हो जाती हैं या मौसम साथ नहीं देता।
उन्होंने कहा, “YETI इस बात का बड़ा उदाहरण है कि भारत अपने दम पर क्या डिजाइन कर सकता है, क्या बना सकता है और कैसे चला सकता है। YETI हमारी उन जमीनी चुनौतियों का जवाब है। इसे सिर्फ उड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि सबसे कठिन ऑपरेशनल परिस्थितियों में भी भरोसेमंद तरीके से सामान डिलीवर करने के लिए तैयार किया जा रहा है।”
कंपनी के मुताबिक, सरकार से मिला यह समर्थन साफ दिखाता है कि भारतीय डीप-टेक कंपनियां अब देश की क्षमता निर्माण का बड़ा भार उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।