ऊपर का वीडियो देखिए... आपको पहली नजर में क्या दिखाई दे रहा है? दूर फैला मैदान और उसे चीरती हुई कुछ बहुत लंबी सी चीज चली जा रही है। देखते-देखते आंखें थक जाएंगी पर यह रुक नहीं रही। आप इससे पहले अनुमान के घोड़े दौड़ाएं, हम आपको बता दें कि यह लाल रंग में न खत्म होने वाली दिख रही चीज असल में एक ट्रेन है।
सवाल उठेगा कि क्या यह भारत की कोई नई ट्रेन है तो जवाब है नहीं। दक्षिण अफ्रीका का दावा है कि उसने दुनिया की सबसे लंबी मालगाड़ी का सफल ट्रायल किया है।
इतनी लंबी ट्रेन, तो पावर कहां से आई?
दक्षिण अफ्रीका में जिस ट्रेन का ट्रायल हुआ है, वो कोई यात्री ट्रेन नहीं बल्कि मालगाड़ी है। इसकी लंबाई 7.6 किलोमीटर है। इसे चलाने वाली सरकारी ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनी 'ट्रांसनेट' (Transnet) ने इसका वीडियो भी जारी किया है। ऊपर दिया वीडियो उसी की झलक है। ट्रेन को खींचने और पावर देने के लिए पूरी ट्रेन में जगह-जगह इलेक्ट्रिक और डीजल इंजन लगाए गए थे।
कितने डिब्बों की ट्रेन?
इसमें 696 डिब्बे (वैगन) जुड़े हुए हैं। इससे पहले सबसे लंबी मालगाड़ी का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पास था। उसकी लंबाई 7.24 किलोमीटर थी। 'ट्रांसनेट' का कहना है कि उसने यह रिकॉर्ड 2001 में ऑस्ट्रेलिया में चली उसकी लंबी मालगाड़ी का रिकॉर्ड तोड़ा है।
AP न्यूज से बातचीत के दौरान 'ट्रांसनेट फ्रेट रेल' के मुख्य कार्यकारी (CEO) रसेल बातजीज ने कहा कि यह ऑपरेशन सीखने का एक बेहतरीन अनुभव था, जो दक्षिण अफ्रीका की लंबी दूरी तक खनिजों और अन्य सामानों के परिवहन की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करेगा। आमतौर पर अलग-अलग देशों के हिसाब से मालगाड़ियां आधे मील से लेकर 1.5 मील तक लंबी होती हैं, लेकिन दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया लंबी दूरियों के लिए दुनिया की कुछ सबसे लंबी ट्रेनों का संचालन करते हैं।
कहां से कहां तक हुआ ट्रायल?
इसने एक बंदरगाह से देश के भीतरी इलाके में मौजूद लोहे की खदान तक की दो दिन की यात्रा की और इस दौरान ट्रेन के सभी डिब्बे खाली थे। ट्रांसनेट ने एक बयान में बताया कि इस ट्रेन ने 18 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका के पश्चिमी तट पर स्थित सल्दान्हा खाड़ी (Saldanha Bay) से देश के भीतरी इलाके में मौजूद लोहे की खदान तक 860 किलोमीटर (534 मील) की यात्रा पूरी की। दो दिन के इस सफर के दौरान ट्रेन के सभी डिब्बे खाली थे।