कोई जनरल, कोई पूर्व PM… इजरायल चुनाव में 5 बड़े चेहरे, नेतन्याहू की चुनौती भी समझिए

नेतन्याहू के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। हारने पर भ्रष्टाचार के मुकदमों में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं और नई सरकार 7 अक्टूबर 2023 के हमले की जांच करा सकती है।

इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाला चुनाव कई मायनों में अहम है। इसे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए जनता के बीच उनकी नीतियों और नेतृत्व की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के बड़े हमले के बाद के हालात के बीच हो रहा है। यह चुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है, जब इजरायल और ईरान में गत 2 वर्षों में भयानक जंग हो चुकी है। यह चुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है जब गाजा और लेबनान में इजरायल अपनी नई नीतियों को लागू करने के लिए आगे बढ़ रहा है और यह चुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू की एक ही जिद है कि वह ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं रखने देंगे।

दूसरी खास बात यह है कि 1988 के बाद यह पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें किसी सरकार ने अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा किया है। आइए जानते हैं कि प्रमुख उम्मीदवार और फैक्टर क्या हैं और नेतन्याहू के लिए क्या-क्या दांव पर है?

किनके बीच है मुख्य मुकाबला?

यह चुनाव मुख्य रूप से मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और गादी ईसेनकोट के बीच है, जो इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख रह चुके हैं। इजरायल के प्रमुख ओपिनियन पोल भी नेतन्याहू की दक्षिणपंथी 'लिकुड' (Likud) पार्टी ईसेनकोट की मध्यमार्गी 'याशार!' (Yashar!) पार्टी के बीच कड़े मुकाबले का संकेत दे रहे हैं।

ये हैं इजरायल चुनाव के टॉप-5 उम्मीदवार

1. बेंजामिन नेतन्याहू (मौजूदा प्रधानमंत्री)

बेंजामिन नेतन्याहू 77 साल के हो चुके हैं, जो इजरायल में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले नेता बन चुके हैं। उन्होंने युद्धों, संकटों, घोटालों और 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले में चूक के आरोपों के बावजूद अपनी सत्ता बचाए रखी है। वह लंबे समय से 'लिकुड' पार्टी को लीड कर रहे हैं। उनके समर्थक सुरक्षा व अर्थव्यवस्था पर उनके ट्रैक रिकॉर्ड और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके मजबूत संबंधों का हवाला देकर वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

2. गादी ईसेनकोट

गादी ईसेनकोट इजरायल के दूसरे प्रमुख उम्मीदवार हैं, जो ओपिनियन पोल के अनुसार प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं। 66 वर्षीय ईसेनकोट मोरक्कन यहूदी प्रवासियों के एक कामकाजी परिवार से आते हैं। उन्होंने इजरायली सेना में चार दशक तक सेवा दी है और सेनाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मौजूदा वक्त में पूर्व जनरल ईसेनकोट 2022 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी 'याशार! को लीड कर रहे हैं। बता दें कि 7 अक्टूबर के हमले के बाद गाजा में हुई जंग में उनके बेटे और दो भतीजों की मौत हो गई थी। ईसेनकोट इससे पहले नेतन्याहू की 'वॉर कैबिनेट' में एक पर्यवेक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं। मगर 8 महीने बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू की रणनीति गाजा पर स्पष्ट नहीं होने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था।

3. नफ्ताली बेनेट

54 साल के नफ्ताली बेनेट एक दक्षिणपंथी और धार्मिक नेता हैं, जो इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वह मध्यमार्गी राजनीतिज्ञ याइर लापिड के साथ बने गठबंधन 'बेयाचाड' (Beyachad) के नेता हैं। वे स्वतंत्र फिलिस्तीनी के विरोधी और वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के निर्माण के समर्थक हैं। साल 2013 में संसद (नेसेट) में प्रवेश करने से पहले, बेनेट ने नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम किया था और वे 'येशा काउंसिल' यानी इजरायली बस्तियों के भीतर स्थानीय प्राधिकरणों के संगठन प्रमुख भी रहे थे।

2021 में उनकी दक्षिणपंथी 'यामिना' पार्टी को सात सीटें मिली थीं, जिसकी मदद से उन्होंने वामपंथी और अरब पार्टियों के साथ एक गठबंधन बनाया और पावर-शेयरिंग समझौते के तहत कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री के रूप में काम किया। नेतन्याहू की तरह फिलिस्तीनियों के प्रति बेनेट भी कड़ा रुख अपनाते हैं, लेकिन सुरक्षा मुद्दों से निपटने और इजरायल के कानूनी सिस्टम के खिलाफ नेतन्याहू की लड़ाई को लेकर दोनों के बीच गहरे मतभेद हैं।

इतमार बेन-ग्विर

50 वर्षीय बेन-ग्विर इजरायल के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री हैं और कट्टर-दक्षिणपंथी नेता हैं। वह एक आतंकवादी संगठन का समर्थन करने सहित कई मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं। वे अत्यधिक उग्र-राष्ट्रवादी पार्टी मानी जाने वाली 'ओत्ज्मा येहुदित' का नेतृत्व करते हैं, जिसने पिछले चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया था। इसकी बदौलत वह कैबिनेट मंत्री बन गए। वह पेशे से वकील भी हैं, जिन्होंने फिलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा के आरोपी दक्षिणपंथी यहूदी चरमपंथियों का सफलतापूर्वक बचाव करके पहचान बनाई।

जब बेन-ग्विर किशोरावस्था में थे, तब सेना ने उनके चरमपंथी विचारों के कारण उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया था। बेन-ग्विर ने गाजा पट्टी से लगभग 20 लाखफिलिस्तीनियों के “स्वैच्छिक” पलायन की योजना भी पेश कर चुके हैं। वह गाजा में यहूदी बस्तियों के पुननिर्माण की वकालत करते रहे हैं।

5. मंसूर अब्बास

इजरायल के चुनाव में 5वें प्रमुख उम्मीदवार 52 वर्षीय मंलू अब्बास हैं, जो उत्तरी इजरायल के एक फिलिस्तीनी-अरब राजनीतिज्ञ और डेंटिस्ट हैं। वे 'राम' (Ra'am) नाम की इस्लामिक पार्टी के लीडर हैं। यह पार्टी 2021 की सरकार में पहली बार हिस्सा लेने वाली अरब-नेतृत्व वाली पार्टी बनी थी। वह बड़े फिलिस्तीनी संघर्षों के बजाय स्थानीय मुद्दों, अरब समुदायों में होने वाले अपराधों पर ज्यादा फोकस करते हैं। ताकि 'राम' पार्टी को संसद में अधिक सीटें मिल सकें और संभावित गठबंधन सहयोगियों को आकर्षित किया जा सके। अब्बास 2019 से संसद (नेसेट) के सदस्य हैं।

2026 चुनाव के प्रमुख फैक्टर क्या हैं?

नेतन्याहू के लिए क्या चुनौती?

यह चुनाव नेतन्याहू के लिए रेफरेंडम माना जा रहा है।
हार-जीत तय करेगी कि नेतन्याहू की युद्ध नीतियों और राष्ट्रवाद का जनता में क्या संदेश गया
चुनाव हारने पर भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाने का खतरा बढ़ सकता है।
नेतन्याहू की हार गाजा, लेबनान और ईरान पर इजरायल की युद्ध नीति को कमजोर कर सकती है।
हारे तो ट्रंप का अन्य इजरायली नेता के लिए समर्थन कम हो सकता है।

मुख्य मुद्दे क्या हैं?

इजरायली मतदाताओं के लिए 7 अक्टूबर के हमलों से पहले सुरक्षा में हुई गंभीर चूक के लिए जवाबदेही की मांग प्रमुख मुद्दा है। इसके अलावा कट्टरपंथी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) समुदाय को अनिवार्य सैन्य सेवा से दी गई छूट से धर्मनिर्पेक्ष नागरिकों में भारी गुस्सा है। इसके अलावा नेतन्याहू द्वारा न्यायपालिका में बदलाव के प्रयास को कुछ आलोचक लोकतंत्र के लिए खतरा मानते हैं। वहीं गाजा, वेस्ट बैंक, ईरान और लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष भी अहम मुद्दा है। अधिकांश नागरिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता चाहते हैं। इसलिए नेतन्याहू के लिए काफी चुनौतियां हैं। अब जनता को यह तय करना है कि वह नेतन्याहू की राष्ट्रवाद और युद्ध नीतियों के साथ है या फिर वह स्थानीय मुद्दों को ज्यादा तवज्जो देती है।