ऊपर के इस वीडियो को देखिए। एक लाइन से 5, 6 मोबाइल रखे हुए हैं, पास खड़े लोग लगातार कुछ खोजते दिख रहे हैं। आप सोच रहे होंगे पूरा वीडियो देख डाला, एक बार को तो कैमरा भी जूम हुआ पर कुछ समझ नहीं आया।
15 सेकेंड के इस वीडियो को कई दफा देखने के बाद भी शायद आप कुछ समझ पाएं, पर जो खेल आपकी आंखें नहीं देख पा रहीं, असल में वही इसके पीछे चल रहा है। वीडियो फ्रांस की किसी सड़क किनारे का है। एक लाइन से रखे मोबाइल उबर ईट्स के ड्राइवरों के हैं और ये लोग ऐप के एल्गोरिदम में ही सेंध लगा रहे हैं।
फ्रांस में मौजूदा हालात क्या हैं, किसी से छिपे नहीं हैं और ऐसे में विदेशी उबर ईट्स ड्राइवरों ने इस आपदा में अवसर खोज लिया है। ये ड्राइवर इकट्ठे होते हैं, पास में कई फोन रखते हैं, कम पेमेंट वाले ऑर्डर ठुकराते हैं और डिलिवरी का किराया ₹15 यूरो या उससे अधिक तक बढ़ा देते हैं। इस वायरल वीडियो की खूब चर्चा है। आइए आपको इसके पीछे की पूरी कहानी समझाते हैं।
फूड डिलिवरी वाले क्यों ऐसा कर रहे?
हाल में सामने आए एक वीडियो में, फ्रांस में प्रवासी उबर ईट्स (Uber Eats) डिलिवरी कर्मचारी कम कमाई वाले ऑर्डरों से निपटने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाते दिख रहे हैं। वे एक साथ कई फोन का इस्तेमाल करते हैं और योजनाबद्ध तरीके से उन ऑर्डरों को ठुकरा देते हैं जिनसे उन्हें सही कमाई नहीं होती।
वायरल वीडियो की मानें तो फ्रांस में उबर ईट्स के कुछ ड्राइवर कम किराए वाले डिलिवरी ऑर्डरों को मिलकर रिजेक्ट करने की रणनीति अपना रहे हैं। वे डिलिवरी स्वीकार करने से पहले तब तक इंतजार करते हैं जब तक कि सिस्टम बेहतर और आकर्षक दरें ऑफर न करने लगे। बता दें कि उबर ईट्स, उबर (Uber) का फूड डिलिवरी ऐप है, जो अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों में काम करता है।
जब कई ड्राइवर किसी ऑर्डर को ठुकरा देते हैं, तो प्लेटफॉर्म की सुझाई गई डिलिवरी फीस बढ़कर 15 यूरो (लगभग 1600 रुपये ) या उससे ज्यादा हो सकती है। कथित तौर पर कई फोन का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है ताकि वे डिलिवरी ऑफर्स पर नजर रख सकें और आपस में तालमेल बनाकर ऑर्डरों का चुनाव कर सकें।
वायरल तरीका एल्गोरिदम को कैसे प्रभावित करता है?
▶ मान लीजिए एक एरिया में €3 (यूरो) का order आता है
▶ एल्गो उसे पास में मौजूद राइडर्स को भेजता है।
▶ कई राइडर्स उसे रिजेक्ट कर देते हैं।
▶ इसके चलते ऑर्डर पेंडिंग रहता है और सिस्टम में राइडर्स की कमी दिखती है।
▶ इसके बाद एल्गोरिदम सर्ज या बूस्ट जोड़ सकता है।
▶ अगले राइडर को वही ऑर्डर अब €10, €12 या €15+ में दिख सकता है।
▶ डिलिवरी बॉय की रणनीति है-कम पेमेंट वाले ऑर्डर्स को रिजेक्ट करके सिस्टम को मजबूर करना कि वह बेहतर पेआउट दिखाए। यह तभी काम कर सकता है जब काफी राइडर्स एक ही एरिया और एक ही समय पर मिलकर ऐसा करें।
सवाल यह कि ऐसा करने के पीछे कोई मजबूरी है या कोई चाल?
फ्रांस में डिलिवरी वालों को ईंधन,बाइक या स्कूटर, फोन, इंश्योरेंस जैसों के लिए खर्चे खुद उठाने पड़ते हैं। फ्रांस में स्कूलों से बदहाली को लेकर शुरू हुआ विरोध कम आय, सैलरी में कमी और महंगाई तक आ गया है। प्रदर्शनकारियों ने इस वक्त पूरे फ्रांस में उत्पात मचा रखा है। ऐसे में खाना पहुंचाने वाले डिलिवरी बॉय भी मांग कर रहे हैं कि उनकी कमाई कम है।
राइडर्स का कहना है कि Uber Eats का एल्गोरिदम तय करता है कि उन्हें कौन-सा ऑर्डर मिलेगा, कितना पैसा मिलेगा, कौन ज्यादा दिखेगा और किसका अकाउंट सस्पेंड होगा, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया उनके लिए पारदर्शी नहीं है। फ्रांस के यूनिन्स ने इसी साल आरोप लगाया था कि Algorithmic Pricing से राइडर्स की घंटे भर की कमाई गिरी है। ARPE के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि Uber Eats पर 2021 से 2025 के बीच Real Hourly Revenue लगभग 31.7% गिरा है। मांग ऐसे समय में की गई है जब हाल ही में फ्रांस ने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 19 यूरो प्रति घंटा कर दिया है।
पहले भी ऐसे मामले आ चुके हैं?
फ्रांस में उबर ईट्स (Uber Eats) के ड्राइवरों के मेहनताने को लेकर बहस कोई नई बात नहीं है। दिसंबर 2023 में, यूनियनों ने 2 और 3 दिसंबर को फूड डिलिवरी ड्राइवरों से दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया था। यह विरोध प्रदर्शन एक नई प्राइसिंग सिस्टम के खिलाफ था, जिसे लेकर यूनियनों का तर्क था कि इससे ड्राइवरों की कमाई कम हो गई है। हालांकि, उबर ईट्स का रुख इससे अलग था और उसका मानना था कि इस प्रणाली से प्रति ट्रिप औसत कमाई पर सकारात्मक असर पड़ा है।
▶ अगस्त 2024 में फ्रांसीसी अखबार 'ले प्रोग्रेस' (Le Progrès) ने ऐन (Ain) प्रांत के अंबेरिएउ-एन-बुगे में स्थित एक मैकडॉनल्ड्स रेस्टोरेंट के पास पार्किंग में एकत्र हुए चार उबर ईट्स ड्राइवरों की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उन्होंने ऑर्डर के नोटिफिकेशन की तुलना करने के लिए अपने फोन एक साथ अगल-बगल रखे और पाया कि एक ही डिलीवरी के लिए अलग-अलग दरों पर भुगतान की पेशकश की जा रही थी।
▶ 11 किलोमीटर की डिलीवरी के लिए 10 यूरो का भुगतान किया गया, जबकि 2 किलोमीटर की यात्रा के लिए 9 यूरो की पेशकश की गई। वहीं 18 किलोमीटर की दूरी और चार अलग-अलग डिलीवरी पॉइंट्स वाले एक अन्य ऑर्डर के लिए केवल 13 यूरो की पेशकश की गई थी।
▶ इस तरह के बड़े अंतर के कारण ड्राइवरों ने ऐप की प्राइसिंग पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। वे यह समझ नहीं पा रहे थे कि प्लेटफॉर्म दूरी (माइलेज) के हिसाब से कोई तय दर क्यों लागू नहीं करता या कम से कम यह स्पष्ट क्यों नहीं करता कि उनके मेहनताने की गणना किस आधार पर की जाती है।
▶ 18 मई 2026 तक, एल्गोरिदम में पारदर्शिता की यह मांग एक नए स्तर पर पहुंच गई। 'ले मोंड' (Le Monde) के अनुसार, सीएफडीटी (CFDT) और 'यूनियन-इंडेपेंडेंट्स' ट्रेड यूनियन ने उबर ईट्स और डिलीवरू (Deliveroo) को कानूनी नोटिस भेजकर मांग की कि दोनों प्लेटफॉर्म यह बताएं कि वे डिलीवरी किराए की गणना कैसे करते हैं और ड्राइवरों के खातों (अकाउंट्स) को निलंबित करने के अपने फैसलों की वजह स्पष्ट करें।
इन संगठनों का तर्क है कि ड्राइवरों के पास इतनी पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए जिससे वे समझ सकें कि एक ही जैसी डिलीवरी के लिए अलग-अलग दर पर भुगतान क्यों किया जा रहा है। साथ ही, अगर उनका अकाउंट बंद (डिसएबल) कर दिया जाता है, तो उनके पास शिकायत दर्ज कराने का ठोस आधार होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि छह महीने के भीतर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वे सामूहिक कानूनी कार्रवाई करेंगे।