इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले तीन घटनाओं ने सियासी माहौल गरमा दिया है। एक तरफ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी तरफ, वेस्ट बैंक में करीब 2,200 फिलिस्तीनियों को बेदखल किए जाने और बुलडोजर चलाए जाने के दावे सामने आए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा नेतन्याहू की उस पोस्ट की हो रही है, जिसमें उन्होंने AI से बनाई गई एक तस्वीर साझा की है। इसमें तेल अवीव पर परमाणु हमला होता दिखाया गया है और आसमान में उठता विशाल मशरूम जैसा गुबार तबाही का खौफनाक दृश्य पेश करता है।
चुनाव से ठीक पहले विरोध प्रदर्शन, फिलिस्तीनियों की बेदखली के दावे और परमाणु हमले की यह काल्पनिक तस्वीर, क्या इन तीनों घटनाओं के बीच कोई राजनीतिक कड़ी है? इनके क्या मायने हैं और इजरायल की राजनीति पर इनका क्या असर पड़ सकता है? आइए, समझते हैं। लेकिन सबसे पहले जानते हैं कि नेतन्याहू ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा।
बेंजामिन नेतन्याहू की इस पोस्ट में लिखा गया है, “इजरायल का अस्तित्व एक वास्तविक खतरे में है। अगर ईरानियों ने परमाणु हथियार हासिल कर लिए, तो उसके बाद कुछ भी पहले जैसा नहीं रहेगा। ईरान और शिया धड़े के इस खतरे के सामने बाकी सब कुछ बेहद मामूली है। समय-समय पर उठने वाले मनगढ़ंत और प्रायोजित विवाद सिर्फ इसलिए खड़े किए जाते हैं, ताकि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके: “ईरान में काम को पूरा करना।”
नेतन्याहू आगे लिखते हैं कि यह मुद्दा यहां मौजूद हर एक व्यक्ति के भौतिक अस्तित्व से जुड़ा है। हमारे पास ईरान में काम पूरा करने के लिए ट्रंप के राष्ट्रपति रहते “अगले दो साल का समय” है, और कोई नहीं जानता कि उसके बाद क्या होगा। चाहे कमला हैरिस आएं या कोई अन्य औसत दर्जे का व्यक्ति। हमारे पास आने वाले वर्षों के लिए अपने अस्तित्व को सुरक्षित करने और जरूरी कार्य को पूरा करने के लिए यही समय बचा है। देश के सभी आवश्यक संसाधन इसी मिशन में लगाए जाने चाहिए।
परमाणु बम का सीन क्यों?
नेतन्याहू पोस्ट में लिखते हैं कि अगर देश के केंद्र में दो परमाणु बम गिर जाते हैं, तो इन फर्जी विवादों की परवाह किसे होगी? ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हमें जो ऐतिहासिक अवसर मिला है अगर उसको गंवा देते हैं तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। यह ऐसे प्रधानमंत्री के रहते नहीं हो सकता जिसकी गर्दन मुस्लिम ब्रदरहुड और आतंकवाद के समर्थकों के हाथ में हो, यह ऐसे प्रधानमंत्री के रहते नहीं हो सकता जो ट्रंप को सीधे फोन उठाकर उनसे आत्मीय और निरंतर बात न कर सके, यह ऐसे प्रधानमंत्री के रहते नहीं हो सकता जो टीवी इंटरव्यू के दबाव को भी न झेल सके।
"नेतन्याहू के खिलाफ नफरत ईरान से नहीं लड़ पाएगी"
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेतन्याहू के प्रति नफरत, चाहे वह एक पूरे धड़े के लिए कितनी भी सिर चढ़कर बोल रही हो, लेकिन वह ईरान के परमाणु खतरे के खिलाफ कोई काम नहीं आएगी। जो कोई भी अपनी, परिवार की और अपने प्रियजनों के अस्तित्व की परवाह करता है, उसकी उंगली किसी ऐसे व्यक्ति को वोट देने से पहले कांपनी चाहिए जो इस मिशन को पूरा करने में असमर्थ हो और अपनी राजनीतिक नफरत या किसी बेतुके विवाद के चक्कर में अपने परिवार को दूसरे नरसंहार के खतरे में झोंक दे।”
वरिष्ठ पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट अशोक उपाध्याय ने RT Hindi से बातचीत में कहा कि नेतन्याहू का ट्रंप के साथ अच्छा तालमेल है। ट्रंप और नेतन्याहू दोनों अपने बयानों में बार-बार कहते रहे हैं कि ईरान के पास परमाणु बम नहीं होने देंगे। वह अपने देश के लोगों को बताना चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ मजबूती से जंग वही लड़ सकते हैं। वह ईरान युद्ध में अपने नेतृत्व में की गई कार्रवाइयों को चुनाव में भुनाना चाहते हैं।
इजरायल की सड़कों पर हजारों लोग
शनिवार को तेल अवीव के हॉस्टेज स्क्वायर पर हज़ारों लोगों का हुजूम उमड़ा। यह सभी 2023 में 7 अक्टूबर के नरसंहार के दौरान हुई चूक की जांच के लिए एक आयोग गठित करने की मांग कर रहे थे। इस प्रदर्शन में विपक्षी नेताओं की भी मौजूदगी रही।
रैली के आयोजकों ने हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि “आप सभी से हम कहना चाहते हैं कि हमारा दिल आपके साथ है। हम आपके साथ हैं, आप अकेले नहीं हैं।”
अशोक उपाध्याय ने कहा कि नेतन्याहू के खिलाफ प्रोटेस्ट पहली बार नहीं है। इस तरह का विरोध प्रदर्शन उनके खिलाफ पहले भी हो चुका है। इन सबके बावजूद जब देश की बागडोर संभालने की बात आती है तो अंततः नेतन्याहू वहां की जनता में स्वीकार्य हो जाते हैं।
विरोध प्रदर्शन एक तरह जहां, यह संदेश दे रहा है कि कुछ इजरायली और विपक्ष नेतन्याहू को 7 अक्टूबर के हमले में चूक के लिए जिम्मेदार मानते हैं तो वहीं दूसरी तरफ नेतन्याहू इसको यह कहकर बैलेंस कर रहे हैं कि यह विपक्ष का प्रोपेगैंडा है और उन्होंने इजरायल की सुरक्षा से कभी समझौता नहीं किया। वह लोगों से कहना चाह रहे हैं कि हमारे खिलाफ विरोध और नफरत के और भी मौके मिलेंगे, लेकिन अगर दूसरा नेता चुन लिया तो वह ईरान से नहीं लड़ पाएगा।
वेस्ट बैंक में एक्शन
इजरायल में चुनाव से पहले सेना का वेस्ट बैंक में एक्शन शुरू हो गया है। शुक्रवार को फिलिस्तीन बंदूकधारियों के एक हमले में 2 इजरायली सैनिकों की मौत के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक में “पूर्ण लॉकडाउन” का आदेश दिया था।
रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने वेस्ट बैंक से लगभग 2,000 लोगों को जबरन विस्थापित किए जाने की पुष्टि की थी। अब इजरायली सेना ने एक बयान में कहा है कि वह रविवार से सोमवार तक फिलिस्तीनी श्रमिकों के वेस्ट बैंक के अधिकांश हिस्सों में प्रवेश पर रोक लगाएगी। साथ ही, मतदान वाले दिन यानी मंगलवार को क्षेत्र में आने-जाने वाले सभी रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
अशोक उपाध्याय ने कहा कि इस बीच वेस्ट बैंक में इजरायली सेना का एक्शन तेज होने का साफ संदेश है कि चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं होने पाए और दूसरा यह है कि उनकी सरकार में सीमा सुरक्षित है।
अमेरिका को क्यों पसंद हैं नेतन्याहू?
वरिष्ठ पत्रकार उपाध्याय ने कहा कि इजरायल ही एकमात्र ऐसा देश है, जो फिलिस्तीन, ईरान और लेबनान से लेकर आसपास के मुस्लिम देशों से लड़ रहा है। यह ट्रंप के एजेंडे के अनुरूप ही है। ट्रंप नेतन्याहू को मजबूत और आक्रामक नेता मानते हैं। वह कई बार बेंजामिन को बेस्ट वार टाइम प्राइम मिनिस्टर की संज्ञा दे चुके हैं। अमेरिका और इजरायल का लक्ष्य एक है और वह है ईरान को परमाणुविहीन करना। नेतन्याहू और ट्रंप की केमिस्ट्री अच्छी है। इसलिए ट्रंप और अमेरिका नेतन्याहू को सपोर्ट कर रहे हैं।
तीनों तस्वीरों के संयुक्त मायने क्या?
उन्होंने कहा कि इन तीनों तस्वीरों के संयुक्त मायने हैं कि नेतन्याहू के लिए इस बार राह आसान नहीं है। इसलिए वह चुनाव जीतने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इजरायल में एक धड़ा जहां उनको बहुत पसंद करता है, तो दूसरे धड़े में विरोध है। वह भ्रष्टाचार के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं। 7 अक्टूबर को हमले से पूर्व इनपुट के आरोपों से भी घिरे हैं, जिसने उनकी जीत काफी चुनौतीपूर्ण हो गई है। ऐसे में नेतन्याहू इजरायली जनता को इस पोस्ट के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की है कि ऐसा मौका बार-बार नहीं आएगा। वह देश के लोगों को समझाना चाहते हैं कि हमारा विरोध करने का मौका बाद में भी मिल सकता है, लेकिन इस वक्त दूसरा नेता आया तो ईरान से इजरायल की सुरक्षा को खतरा हो जाएगा।