इजरायल चुनाव: नेतन्याहू की लिकुड से गादी आइजेनकोट की याशर तक, किसकी क्या ताकत?

इजरायल चुनाव में मुकाबला सिर्फ नेतन्याहू और विपक्ष के बीच नहीं है। याशर जैसी नई पार्टियां चुनौती दे रही हैं, तो छोटी पार्टियां सरकार बनाने का गणित बिगाड़ सकती हैं। सर्वे में विपक्ष आगे है, लेकिन 61 सीटों का बहुमत अब भी दूर है।

संघर्षों से घिरे इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। यह चुनाव प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। उनका मुकाबला सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि उन छोटी पार्टियों से भी है, जिनके समर्थन से अगली सरकार का रास्ता तय हो सकता है।

इजरायल का चुनावी सिस्टम अलग है। यहां वोटर किसी उम्मीदवार को नहीं, बल्कि सीधे राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। 120 सीटों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए होता है। देश के 78 साल के इतिहास में कभी कोई एक पार्टी अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाई है। यही वजह है कि छोटे-छोटे दल सरकार बनाने और गिराने में बेहद ताकतवर हो जाते हैं। संसद में एंट्री पाने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 3.25% वोट हासिल करना जरूरी होता है।

आइए, जानते हैं कि इजरायल की प्रमुख पार्टियां कौन-सी हैं, उनके नेता कौन हैं, उनकी विचारधारा क्या है और 2022 के चुनाव में उन्हें कितनी सीटें मिली थीं।

1. लिकुड (Likud)

लिकुड इजरायल की प्रमुख दक्षिणपंथी पार्टी है। राष्ट्रवाद, सुरक्षा और मुक्त अर्थव्यवस्था की नीतियों की समर्थक है। नेतन्याहू लंबे समय से इस पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। सरकार बनाने के लिए लिकुड ने अति-दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी यहूदी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है।

2. ओत्जमा येहुदित (Otzma Yehudit)

ओत्जमा येहुदित का मतलब ‘यहूदी शक्ति’ है। यह पार्टी सुरक्षा के मामले में सख्त रुख अपनाती है और राष्ट्रवादी नीतियों का समर्थन करती है। इसके नेता इतामार बेन-ग्विर इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री हैं।

3. शास (Shas)

शास मुख्य रूप से उन यहूदियों का प्रतिनिधित्व करती है जिनके परिवारों की जड़ें उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में हैं। पार्टी धार्मिक परंपराओं और अपने समुदाय के सामाजिक हितों पर जोर देती है। यह लंबे समय से नेतन्याहू की सहयोगी रही है।

4. यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (United Torah Judaism)

यह दो अति-रूढ़िवादी यहूदी पार्टियों का गठबंधन है। इसका जोर अपने समुदाय की धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सुविधाओं पर है। सेना में अनिवार्य सेवा से अति-रूढ़िवादी यहूदी युवाओं को छूट देने के मुद्दे पर भी यह पार्टी मुखर रही है।

5. रिलिजियस जायनिज्म (Religious Zionism)

यह पार्टी इजरायल की सुरक्षा नीति को सख्त बनाने, कब्जे वाले वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का विस्तार करने और वहां इजरायल का नियंत्रण मजबूत करने की समर्थक है। इसके नेता बेजलेल स्मोट्रिच वित्त मंत्री हैं।

बता दें कि 2022 में रिलिजियस जायनिज्म, ओत्जमा येहुदित और नोआम ने संयुक्त सूची के रूप में चुनाव लड़ा था। 

6. पीपल ऑफ इजरायल (People of Israel)

सेना के पूर्व जनरल ओफर विंटर ने अगस्त 2026 में यह पार्टी बनाई। इसका मकसद उन दक्षिणपंथी मतदाताओं को आकर्षित करना है, जो युद्धों से निपटने के नेतन्याहू के तरीके से असंतुष्ट हैं। पार्टी सख्त सुरक्षा नीति और अति-रूढ़िवादी यहूदी युवाओं के लिए सेना में अनिवार्य सेवा की वकालत करती है। हालांकि, ताजा Walla सर्वे में यह पार्टी संसद में सीट पाने के लिए जरूरी 3.25 फीसदी वोट की सीमा पार करती नहीं दिख रही है।

नेतन्याहू के विरोध में कौन-सी पार्टियां हैं?

7. याशर (Yashar!)

याशर एक नई पार्टी है, जिसका नेतृत्व सेना के पूर्व प्रमुख गादी आइज़ेनकोट कर रहे हैं। पार्टी सेना में सभी के लिए समान नियम लागू करने की समर्थक है। इसके एजेंडे में महंगाई, शिक्षा और 7 अक्टूबर 2023 के हमले की जांच के लिए सरकारी आयोग बनाने जैसे घरेलू मुद्दे भी शामिल हैं।

8. बियाचाद (B'Yachad)

बियाचाद का मतलब ‘साथ मिलकर’ है। यह पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड की पार्टियों का संयुक्त चुनावी गठबंधन है। बेनेट धार्मिक रूप से रूढ़िवादी हैं, लेकिन सामाजिक मुद्दों पर उदार रुख रखते हैं। वहीं, लापिड मध्यमार्गी राजनीति के लिए जाने जाते हैं। बेनेट फिलिस्तीनी स्वतंत्रता का विरोध करते हैं और वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों के निर्माण का समर्थन करते हैं।

9. डेमोक्रेट्स (The Democrats)

डेमोक्रेट्स का गठन 2024 में इजरायल की लेबर पार्टी और वामपंथी मेरेत्ज के विलय से हुआ। पार्टी सामाजिक और राजनीतिक सुधारों पर जोर देती है। इसके नेता यायर गोलान अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को भी सरकार में शामिल करने के समर्थक हैं।

10. यिस्राएल बेतेनु (Yisrael Beiteinu)

इस पार्टी की स्थापना मुख्य रूप से पूर्व सोवियत संघ से आए यहूदी प्रवासियों को ध्यान में रखकर की गई थी। सुरक्षा और विदेश नीति पर इसका रुख सख्त है। पहले यह लिकुड के साथ गठबंधन कर चुकी है, लेकिन लिबरमैन ने नेतन्याहू के साथ नई सरकार बनाने से इनकार किया है।

11. रिजर्विस्ट्स-इकोनॉमिक पार्टी (Reservists-Economic)

यह नई पार्टी सेना में अति-रूढ़िवादी यहूदी युवाओं को मिलने वाली छूट खत्म करने और आम लोगों के जीवनयापन का खर्च कम करने की समर्थक है। इसके नेता योआज़ हेंडेल ने नेतन्याहू और आइज़ेनकोट के बीच ऐसी साझा सरकार बनाने का विचार रखा है, जिसमें अति-रूढ़िवादी यहूदी और अरब पार्टियां शामिल न हों। 

12. जॉइंट लिस्ट (Joint List)

जॉइंट लिस्ट अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का गठबंधन है। इसमें ताआल, हदाश और बलाद जैसी पार्टियां शामिल हैं। यह गाजा में युद्ध और वेस्ट बैंक पर इजरायल के कब्जे का विरोध करती है। यह इजरायल की पहचान को यहूदी राष्ट्र के रूप में परिभाषित करने वाले कानूनों का भी विरोध करती है। पिछले चुनाव में हदाश-ताआल को 5 सीटें मिली थीं, जबकि बलाद कोई सीट नहीं जीत सकी थी।

13. राम (Ra'am)

राम यानी यूनाइटेड अरब लिस्ट अरब समुदाय की पार्टी है। यह जॉइंट लिस्ट की तुलना में स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देती है। इसमें अरब समुदाय में अपराध, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे मुद्दे शामिल हैं। 2021 में यह सरकार में शामिल होने वाली पहली अरब नेतृत्व वाली पार्टी बनी थी।

ताजा सर्वे क्या कहते हैं?

द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूज वेबसाइट वाला (Walla) के एक सर्वे में गादी आइज़ेनकोट की याशर को 23 सीटें मिलने का अनुमान है। नेतन्याहू की लिकुड को 19 सीटें मिल सकती हैं। बियाचाद को 14 और डेमोक्रेट्स को 9 सीटें मिलने का अनुमान है।

सर्वे में यिस्राएल बेतेनु, शास, ओत्जमा येहुदित और जॉइंट लिस्ट को 8-8 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यूनाइटेड टोरा जूडिज्म को 7, रिलिजियस जायनिज्म और राम को 6-6, जबकि रिजर्विस्ट्स को 4 सीटें मिलने का अनुमान है। ओफर विंटर की पीपल ऑफ इजरायल पार्टी जरूरी वोट सीमा पार करती नहीं दिख रही है।

इस सर्वे में नेतन्याहू विरोधी जायनिस्ट विपक्षी गठबंधन को 54 सीटें मिलने का अनुमान है। रिजर्विस्ट्स की 4 सीटें भी जुड़ें, तो यह आंकड़ा 58 तक पहुंच सकता है। नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि जॉइंट लिस्ट और राम को मिलाकर 14 सीटें मिल सकती हैं।

इस तरह सर्वे में विपक्षी खेमे को बढ़त दिख रही है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा किसी भी खेमे के पास नहीं है। चुनाव के बाद छोटी पार्टियों का समर्थन और गठबंधन की बातचीत सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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