60 साल में कैसे दुनिया भर में फैल गई भीषण गर्मी? तीन तस्वीरों में समझें

हमें लगता है कि इस साल गर्मी कुछ ज्यादा ही लंबी खिंच रही है। तपते जंगल, सूखते मैदान और पानी के लिए भटकते जानवर… भीषण गर्मी का यह असर अब पहले से ज्यादा बड़े इलाकों में दिखाई दे रहा है। लेकिन गर्मी का यह बढ़ता दायरा अचानक नहीं बना। पिछले छह दशकों में इसमें लगातार बदलाव आया है। तीन तस्वीरों में समझिए कि 60 साल में दुनिया भर में भीषण गर्मी का दायरा कितना बढ़ गया है।

कभी भीषण गर्मी कुछ इलाकों तक सीमित रहती थी, लेकिन अब इसका असर एक साथ दुनिया के बड़े हिस्से में दिखाई देने लगा है। गर्मी की ऐसी घटनाएं महीनों तक चल सकती हैं और हजारों किलोमीटर दूर बसे इलाकों को भी प्रभावित कर सकती हैं। रॉयटर्स ने दुनिया भर के तापमान के आंकड़ों का विश्लेषण कर तस्वीरों के जरिए दिखाया है कि बीते छह दशकों में इन घटनाओं का दायरा कितना बढ़ गया है। 1960 के दशक में सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म 46 दिनों तक सक्रिय रहा और धरती के करीब 6 फीसदी हिस्से तक पहुंचा। वहीं, 2020 के दशक में सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म 367 दिनों तक चला और करीब 85 फीसदी धरती तक फैल गया। तीन तस्वीरों में यह बदलाव साफ देखा जा सकता है।

पहली तस्वीर: 1960 का दशक, महासागरों तक सीमित थे बड़े हीट स्टॉर्म

1960 के दशक में सबसे बड़े 10 हीट स्टॉर्म अपेक्षाकृत छोटे और सीमित इलाकों में फैले थे। ये मुख्य रूप से महासागरों के ऊपर या उनके आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय थे। इस वजह से दुनिया की बड़ी आबादी इनकी सीधी चपेट में आने से बची रही। रॉयटर्स के मुताबिक, इस दशक का सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म 46 दिनों तक सक्रिय रहा। यह अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुजरते हुए लैटिन अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक पहुंचा। इसका फैलाव धरती के करीब 6 फीसदी हिस्से तक था।

उस समय हीट स्टॉर्म आज की तुलना में काफी दुर्लभ थे। रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, 1960 के दशक में हर साल औसतन करीब पांच हीट स्टॉर्म सक्रिय होते थे।

दूसरी तस्वीर: 1990 का दशक, दुनिया के बड़े हिस्से तक पहुंची गर्मी

1990 के दशक तक दुनिया के सबसे बड़े हीट स्टॉर्म का दायरा बढ़ चुका था। अब ये घटनाएं केवल महासागरों या कुछ सीमित इलाकों तक नहीं रह गई थीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैलने लगी थीं। हालांकि, एशिया और उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से अब भी इनकी सीधी चपेट से बाहर थे। पहली और दूसरी तस्वीर की तुलना करने पर यह बदलाव साफ नजर आता है। 1960 के दशक में जहां बड़े हीट स्टॉर्म सीमित क्षेत्रों तक फैले थे, वहीं 1990 के दशक तक उनका भौगोलिक दायरा बढ़ गया था।

तीसरी तस्वीर: 2020 का दशक, करीब 85% धरती तक फैला हीट स्टॉर्म

2020 के दशक की तस्वीर में सबसे बड़ा बदलाव दिखाई देता है। अब दुनिया के सबसे बड़े हीट स्टॉर्म का फैलाव धरती के लगभग हर हिस्से तक पहुंच रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, इस दशक का सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म 367 दिनों तक सक्रिय रहा और अपने जीवनकाल में धरती के करीब 85 फीसदी हिस्से तक फैल गया। यह हीट स्टॉर्म 29 जुलाई 2023 को शुरू हुआ और 29 जुलाई 2024 को खत्म हुआ। रॉयटर्स ने इसे ‘हीट स्टॉर्म वेरा’ (Heat Storm Vera) नाम दिया।

इसकी चपेट में दुनिया के अलग-अलग हिस्से आए। फिलीपींस में भीषण गर्मी से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को परेशानी हुई। अमेरिका के लुइसियाना में इसने सूखे को और गंभीर बनाया, जिस दौरान जंगलों में बड़ी संख्या में आग लगी। इसी अवधि में भूमध्यसागर क्षेत्र में आए एक चक्रवात ने लीबिया में भारी बारिश की और डेरना शहर के पास दो बांध टूटने से विनाशकारी बाढ़ आई। सऊदी अरब में हज के दौरान मक्का की ग्रैंड मस्जिद के आसपास तापमान 51.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और 1,300 से ज्यादा जायरीन की मौत हुई।

रॉयटर्स के मुताबिक, ये अलग-अलग जगहों पर हुई घटनाएं एक ही विशाल हीट स्टॉर्म के दौरान सामने आई थीं।

होता क्या है हीट स्टॉर्म?

हीट स्टॉर्म (Heat Storm) भीषण गर्मी की ऐसी घटना है, जो बहुत बड़े इलाके में फैल जाती है और लंबे समय तक बनी रह सकती है। आम तौर पर हम हीट वेव यानी लू को किसी शहर, राज्य या क्षेत्र में पड़ने वाली असामान्य गर्मी के रूप में समझते हैं। लेकिन जब ऐसी गर्मी का फैलाव बहुत बड़ा हो जाए, तो उसका असर एक साथ कई देशों और महाद्वीपों तक पहुंच सकता है।

हीट स्टॉर्म और हीट वेव में क्या अंतर है?

- हीट वेव (लू): किसी खास इलाके में लगातार कई दिनों तक सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ना।
- हीट स्टॉर्म: बड़े इलाके में फैली ऐसी भीषण गर्मी, जो एक साथ कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है।

छह दशकों में 5 से बढ़कर 102 सालाना हुई संख्या

हीट स्टॉर्म का बदलाव केवल उनके फैलाव तक सीमित नहीं है। इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ी है। रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, 1960 के दशक में हर साल औसतन करीब पांच हीट स्टॉर्म सक्रिय होते थे। मौजूदा दशक में यह संख्या बढ़कर औसतन करीब 102 सालाना हो गई है। रॉयटर्स ने यह भी पाया कि धरती पर असामान्य रूप से गर्म दिनों में हीट स्टॉर्म की हिस्सेदारी बढ़ी है। 1960 के दशक में किसी भी स्थान पर ऐतिहासिक तापमान के सबसे गर्म 10 फीसदी दिनों में से औसतन करीब 3 फीसदी दिन हीट स्टॉर्म के दौरान आते थे। मौजूदा दशक में यह हिस्सेदारी बढ़कर करीब 43% हो गई है।

इसका मतलब है कि अब असामान्य गर्मी वाले दिनों में बड़े हीट स्टॉर्म की भूमिका पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

लगातार एक-दूसरे से जुड़ रही हैं गर्मी की घटनाएं

रॉयटर्स के विश्लेषण में एक और अहम बदलाव सामने आया है। अब बड़े हीट स्टॉर्म अक्सर एक-दूसरे से टकराते हैं, आपस में मिल जाते हैं या एक के बाद दूसरा सक्रिय हो जाता है। इससे दुनिया के बड़े हिस्सों में गर्मी की घटनाएं लगातार बनी रह सकती हैं। रॉयटर्स ने ऐसी लगातार या एक-दूसरे पर चढ़ती घटनाओं को ‘हीट स्टॉर्म कैस्केड’ कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 के दशक में इन श्रृंखलाओं की औसत अवधि करीब दो महीने थी, जो 2000 के दशक की शुरुआत में बढ़कर नौ महीने हो गई।

इसके बाद 6 जुलाई 2008 को ऐसी एक श्रृंखला शुरू हुई, जो रॉयटर्स की रिपोर्ट तैयार किए जाने तक खत्म नहीं हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान लगातार 6,681 दिनों तक धरती पर कम से कम एक हीट स्टॉर्म सक्रिय रहा और कई बार एक से ज्यादा हीट स्टॉर्म भी एक साथ मौजूद थे।

धरती के गर्म होने के साथ बढ़ रही है भीषण गर्मी

रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, 1960 के दशक से मौजूदा दशक तक वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। इसी अवधि में हीट वेव और हीट स्टॉर्म से प्रभावित धरती के औसत हिस्से में 12 गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में अल नीनो को भी एक ऐसा कारक बताया गया है, जो हीट स्टॉर्म और हीट वेव को और तीव्र कर सकता है।

हीट स्टॉर्म का असर केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है। ये सूखे को गंभीर कर सकते हैं और जंगलों में आग को बढ़ावा दे सकते हैं। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से मृत बच्चे के जन्म और प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।

तीनों तस्वीरों से सामने आने वाली सबसे अहम बात यह है कि छह दशकों में भीषण गर्मी का दायरा बहुत तेजी से बढ़ा है। 1960 के दशक में सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म 46 दिनों तक सक्रिय रहा और धरती के करीब 6 फीसदी हिस्से तक पहुंचा। इसके मुकाबले 2020 के दशक का सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म 367 दिनों तक सक्रिय रहा और करीब 85 फीसदी धरती तक फैल गया। रॉयटर्स के विश्लेषण के मुताबिक, अब हीट स्टॉर्म न केवल ज्यादा व्यापक हैं, बल्कि लगातार एक-दूसरे से जुड़कर लंबे समय तक भीषण गर्मी की स्थिति बनाए रख सकते हैं।