My Name is Khan… ब्रिटेन में हर कोई क्यों बोल रहा है?

एक देश, जहां सदियों से एक सरनेम का दबदबा रहा है, अब वहां कुछ ऐसा हो रहा है जो आपको हैरान कर सकता है। हजारों किलोमीटर दूर एशिया से जुड़ा एक नाम अब इस देश की नई पीढ़ी में तेजी से अपनी जगह बना रहा है… आखिर माजरा क्या है?

आप किसी देश में जाएं और वहां एक बच्चा मिले, जो अपना नाम XYZ बताए और सरनेम हो ‘खान’। फिर दूसरा बच्चा मिले, उसका नाम ABC हो, लेकिन सरनेम फिर वही ‘खान’। आगे बढ़ें तो कई और बच्चे मिलें, जिनके नाम भले अलग-अलग हों, लेकिन सरनेम एक ही हो- खान!

एक पल के लिए आपको लग सकता है कि आप पाकिस्तान में हैं, भारत में या फिर बांग्लादेश में। आखिर इन देशों में ‘खान’ सरनेम सुनना कोई हैरानी की बात नहीं। लेकिन जरा ठहरिए! क्या हो अगर यह नजारा इन एशियाई देशों का नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर यूरोप के किसी देश का हो? मसलन, ब्रिटेन का इंग्लैंड या वेल्स!

हैरान होने की जरूरत नहीं, क्योंकि ब्रिटेन से आई एक रिपोर्ट कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रही है। कभी ब्रिटिश पहचान का प्रतीक माने जाने वाले सरनेम ‘स्मिथ’ की बादशाहत अब खतरे में है। नवजात बच्चों के सरनेम की रेस में ‘खान’ तेजी से उसके करीब पहुंच रहा है। दोनों के बीच का फासला इतना कम रह गया है कि आने वाले कुछ वर्षों में ब्रिटेन में पैदा होने वाले बच्चों के बीच ‘खान’, ‘स्मिथ’ को पीछे छोड़ सकता है।

ब्रिटेन में बदलते सरनेम की कहानी है क्या? 

शाहरुख खान की फिल्म का मशहूर डायलॉग ‘माई नेम इज खान’ अब ब्रिटेन के बदलते नामों की कहानी से भी जुड़ गया है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कौन-सा सरनेम नंबर वन बनेगा, बल्कि यह भी है कि आखिर ब्रिटेन की नई पीढ़ी के नामों में ऐसा बदलाव क्यों आ रहा है?

ब्रिटेन से ‘खान’ सरनेम को लेकर आई ये खबर पहचान, बदलती आबादी और समाज की तस्वीर पर एक नई बहस छेड़ सकती है। यहां मामला किसी फिल्म का नहीं, बल्कि उन बच्चों का है जो पैदा होते ही नामों की एक अलग ही रेस में शामिल हो गए हैं!

द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो 2027 तक खान ब्रिटेन में नवजात बच्चों के बीच सबसे लोकप्रिय सरनेम बन सकता है। यानी जिस नाम को कभी ब्रिटिश पहचान का पारंपरिक हिस्सा माना जाता था, उसकी जगह अब दक्षिण एशियाई मूल का एक सरनेम लेने की ओर बढ़ रहा है।

1996 में 5464 का अंतर, अब सिर्फ 330!

इस बदलाव की कहानी को समझने के लिए आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। ब्रिटेन के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) के आंकड़ों के द टेलिग्राफ के विश्लेषण के मुताबिक, 2025 में इंग्लैंड और वेल्स में 4,102 नवजात बच्चों का सरनेम स्मिथ दर्ज किया गया, जबकि 3,772 बच्चों का सरनेम खान था। यानी दोनों के बीच अंतर महज 330 बच्चों का रह गया।

सिमट रही खान और स्मिथ सरनेम के बीच की दूरी

यानी तीन दशक पहले दोनों सरनेम के बीच जो दूरी थी, वह अब तेजी से सिमट गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मिथ सरनेम वाले नवजातों की संख्या में सालाना औसतन 4 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि खान में 1.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन्हीं रुझानों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि 2027 में खान, स्मिथ को पीछे छोड़ सकता है। हालांकि, यह भविष्य का अनुमान है, अभी हुआ बदलाव नहीं।

इस रेस के पीछे वजह क्या है?

अब सवाल उठता है कि आखिर ब्रिटेन में ऐसा क्या बदल रहा है कि एक पारंपरिक अंग्रेजी सरनेम की जगह दक्षिण एशिया में प्रचलित सरनेम लेने की ओर बढ़ रहा है?

इसका जवाब सिर्फ नामों की लोकप्रियता में नहीं, बल्कि बदलती आबादी में छिपा है। द टेलिग्राफ की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने इसके पीछे दक्षिण एशियाई देशों से बढ़ते प्रवासन, जन्म दर में अंतर और अलग-अलग समुदायों में प्रचलित सरनेम की संख्या जैसे कारणों की ओर इशारा किया है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइग्रेशन ऑब्जर्वेटरी की शोधकर्ता नूनी जोर्गेनसन के मुताबिक, 2021 के बाद खास तौर पर दक्षिण एशियाई देशों से ब्रिटेन में प्रवासन बढ़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि ब्रिटेन में जन्मी महिलाओं के मुकाबले प्रवासी माताओं से होने वाले जन्मों का अनुपात बदल रहा है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि केवल इन्हीं कारणों के आधार पर खान सरनेम की बढ़ती लोकप्रियता का पूरा हिसाब नहीं लगाया जा सकता।

यहां एक बात समझना जरूरी है। किसी सरनेम का अधिक इस्तेमाल होना और किसी समुदाय की कुल आबादी बढ़ना एक ही बात नहीं है। नवजात बच्चों के सरनेम के आंकड़े बताते हैं कि जन्म लेने वाली नई पीढ़ी में कौन-से नाम ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। ये आंकड़े अपने आप में ब्रिटेन की पूरी आबादी के सरनेम का अनुपात नहीं बताते।

सिर्फ खान नहीं... अहमद, अली और सिंह भी आगे

ब्रिटेन में सरनेम की इस बदलती तस्वीर में खान अकेला नहीं है। 1996 में नवजात बच्चों के सबसे लोकप्रिय 10 सरनेम में सभी पारंपरिक ब्रिटिश मूल के थे। लेकिन 2025 तक इस सूची में खान, अहमद, अली, हुसैन, सिंह, पटेल और कौर जैसे नाम भी शामिल हो गए।

इसका मतलब यह नहीं कि पारंपरिक ब्रिटिश नाम खत्म हो रहे हैं। बल्कि नवजातों के बीच अलग-अलग पृष्ठभूमि के सरनेम की मौजूदगी बढ़ रही है और पुराने नामों का शीर्ष सूची में दबदबा कम हो रहा है।

पहले नाम में भी दिख रहा है यही ट्रेंड

सरनेम की इस कहानी के साथ बच्चों के पहले नामों के आंकड़े भी दिलचस्प हैं। इंग्लैंड और वेल्स में लड़कों के बीच Muhammad 2023 से लगातार तीन वर्षों तक सबसे लोकप्रिय पहला नाम रहा है। 2025 के आंकड़ों में भी इसने शीर्ष स्थान बनाए रखा।

यानी बदलाव केवल परिवार के नाम तक सीमित नहीं है। बच्चों को दिए जा रहे पहले नामों में भी ब्रिटेन की विविध सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि दिखाई दे रही है।

ब्रिटेन में हर तरफ सुनाई देगा- ‘माई नेम इज खान’?

फिलहाल तो ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। स्मिथ अभी भी नवजात बच्चों के बीच सबसे आम सरनेम है। लेकिन उसके और खान के बीच घटता अंतर बताता है कि ब्रिटेन की नई पीढ़ी के नामों की तस्वीर बदल रही है।

और हां, शाहरुख खान की फिल्म ‘माई नेम इज खान’ का डायलॉग याद आना लाजिमी है। फर्क बस इतना है कि फिल्म में खान अपनी पहचान समझाने निकले थे, जबकि ब्रिटेन में अब आंकड़े खुद बता रहे हैं कि यह सरनेम कितनी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में ब्रिटेन के नवजात बच्चों के सरनेम की सूची में खान पहले पायदान पर पहुंच सकता है। तब स्मिथ को पीछे छोड़ने की यह कहानी सिर्फ दो नामों की प्रतिस्पर्धा नहीं होगी, बल्कि बदलते ब्रिटेन की एक छोटी-सी झलक भी होगी।