चीन और उत्तर कोरिया वैसे तो पहले से ही एक दूसरे के अहम रणनीतिक और व्यापारिक सहयोगी हैं, लेकिन उनके बीच 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे एक दशक से अधिक पुराने ब्रिज ने क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स में हलचल मचा दी है।
चीन से उत्तर कोरिया को सीधे जोड़ने वाले यह ब्रिज करीब 12 साल की देरी से शुरू होने जा रहा है। ब्रिज अब दोनों देशों के बीच संबंधों को नई रफ्तार देने जा रहा है। यह ब्रिज यूलू नदी पर बनाया गया है। गुरुवार को इसका औपचारिक उद्घाटन किया जाना है।
चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' ने बुधवार को रिपोर्ट दी कि 'न्यू यूलू रिवर ब्रिज' चार-लेन का है, जो 3 किलोमीटर लंबा है। यह ब्रिज पूर्वोत्तर चीन के दांडोंग शहर को उत्तर कोरियाई के सिनुइजू शहर से सीधे जोड़ता है। इसे 2014 में ही शुरू हो जाना था, लेकिन कुछ विसंगतियों की वजह से इसे तब मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। यह ब्रिज तब शुरू हो सका, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जून में प्योंग पांग की यात्रा की थी।
एक ब्रिज 3 देशों को टेंशन
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर और जियोपॉलिटकल एक्सपर्ट अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि किन्हीं दो देशों को जोड़ने वाला ब्रिज सिर्फ ट्रेड और आवाजाही को ही आसान नहीं करता, बल्कि यह उसके संबंधों को नया आधार और नई मजबूती से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि चीन और उत्तर कोरिया पुराने साझेदार हैं। उत्तर कोरिया का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट और इंपोर्ट दोनों चीन के साथ होता है, अब इसमें और तेजी आएगी। दोनों देश पुराने ट्रेड और डिफेंस पार्टनर हैं, अब इस क्षेत्र में वह और तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।
अमेरिका पर रणनीतिक बढ़त
उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका में एक तरीके से जो सुप्रीमेसी का कोल्डवार चल रहा है, उस लिहाज से देखें तो चीन को उत्तर कोरिया में डायरेक्ट एक्सेज मिल गया है। इससे जरूरत पड़ने पर उत्तर कोरिया को चीन से किसी भी तरह की मदद पहुंचाना या लेना आसान होगा। यह अमेरिका पर चीन की स्ट्रैटेजिक बढ़त है। साथ ही उत्तर कोरिया की भी अमेरिका पर रणनीतिक बढ़त है। क्योंकि अब उत्तर कोरिया अमेरिका पर चीन के गठजोड़ से ज्यादा मजबूती से जवाब दे पाएगा। अमेरिका अभी तक दक्षिण कोरिया और जापान के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास से टेंशन देता रहा है। अब चीन और उत्तर कोरिया यही काम करके तीनों ही देशों को टेंशन दे सकते हैं। इससे चीन को जापान पर भी रणनीतिक बढ़त मिलेगी।
US नहीं चाहता चीन-उत्तर कोरिया में बढ़े नजदीकी
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि अमेरिका कभी नहीं चाहता है कि चीन और उत्तर कोरिया के बीच इस तरह से नजदीकी बढ़े। जबकि दोनों लंबे समय से घनिष्ठ संबंधों में हैं। इस ब्रिज के बनने से उसका उत्तर कोरिया के साथ ट्रेड और डिफेंस क्षेत्र में सहयोग और मजबूत होगा। वैसे भी चीन किसी भी देश पर हमला करने नहीं जा रहा है, क्योंकि इस वक्त उसका एकमात्र फोकस अपने विकास पर है। वह किसी भी तरह से खुद को अमेरिका से आगे ले जाना चाहता है। यही अमेरिका के लिए चुनौती बन गया है। जबकि अमेरिका समेत पश्चिमी देश चीन को उभरता हुआ नहीं देख पा रहे हैं। मगर वह रफ्तार पकड़ चुका है।
जैसे अमेरिका ताइवान को हथियार सप्लाई करके चीन को टेंशन देता है, वैसे अब बीजिंग उत्तर कोरिया को हथियार सप्लाई करके, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करके या जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज से अमेरिका को भी तनाव दे सकता है।
इससे दक्षिण कोरिया और जापान का भी तनाव बढ़ सकता है। उत्तर कोरिया ने वैसे सभी तरह के अत्याधुनिक हथियार बना लिए हैं। वह परमाणु संपन्न है। जो थोड़ी-बहुत कमी होगी, वह भी चीन की मदद से हासिल कर लेगा। इससे उत्तर कोरिया की ताकत और बढ़ेगी।
रूस, चीन के साथ उत्तर कोरिया की दोस्ती बढ़ेगी
एक महीने पहले रूस-उत्तर कोरिया के बीच और अब चीन और उत्तर कोरिया के बीच शुरू हुआ नया ब्रिज तीनों देशों के गठबंधन को मजबूत करेगा। यह अमेरिका को भारी टेंशन दे सकता है। क्योंकि चीन, रूस और उत्तर कोरिया तीनों ही देश परमाणु संपन्न होने के साथ टेक्नोलॉजी और सेना में भी टॉप हैं। चीन की इकोनॉमी तेजी से अमेरिका का पीछा कर रही है।
चीन ने क्या कहा?
इस ब्रिज के उद्घाटन समारोह से पहले चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बुधवार को कहा कि नया पुल आर्थिक, व्यापारिक और “लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान” को और बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा, “चीन और डीपीआरके (DPRK-उत्तर कोरिया) नदियों और पहाड़ों से जुड़े मित्रवत पड़ोसी हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह पुल दोनों देशों के बीच “कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना” है।
पुराने सिंगल लेन पुल से बोझ होगा कम
नए लिंक से दांडोंग-सिनुइजू मार्ग पर अब पुराने पुल पर से बोझ कम होने की उम्मीद है, जो सिंगल लेन का था, और दोनों देशों के बीच अब तक 70% से अधिक आधिकारिक व्यापार को संभालता था। 1937 में बना पुराना पुल एक रेलवे लाइन के साथ-साथ कारों और ट्रकों को ले जाता है, लेकिन वाहन यातायात एक समय में केवल एक ही दिशा में चल सकता है। अब इस नए पुल के खुलने से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलने और लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार होने की संभावना है।
उत्तर कोरिया का बयान
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने कहा कि इस ब्रिज के बन जाने से उत्तर कोरिया चीन को प्रोसेस्ड सामान, फूड प्रोडक्ट, कॉस्मेटिक्स और मादक पेय पदार्थों का निर्यात बढ़ा सकता है। बता दें कि इससे करीब एक महीने पहले रूस और उत्तर कोरिया के बीच भी हाल ही में लगभग 1 किलोमीटर लंबे सड़क पुल की शुरुआत हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी अधिकारियों ने उत्तर कोरिया-रूस पुल के खुलने पर संभवतः असहज महसूस किया होगा, जिसके बारे में रूसी सरकार ने कहा था कि यह एक नए निर्मित सीमा पार बिंदु के माध्यम से प्रतिदिन 300 वाहनों तक की आवाजाही की अनुमति देगा।