भारत में Starlink की एंट्री पर कहां फंसा है पेच? एक्सपर्ट से समझिए

भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का प्रावधान है। अगर कोई सैटेलाइट सर्विस आसानी से बंद न की जा सके, तो यह स्थिति को जटिल बना सकती है। इसीलिए सरकार चाहती है कि सभी सुरक्षा उपाय पहले ही तय हो जाएं।

“यह काफी अजीब है कि एक बड़ी टेक कंपनी का मालिक ओलिगार्की (अल्पतंत्र) की बात कर रहा है। लेकिन मजाक से हटकर बात यह है कि आप अपनी चिंताओं या विरोध के लिए सोशल मीडिया को जरिया नहीं बना सकते। आपको यह देखना होगा कि आप रेगुलेटर की शर्तों को कैसे पूरा कर रहे हैं। केवल प्रेस गेम खेलने या सोशल मीडिया पर आरोप लगाने से भारतीय नागरिकों को भड़काना सही नहीं है। आपको भारत की कानूनी शर्तें पूरी करने से ही आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है।”

यह कहना है कानूनी मामलों की एक्सपर्ट और सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील एन.एस. नप्पिनाई का।

स्टारलिंक के मालिक एलन मस्क के आरोपों पर आरटी इंडिया से बातचीत में नप्पिनाई ने आगे कहा, “सरकार एक ट्रस्टी की भूमिका निभा रही है। वह सबसे पहले देश की सुरक्षा और जरूरतों को प्राथमिकता देगी और उसके बाद सभी कंपनियों को समान अवसर सुनिश्चित करेगी। अगर वास्तव में कोई ओलिगार्की या एकाधिकार स्टारलिंक के अधिकारों को रोक रहा है, तो मस्क के पास भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग जाने का कानूनी रास्ता खुला है।”

स्टारलिंक को लेकर सुरक्षा का पेच क्यों फंसा है?

इसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि सैटेलाइट कनेक्टिविटी पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क से बाहर काम कर सकती है। इससे सरकारी एजेंसियों के लिए इस पर निगरानी और नियंत्रण रखना मुश्किल हो सकता है। यह संवेदनशीलता 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के दौरान भी सामने आई थी, जब आतंकियों ने अपने हैंडलर्स से बात करने के लिए सैटेलाइट संचार का इस्तेमाल किया था। तब से सैटकॉम राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन गया है।

इसके अलावा, भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का प्रावधान है। अगर किसी सैटेलाइट सर्विस को आसानी से बंद न किया जा सके, तो स्थिति और जटिल हो सकती है। इसलिए सरकार चाहती है कि सभी सुरक्षा उपाय पहले से तय हों। सरकार का कहना है कि नियम सबके लिए बराबर हैं और सुरक्षा में कोई ढील नहीं दी जा सकती।

इन देशों में भी है स्टारलिंक का विवाद

मस्क का आरोप क्या है?

एलन मस्क ने अपनी एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कुछ अल्पतंत्र यानी पूंजीपतियों की वजह से स्टारलिंक को भारत में एक्सेस नहीं मिल पा रहा है। स्टारलिंक का कहना है कि उसने सभी शर्तें पूरी कर दी हैं, फिर भी उसे रोका जा रहा है।

इसे लेकर एलन मस्क ने एक्स पर लिखा, “दुर्भाग्य से, भारतीय लोगों पर अपना एकछत्र एकाधिकार बनाए रखने के लिए कुछ पूंजीपति (ओलिगार्क) हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं... यह भारत की जनता के खिलाफ एक अपराध है!”

एलन मस्क की इस पोस्ट के बाद भारत सरकार ने भी जवाब दिया और उनके आरोपों को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।

सरकार का पलटवार

भारत सरकार की ओर से मस्क के आरोपों के बाद एक बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया, “लाइसेंस के नियम और शर्तों के तहत, हर लाइसेंस धारक को सुरक्षा शर्तों का पालन करके दिखाना जरूरी है। इस प्रक्रिया के तहत तीनों लाइसेंस धारकों की सुरक्षा समीक्षा फिलहाल जारी है। यह कहना पूरी तरह से आधारहीन और गलत है कि हमारा नियम या उसका पालन किसी के साथ भेदभाव करता है।”

भारत सरकार का यह भी कहना है कि उसका ढांचा पूरी तरह निष्पक्ष है और यह सैटेलाइट सहित सभी टेलीकॉम सेवाओं पर समान रूप से लागू होता है। सैटेलाइट आधारित मोबाइल संचार को बढ़ावा देने के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं, जो नॉन-जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, इसके साथ यह शर्त भी जुड़ी है कि हर लाइसेंस धारक को सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं और उनके डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री भी कह चुके हैं- फोन और नेटवर्क की सुरक्षा जरूरी

प्रधानमंत्री ने भी टेलीकॉम और डिजिटल तकनीक से जुड़े सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में उन्होंने कहा,

प्रधानमंत्री
“हम दशकों पुराने कानूनों को बदलकर ‘टेलीकम्युनिकेशन एक्ट’ के तहत एक मॉडर्न स्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं। आज जब टेलीकॉम और डिजिटल तकनीक इतनी महत्वपूर्ण है, तो इससे जुड़े सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से मजबूत और अभेद्य बनाना जरूरी है। फोन और नेटवर्क की सुरक्षा हम सभी की प्राथमिकता है।”
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री

मस्क ने किफायती इंटरनेट की कही बात

एलन मस्क का मानना है कि भारत में अभी भी दूरदराज के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और किफायती इंटरनेट की समस्या है, जिसे वह दूर कर सकते हैं।

इसी वजह से उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “भारत में स्टारलिंक उन लोगों के लिए हाई-स्पीड और किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराएगा, जो मौजूदा कीमतों को वहन नहीं कर सकते या जिनके पास इंटरनेट कनेक्शन ही नहीं है!”

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सस्ते डेटा और बेहतर कनेक्टिविटी ने देश में कई नए सेक्टर और कारोबार के मौके पैदा किए हैं। उन्होंने कहा, “बीते दशक में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार हुआ है। दूर-दराज के इलाकों में टावर लगाए गए, ऑप्टिकल फाइबर का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और डेटा भी सस्ता हुआ। इससे इकॉनमी के नए सेक्टर भी बने। टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन सेक्टर में नए कंज्यूमर भी बढ़े हैं।”

भारत में स्टारलिंक की मौजूदा स्थिति क्या है?

स्टारलिंक के पास भारत के दूरसंचार विभाग से सैटेलाइट लाइसेंस (GMPCS) और IN-SPACe से 5 साल का सैटेलाइट अधिकार पहले से मौजूद है। कंपनी ने सैकड़ों एंटिना के साथ करीब 20 गेटवे भी बना लिए हैं। हालांकि, केवल लाइसेंस मिलना ही लॉन्चिंग की गारंटी नहीं है।

स्टारलिंक को अभी स्पेक्ट्रम आवंटन, अंतिम सुरक्षा मंजूरी और FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) जैसी अन्य स्वीकृतियों का इंतजार है।

वहीं, भारत ने स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए एक प्रशासनिक मॉडल को मंजूरी दी है। इसमें कुल राजस्व का 5% और ग्रामीण या दूरदराज इलाकों के लिए 4% इस्तेमाल शुल्क तय किया गया है।

सरकार का बड़ा लक्ष्य उन दूरदराज इलाकों तक भी सस्ता इंटरनेट पहुंचाना है, जहां ऑप्टिकल फाइबर या मोबाइल टावर लगाना मुश्किल या महंगा है। सैटेलाइट इंटरनेट इस कमी को पूरा कर सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री ने भी साफ कर दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हो सकता।

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