स्टालिनग्राद, वोल्गोग्राद, किरोवग्राद... ये रूस के शहर हैं। इनका अपना इतिहास है। आपमें से कई लोगों ने इनका नाम शायद सुना हो। रूसी और स्लाविक भाषाओं में 'ग्राद' (Град / Grad) का अर्थ 'शहर' या 'किला' होता है।
इस समय ऐसे ही नाम वाला एक शहर चर्चा में है। नाम है-कैलिनिनग्राद। इसकी लोकेशन को देखने के बाद आपको समझ में आ जाएगा कि पूरी कहानी क्या है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुछ घंटे पहले वॉर्निंग भी दे दी है।
उन्होंने कहा कि अगर बाल्टिक क्षेत्र में मौजूद रूस के इलाके ‘कैलिनिनग्राद’ पर सीधा हमला होता है, तो मॉस्को अपने जखीरे में मौजूद ‘सभी हथियारों’ का इस्तेमाल कर सकता है। इस चेतावनी ने फिर से दुनियाभर का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। आखिर वो जमीन कहां है और अचानक पश्चिमी देश उसके आसपास क्या करने लगे हैं।
इसे रूस और नाटो के बीच संघर्ष का एक संभावित हॉटस्पॉट माना जा रहा है। गुरुवार को मॉस्को में 'वाल्दाई डिस्कशन क्लब' में पुतिन ने कहा कि रूस का किसी भी यूरोपीय देश पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन अगर पश्चिम तनाव बढ़ाता है या रूसी क्षेत्र को धमकाता है, तो वह जवाब देगा।
समझिए, कैलिनिनग्राद पर चल क्या रहा है?
पिछले महीने मॉस्को ने चेतावनी दी थी कि रूस के कैलिनिनग्राद इलाके के पास NATO के बढ़ते सैन्य अभ्यास और अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट के सदस्यों के आक्रामक बयानों से सीधे सशस्त्र संघर्ष का खतरा बढ़ रहा है। बेल्जियम में मौजूद रूसी दूतावास ने 28 सितंबर को एक बयान में NATO को चेतावनी दी थी। इस बयान में बाल्टिक इलाके में मौजूद रूसी क्षेत्र (एक्सक्लेव) की रक्षा के लिए 'अपने पास मौजूद सभी हथियारों' का इस्तेमाल करने के रूस के पक्के इरादे पर जोर दिया गया है।
बेल्जियम में ही NATO का मुख्यालय भी है। नाटो की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने रूस का संदेश मिलने की पुष्टि की। इस संदेश में पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के इस महीने की शुरुआत में दिए गए बयानों का जिक्र किया गया। सिकोरस्की ने कहा था कि कैलिनिनग्राद इलाके में 'बहुत कम सैनिक' हैं। उन्होंने NATO से रूस की सीमाओं के पास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का आग्रह किया था, ताकि मॉस्को 'इस बात को लेकर अनिश्चित रहे कि हम क्या करेंगे।'
आयरलैंड में रूसी दूतावास ने और भी साफ शब्दों में कहा कि अगर NATO ने कैलिनिनग्राद इलाके की घेराबंदी करने की कोशिश की, तो मॉस्को परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है और ऐसे संकट में पहले से सैन्य कार्रवाई करने पर भी विचार कर सकता है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 30 सितंबर को कहा कि पोलैंड और दूसरे देशों से आ रहे बयानों के जवाब में, 'हमारे राजनयिकों का यूरोप के गरम दिमाग वाले लोगों को हमारे नीतिगत दस्तावेजों की याद दिलाना स्वाभाविक है।'
रूस के राजदूत और ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड को-ऑपरेशन इन यूरोप (OSCE) में स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोल्यान्स्की ने कहा कि बाल्टिक देशों और पोलैंड जैसे कुछ देशों का दावा है कि कैलिनिनग्राद को रूस के बाकी इलाके से अलग कर दिया जाना चाहिए और बाल्टिक सागर को NATO का अंदरूनी सागर बना दिया जाना चाहिए।”
कहां है कैलिनिनग्राद
कैलिनिनग्राद रूस के पश्चिम में स्थित है। यह बाल्टिक सागर के किनारे बसा एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारी सैन्य तैनाती है। NATO के सदस्य देशों पोलैंड और लिथुआनिया के बीच जमीन के एक संकरे हिस्से को 'सुवाल्की गैप' के नाम से भी जाना जाता है। यह इलाका लगभग 15,000 वर्ग किलोमीटर (5,830 वर्ग मील) में फैला है।
आकार के लिहाज से यह इलाका लगभग भारत के नगालैंड (16,579 वर्ग किलोमीटर) जितना है। कैलिनिनग्राद की आबादी करीब 10 लाख है। इसकी राजधानी कैलिनिनग्राद शहर है, जहां इस इलाके की लगभग आधी आबादी रहती है। यह इलाका ऐतिहासिक रूप से जर्मनी के पूर्वी प्रशिया का हिस्सा था और कोनिग्सबर्ग इसकी राजधानी थी।
1991 के बाद कैसे बदली स्थिति
दूसरे विश्व युद्ध के आखिर में, रेड आर्मी के कब्जे के बाद कोनिग्सबर्ग और पूर्वी प्रशिया के आस-पास के उत्तरी इलाका सोवियत संघ का हिस्सा बन गया। विश्व युद्ध में जीत हासिल करने वाले देशों ने पूर्वी प्रशिया को आपस में बांट लिया। 1945 के पॉट्सडैम सम्मेलन में, मित्र देशों ने सैद्धांतिक रूप से कोनिग्सबर्ग और उससे सटे इलाके को सोवियत संघ को सौंपने पर सहमति जताई। इसके बाद सोवियत संघ ने कोनिग्सबर्ग समेत उत्तरी पूर्वी प्रशिया को रूसी सोवियत गणराज्य में मिला लिया। 1946 में इस शहर का नाम बदलकर कैलिनिनग्राद कर दिया गया।
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद इस इलाके की स्थिति में काफा बदलाव आया। कैलिनिनग्राद रूस का हिस्सा तो बना रहा, लेकिन लिथुआनिया और बेलारूस जैसे नए आजाद देशों ने इसे मुख्य रूस से अलग कर दिया। इससे यह दूसरे देशों से घिरा हुआ रूस का एक एक्सक्लेव बन गया। 'एक्सक्लेव' (Exclave) देश के मुख्य हिस्से से अलग-थलग पड़े इलाके को कहते हैं।
रूस के लिए क्यों अहम कैलिनिनग्राद?
- कैलिनिनग्राद की रणनीतिक अहमियत मुख्य रूप से इसकी लोकेशन की वजह से है।
- यह मॉस्को को बाल्टिक सागर में सैन्य मौजूदगी का मौका देती है।
- इसके जरिये मॉस्को उत्तरी और मध्य यूरोप में अपनी सैन्य ताकत दिखा सकता है। इस इलाके में रूस का बड़ा मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर है।
- इसमें नेवी, एयर-डिफेंस और मिसाइल क्षमताएं शामिल हैं।
- यहां रूस का बाल्टिक फ्लीट मौजूद है। इसे ऐसे रूसी मिसाइल सिस्टम से लैस किया गया है जो पारंपरिक या न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकते हैं। इससे ये बड़े यूरोपीय देशों पर आसानी से हमला करने की रेंज में आ जाते हैं।
- कैलिनिनग्राद को रूस का एकमात्र ऐसा बाल्टिक सागर बंदरगाह भी माना जाता है जो साल भर बर्फ से मुक्त रहता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इस इलाके को मॉस्को के लिए दबाव का एक संभावित केंद्र बनाती है।
- चूंकि यह इलाका दूसरे देशों की जमीन से घिरे होने के कारण रूस की मेन लैंड से अलग है, इसलिए किसी टकराव की स्थिति में यहां सामान पहुंचाने या अतिरिक्त सैन्य बल भेजने में मॉस्को को लॉजिस्टिकल चुनौतियां आ सकती हैं।
इसकी जमीनी सीमाएं पोलैंड और लिथुआनिया से लगती हैं। जबकि बाल्टिक सागर तक पहुंच इस इलाके की सैन्य और राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करती है। नाटो इस इलाके में अपनी मौजूदगी को मजबूती कर रहा है। फिनलैंड और स्वीडन क्रमशः 2023 और 2024 में इस गठबंधन में शामिल हुए। उनकी सदस्यता ने बाल्टिक सागर के आसपास सुरक्षा माहौल को बदल दिया है। इस इलाके में गठबंधन की सैन्य मौजूदगी को लेकर मॉस्को की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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कैलिनिनग्राद पर हाल के घटनाक्रम भी जान लीजिए
30 अप्रैल से 6 मई 2026: लिथुआनियाई, पोलिश और पुर्तगाली सैनिकों ने सुवाल्की कॉरिडोर में एयरस्ट्राइक की प्रैक्टिस की। यह पोलैंड और लिथुआनिया के इलाके की एक संकरी पट्टी है जो बेलारूस और कैलिनिनग्राद को अलग करती है।
16 से 26 जून, 2026 : फ्रांसीसी, लिथुआनियाई और पोलिश सेनाओं ने सुवाल्की कॉरिडोर में NATO के सैन्य अभ्यासों की एक सीरीज ‘गैलेंट बोर 2026’ (Gallant Boar 2026) शुरू की।
मार्च से सितंबर 2026 : डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे, पोलैंड और स्वीडन फ्रांस की ‘फॉरवर्ड डेटरेंस स्कीम’ में शामिल होने पर सहमत हुए। इसके तहत वे फ्रांसीसी परमाणु हथियारों को अपने यहां रखेंगे। इसके साथ ही फ्रांसीसी परमाणु अभ्यासों में हिस्सा लेंगे।
14 सितंबर 2026 : पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कलिनिनग्राद सीमा पर ‘आक्रामक’ NATO एक्सरसाइज की मांग की, ताकि मॉस्को को ‘इस बात को लेकर अनिश्चित’ रखा जा सके कि ‘हम क्या करेंगे’।
21 सितंबर: ब्रिटेन के स्काई न्यूज ने ‘द वॉरगेम’ (The Wargame) में कैलिनिनग्राद पर संभावित हमले पर चर्चा की। यह रूस के साथ परमाणु युद्ध का सिमुलेशन करने वाला एक रियलिटी शो है।