कभी आपने लंबी दूरी की बस में सफर किया है? दिन हो या रात, अंदर ड्राइवर के बगल वाली सीट पर एक ड्राइवर सोता हुआ या आराम करता हुआ मिल जाता है। फिर आप सो जाते हैं तो पता चलता है कि वही अब ड्राइवर सीट पर है जो पहले बस चला रहा था वो उस एक्स्ट्रा सीट पर आराम कर रहा है।
अब दुबई से तेल अवीव के लिए उड़े उस प्लेन पर चलते हैं, जिसमें भारतीय पायलट पर हमला हुआ था।
उस दिन फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 में दो एक्स्ट्रा पायलट बैठे हुए थे। जब एक को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया, तो प्लेन में मौजूद दो पायलटों ने विमान का कंट्रोल संभाला। इसके बाद बोइंग 737 मैक्स 8 जेट को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित लैंड कराया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि उस प्लेन में इतने एक्स्ट्रा पायलट क्यों बैठे थे?
मामला रूट में बदलाव का था
'द यरूशलम पोस्ट' ने मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया है कि फ्लाइट में अतिरिक्त पायलट इसलिए बैठे थे क्योंकि रूट में संभावित बदलाव से यात्रा का समय काफी बढ़ सकता था। ऐसे में मूल क्रू-मेंबर्स की ड्यूटी का समय तय सीमा से अधिक हो सकता था। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि उनकी मौजूदगी का संबंध सुरक्षा से जुड़ी किसी पहले से मिली चेतावनी से नहीं था।
एयरलाइंस में 'डेडहेडिंग' समझिए
आमतौर पर, एयरलाइंस कम दूरी की फ्लाइट्स में सिर्फ सावधानी के तौर पर बैकअप फ्लाइट क्रू नहीं रखतीं, क्योंकि दो सेट पायलटों को पेमेंट करना महंगा पड़ता है। एक्स्ट्रा पायलट अक्सर उन फ्लाइट्स में यात्रा करते हैं जिन्हें वे खुद ऑपरेट नहीं कर रहे होते हैं। इस प्रैक्टिस को ही इंडस्ट्री की भाषा में 'डेडहेडिंग' कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता है ताकि वे (एक्स्ट्रा पायलट) उस जगह पहुंच सकें, जहां उन्हें अगली बार फ्लाइट ऑपरेट करना हो।
एक बयान में, फ्लाईदुबई ने कन्फर्म किया कि प्लेन में यात्रा कर रहे फ्लाईदुबई के ऑन-ड्यूटी क्रू ने विमान को सुरक्षित उतार लिया। चूंकि डेडहेडिंग पायलट कंपनी के काम पर होते हैं, इसलिए उन्हें तकनीकी रूप से ड्यूटी पर माना जाता है। इसके लिए उन्हें पेमेंट मिलता है। हालांकि, उन्हें शराब पीने की मनाही होती है। ऐसे पायलटों के लिए यूनिफॉर्म पहनना जरूरी नहीं है।
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फ्लाइट में क्यों होते हैं एक्स्ट्रा पायलट?
एविएशन इंडस्ट्रीज एक्सपर्ट्स के अनुसार, संभव है कि एक्स्ट्रा पायलटों को उस जगह भेजा जा रहा हो जहां उन्हें अपनी अगली तय फ्लाइट के लिए पहुंचना हो। इंटरनेशनल एयरलाइंस अपने पायलटों को दुनियाभर में भेजती रहती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक और संभावना यह है कि फ्लाईदुबई को दुबई वापसी की फ्लाइट के लिए दूसरे क्रू की जरूरत थी, क्योंकि ऑपरेटिंग क्रू की कानूनी ड्यूटी की सीमा पूरी हो गई होगी और उन्हें जरूरी आराम की जरूरत होगी।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में पायलट पर अटैक
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में सिक्योरिटी का एक गंभीर मामला सामने आया था। आरोप है कि ओमान के एक को-पायलट ने विमान को गिराने की मंशा से कमांडर पर चाकू से हमला किया। इस हाथापाई के कारण विमान तेजी से नीचे गिरने लगा।
हाईजैकिंग का सिग्नल भेजे जाने से पहले ही दो मिनट के भीतर लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, कैप्टन स्मित मच्छार ने हमलावर का डटकर मुकाबला किया और किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया।
इसके बाद फ्लाइट क्रू के सदस्यों और यात्रियों ने फ्लाइट डेक में घुसकर हमलावर को काबू करने में मदद की। इससे क्रू प्लेन पर दोबारा कंट्रोल पाने में सफल रहा। इसके बाद विमान सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से उतरा। इसके बाद सभी 180 लोग बिना किसी चोट के सुरक्षित प्लेन से बाहर निकल पाए।