वो रूसी विद्वान जिसके दिल में बस गईं हिंदी कविताएं और भारतीय साहित्य

ये कहानी है रूसी विद्वान येवगेनी पेत्रोविच चेलिशेव की, जिन्होंने हिंदी साहित्य के महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला को पढ़ा, उनकी कविताओं को महसूस किया और उनके बारे में ऐसा लिखा, मानो वो रूस में नहीं बल्कि हिंदी साहित्य की छत्रछाया में बड़े हुए हों। स्वामी विवेकानंद ने उन्हें इस कदर प्रभावित किया कि भारत आकर जब वह कन्याकुमारी पहुंचे तो उस चट्टान तक जाने के लिए नाव का इंतजार नहीं किया, जहां विवेकानंद ने विदेश जाने से पहले वक्त बिताया था। चेलिशेव समुद्र में तैरकर ही उस चट्टान तक पहुंच गए। देखिए, चेलिशेव से जुड़े ऐसे ही रोचक किस्से।