हिमालयी क्षेत्रों में मॉनसून और भौगोलिक अस्थिरता के कारण फ्लैश फ्लड, भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है। हाल ही में नेपाल के गोरखा में भूस्खलन से बूढ़ी गंडकी नदी का रास्ता रुकने फिर प्राकृतिक अवरोध टूटने से भीषण तबाही मची। मौसम वैज्ञानिक और लद्दाख IMD के प्रमुख सोनम लोटस के मुताबिक, ऐसी आपदाएं केवल भारी बारिश से नहीं, बल्कि कमजोर ढलानों, नदी के मार्ग में रुकावट और एवलांच जैसी कई वजहों से आती हैं। ग्लेशियर झील फटने (GLOF) जैसी घटनाओं में संभलने के लिए 15 से 30 मिनट का समय ही मिलता है, वहीं नदी की बाढ़ में 1-2 दिन का लीड टाइम मिल सकता है। इनसे निपटने के लिए छोटी नदियों की निरंतर निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम और मजबूत स्थानीय तैयारी बेहद जरूरी है।
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