दिल्ली से लंदन वाया शिनजियांग! पाक ने रोका तो भारत ने चीन वाला छोटा हवाई रास्ता खोजा

चीन से गुजरने वाले संभावित एयर कॉरिडोर पर बात चल रही है। यह भारत से यूरोप और नॉर्थ अमेरिका जाने वाली उड़ानों के लिए कैसे एक नया विकल्प बन सकता है? समझिए, अभी के लंबे रूट से क्या बदल सकता है और फ्लाइट टाइम, कॉस्ट पर कितना असर पड़ेगा।

दुनिया के नक्शे पर भारत से यूरोप तक जाने वाली उड़ानों के कई रास्ते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से इनमें से एक रास्ता भारतीय एयरलाइन्स के लिए उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अब नजरें एक नए आसमानी रास्ते पर हैं- चीन से होकर गुजरने वाले संभावित एयर कॉरिडोर पर। अगर यह रास्ता खुलता है, तो भारत को पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों के लिए पाकिस्तान के एयरस्पेस पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।

यानी पाकिस्तान को बायपास करते हुए… ‘टाटा-बाय-बाय कर’ एक नया विकल्प और साथ ही लंबे वैकल्पिक रास्ते की वजह से बढ़ रहे फ्लाइट टाइम और फ्यूल कॉस्ट को कम करने की संभावना।

ये नया विकल्प बन सकता है- चीन के शिनजियांग (शिनजियांग) के होतान (होतान) इलाके से होकर उड़ने वाला संभावित एयर कॉरिडोर (air corridor)। भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया है कि भारत और चीन के बीच होतान को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी रूट को लेकर कोई फाइनल अग्रीमेंट या क्लीयरेंस नहीं हुआ है। गौर करने वाली बात यह है कि हाल के समय में भारत और चीन करीब आए हैं, भारत की मेजबानी में हुए BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नई दिल्ली आने से ठीक पहले चीन के ग्वांगझू से नई दिल्ली तक डायरेक्ट फ्लाइट (Guangzhou-New Delhi direct flight) फिर शुरू की है। और अब दोस्ती का एक और नया रूट तैयार होता दिख रहा है।

होतान कहां है और किस रूट पर बात हो रही?

भारत चीन के शिनजियांग क्षेत्र के होतान इलाके से होकर एक संभावित एयर कॉरिडोर तलाश रहा है। इस बातचीत में विदेश मंत्रालय भी शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो दिल्ली और मुंबई से वेस्टबाउंड फ्लाइट्स ( westbound फ्लाइट्स ) यानी पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानें को लेह की दिशा से ले जाकर होतान के पास चीनी एयरस्पेस में प्रवेश कराया जा सकता है। इसके बाद रूट किर्गिजस्तान (Kyrgyzstan) की ओर बढ़ते हुए यूरोप, UK और नॉर्थ अमेरिका के पुराने रूट्स से जुड़ सकता है। फिलहाल, यह प्रस्तावित रूट है। 

आखिर चीन के रास्ते की जरूरत क्यों पड़ी?

इसकी शुरुआत 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव से हुई। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के एयरक्राफ्ट के लिए पाबंदियां लगाईं। भारत ने 30 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान द्वारा संचालित, उसके स्वामित्व वाले या लीज पर लिए गए विमान के लिए भी इंडियन एयरस्पेस में एंट्री की पाबंदियां लागू की थीं।

इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव हुआ और पाकिस्तान की ओर से भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस की पाबंदियां लगातार जारी रही। क्योंकि पाकिस्तान का एयरस्पेस भारतीय विमानों के लिए बंद है।

पाकिस्तान ने भारतीय विमान पर अपनी एयरस्पेस पाबंदियों को अब 24 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया है। इन पाबंदियों का सीधा असर उन फ्लाइट्स पर पड़ा है जो भारत से पश्चिम की तरफ जाती हैं।

पहले उत्तर भारत से यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स पाकिस्तान के ऊपर से सीधे रूट ले सकती थीं। अब उन्हें पाकिस्तान से बचने के लिए ज्यादा दक्षिण की ओर जाना पड़ रहा है।

अभी कौन-सा रास्ता खुला है?

इसे एक उदाहरण से समझिए- दिल्ली से लंदन वाली फ्लाइट

पहले:
दिल्ली (भारत) → लाहौर (पाकिस्तान) → अफगानिस्तान→ मध्य एशिया → लंदन (यूरोप) 

अभी:

दिल्ली → अहमदाबाद→ अरब सागर → मीडिल ईस्ट (ओमान के पास) → लंदन (यूरोप)

यानी पाकिस्तान को अवॉयड करने के लिए विमान को ज्यादा लंबा रूट लेना पड़ रहा है।

उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत से चलने वाली कुछ फ्लाइट्स अभी L639 रूट का इस्तेमाल कर रही हैं। जो भारत से पश्चिम की ओर अरब सागर की तरफ ले जाते हैं और आगे अंतराष्ट्रिय रूट्स से कनेक्ट होते हैं।

इससे फ्लाइट टाइम सेक्टर (Flight Time Sector) मतलब किसी खास उड़ान रूट पर लगने वाले उड़ान समय के हिसाब से करीब 45 मिनट से 2 घंटे तक बढ़ा है।

इसका मतलब ज्यादा फ्लाइंग टाइम यानी ज्यादा फ्यूल की खपत और एयरलाइन्स के लिए ज्यादा ऑपरेशनल कॉस्ट।

फिर चीन-होतान रूट से क्या बदलेगा?

प्रस्तावित रूट कुछ इस तरह हो सकता है—

दिल्ली→ लेह (भारत) → होतान (चीन) → किर्गिजस्तान → लंदन (यूरोप) 

यानी विमान पाकिस्तान की तरफ जाने के बजाय उत्तर की ओर जाकर चीनी एयरस्पेस का इस्तेमाल कर सकता है और फिर सेंट्रल एशिया  के पुराने रूट्स से जुड़ सकता है।

यही वजह है कि होतान को एक संभावित वैकल्पिक एयर कॉरिडोर (potential alternative corridor) के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे हर फ्लाइट कितने मिनट बचाएगी या एयरलाइन की कॉस्ट कितनी कम होगी।

तीनों रूट्स को ऐसे समझिए- 

पुराना रूट-

दिल्ली (भारत) → लाहौर (पाकिस्तान) → अफगानिस्तान→ मध्य एशिया → लंदन (यूरोप) 

वर्तमान रूट-

दिल्ली → अहमदाबाद→ अरब सागर → मीडिल ईस्ट (ओमान के पास) → लंदन (यूरोप)

प्रस्तावित रूट-

दिल्ली→ लेह (भारत) → होतान (चीन) → किर्गिजस्तान → लंदन (यूरोप)

एयरलाइन्स और पैसेंजर्स पर क्या असर?

सबसे बड़ा असर उन लॉन्ग-हॉल फ्लाइट्स पर है, जो दिल्ली और मुंबई जैसे हब से यूरोप और नार्थ अमेरिका जाती हैं।

लंबे रूट का मतलब है- 

Air India के तत्कालीन CEO Campbell Wilson ने 2025 में पाकिस्तान एयरस्पेस क्लोजर से एयरलाइन को करीब ₹4,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान बताया था। 

पैसेंजर्स के लिए भी लंबी उड़ान का असर टिकट के दाम पर पड़ सकता है, लेकिन अतिरिक्त कॉस्ट का कितना हिस्सा किराये में जाएगा, यह एयरलाइन और बाजार के हालात पर निर्भर करता है।

पाकिस्तान को भी तगड़ा नुकसान

भारतीय विमान के उसके एयरस्पेस  से गुजरने पर पाकिस्तान को overflight fees यानी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की फीस मिलती थी। भारतीय विमान के लिए पाबंदियों के बाद यह रेवेन्यू भी प्रभावित हुआ। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2025 के बीच भारतीय विमान पाबंदी की वजह से करीब PKR 4.1 billion यानी लगभग ₹142 करोड़ के विमानों से मिलने वाली फीस की कमाई में कमी की बात सामने आई थी। 

यानी इस एयरस्पेस स्टैन्डॉफ का असर दोनों तरफ एविएशन इकोनॉमिक्स पर पड़ रहा है- भारत में एयरलाइन्स को लंबे रूट्स का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पाकिस्तान भारतीय विमानों से होने वाली कमाई से वंचित हो रहा है।

अब नजर चीन पर

होतान कॉरिडोर की बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत-चीन के बीच डायरेक्ट एयर कनेक्टिविटी भी धीरे-धीरे बहाल हो रही है। चीन साउथर्न एयरलाइन्स ने छह साल बाद 21 सितंबर से ग्वांगझू-नई दिल्ली डायरेक्ट फ्लाइट (Guangzhou-New Delhi direct flight) फिर शुरू की है।

अब नजर इस बात पर है कि क्या चीन भारतीय एयरलाइन्स को शिनजियांग के ऊपर से वेस्टबाउंड एयर कॉरिडोर इस्तेमाल करने की अनुमति देता है। अगर बातचीत सफल रहती है और होतान रूट को मंजूरी मिलती है, तो पाकिस्तान के बंद एयरस्पेस के बीच भारतीय एविएशन को एक नया और वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। फिलहाल बातचीत जारी है- और उम्मीद है कि जल्द ही यह संभावित एयर कॉरिडोर कागज से निकलकर आसमान में नजर आए।