भारत और रूस की दोस्ती सिर्फ हथियारों, तेल और परमाणु ऊर्जा तक सीमित नहीं है। इस रिश्ते की जड़ें रूसी साहित्य, भारतीय दर्शन और दोनों देशों के लोगों की साझा संवेदनाओं में भी मिलती हैं। महात्मा गांधी और लियो टॉल्स्टॉय के बीच पत्राचार से लेकर रूसी लेखकों की कहानियों तक, दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव की एक लंबी विरासत रही है।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पोस्टग्रेजुएट छात्रा सारिका कुमारी इसी सांस्कृतिक रिश्ते को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। बिहार के पश्चिम चंपारण की रहने वाली सारिका ने रूसी भाषा, साहित्य और संस्कृति से भारतीय युवाओं को जोड़ने के लिए 'Soul of Russia and India' नाम से एक डिजिटल प्रोजेक्ट तैयार किया है। इसमें पुश्किन, चेखव और गोगोल की रचनाओं के साथ रूसी संगीत और सांस्कृतिक विरासत को जानने का मौका मिलता है। अक्टूबर 2026 उनके इस प्रोजेक्ट को मॉस्को में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और 100 फाइनलिस्ट में शामिल एकमात्र भारतीय प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया। सरिका ने 'यूरेशिया' अवॉर्ड में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले की रहने वाली सारिका से RT हिंदी ने बात की। बातचीत में सारिका ने बताया कि इस पहल का विचार कैसे आया, उनकी वेबसाइट में क्या खास है और वह इसके जरिए भारत-रूस के रिश्तों को किस तरह मजबूत करना चाहती हैं।
रूसी लेखकों की कहानियों ने जगाई दिलचस्पी
सारिका ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से रूसी भाषा में बीए (ऑनर्स) पूरा किया है और फिलहाल इसी विषय में मास्टर्स कर रही हैं। उनके मुताबिक, रूसी भाषा की ओर उनका रुझान इतिहास से शुरू हुआ। भारत की आजादी के बाद सोवियत संघ ने देश के औद्योगिक, वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दोनों देशों के बीच इस ऐतिहासिक जुड़ाव ने उन्हें रूस के बारे में और जानने के लिए प्रेरित किया।
फिर रूसी साहित्य ने इस दिलचस्पी को एक नया रास्ता दिया। सारिका बताती हैं कि उन्होंने हिंदी में अलेक्जेंडर पुश्किन, एंतोन चेखव और निकोलाई गोगोल की रचनाएं पढ़ीं। 'स्टेशन मास्टर', 'एक क्लर्क की मौत' और 'ओवरकोट' जैसी कहानियों ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उनके मन में इन रचनाओं को मूल रूसी भाषा में पढ़ने की इच्छा पैदा हुई।
यहीं से रूसी भाषा और साहित्य के प्रति उनका लगाव और गहरा होता गया। सारिका अपने सफर में परिवार के सहयोग को भी अहम मानती हैं। उनके लिए भाषा सीखना सिर्फ पढ़ाई का विषय नहीं रहा, बल्कि एक दूसरे देश के इतिहास, समाज और लोगों को समझने का जरिया बन गया।
एक ही जगह सीख सकते हैं भाषा और संस्कृति
रूस के बारे में भारतीय युवाओं की जानकारी अक्सर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और भारत-रूस सहयोग तक सीमित रह जाती है। सारिका ने महसूस किया कि वहां के साहित्य, संगीत, आम लोगों के जीवन और सांस्कृतिक विविधता को जानने के अवसर भी होने चाहिए। इसी सोच से 'Soul of Russia and India' की शुरुआत हुई।
उनकी वेबसाइट soulindorus.site पर रूसी भाषा सीखने के लिए फ्री कंटेट, रूसी लेखकों की कहानियां, क्विज और भारत-रूस की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्थलों को दर्शाने वाला इंटरैक्टिव मैप उपलब्ध है। वेबसाइट अंग्रेजी, रूसी और हिंदी तीनों भाषाओं में है।
सारिका के मुताबिक, इसकी खासियत यह है कि भाषा सीखने, साहित्य पढ़ने, सांस्कृतिक विरासत जानने और अपनी जानकारी परखने के लिए अलग-अलग मंचों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इन सभी चीजों को एक ही जगह लाने की कोशिश की गई है। इसका कंटेंट भारतीय विद्यार्थियों और पाठकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
यह प्रोजेक्ट उनके वीडियो, गीतों, कविताओं और रूसी हाउस के आयोजनों से भी जुड़ा है। इस तरह वेबसाइट केवल शब्द और व्याकरण सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि रूसी संस्कृति से परिचित होने का एक व्यापक मंच बनने की कोशिश करती है।
टॉल्स्टॉय और गांधी से लेकर साहित्य की साझा संवेदनाओं तक
भारत और रूस की संस्कृतियां अलग-अलग ऐतिहासिक और सामाजिक परिस्थितियों में विकसित हुई हैं, लेकिन सारिका को इनके बीच कई दिलचस्प समानताएं दिखाई देती हैं। परिवार, बड़ों का सम्मान, मेहमाननवाजी और साहित्य-संगीत के प्रति लगाव उन्हें दोनों समाजों को जोड़ने वाले पहलू लगते हैं।
वह महात्मा गांधी और रूसी लेखक लियो टॉल्स्टॉय के बीच हुए पत्राचार को भी दोनों देशों के बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण उदाहरण मानती हैं।
सारिका कहती हैं कि रूसी साहित्य ने उन्हें मानवीय संवेदनाओं, अंतरात्मा और सही-गलत के चुनाव जैसे विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की ‘अपराध और दंड’ और गोगोल की ‘ओवरकोट’ जैसी रचनाएं उनके लिए खास हैं। उनके मुताबिक, भाषा भले अलग हो, लेकिन इंसानी भावनाएं, रिश्ते और अनुभव अक्सर एक-दूसरे से मेल खाते हैं।
यही सोच उनके प्रोजेक्ट का आधार भी है। वह चाहती हैं कि भारतीय युवा रूस को किसी बनी-बनाई छवि के बजाय उसकी भाषा, साहित्य, इतिहास और लोगों के अनुभवों के जरिए समझें।
कूटनीति से आगे, युवाओं की दोस्ती तक
भारत और रूस लंबे समय से साझेदार रहे हैं, लेकिन सारिका मानती हैं कि इस साझेदारी को केवल राजनीतिक और आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे आम लोगों, खासकर युवाओं के बीच दोस्ती और आपसी समझ में भी बदलना जरूरी है।
वह अपने प्रोजेक्ट को ‘जन-कूटनीति’ (People-to-People Diplomacy) का एक माध्यम मानती हैं। यानी ऐसा संवाद, जिसमें लोग एक-दूसरे के देश को सीधे उसकी भाषा और संस्कृति के जरिए जानें, न कि केवल खबरों या प्रचलित धारणाओं के आधार पर।
सारिका का प्लान वेबसाइट का नया एडिशन विकसित करने, ‘रूस: क्षेत्र और लोग’ नाम से वीडियो सीरीज शुरू करने और भारत में रूसी भाषा सीखने वालों के लिए ‘Говорим по-русски’ (रूसी बोलते हैं) नाम का क्लब बनाने की है। वह कविता, गीत और फोटोग्राफी की प्रतियोगिताओं के जरिए भी दोनों देशों के युवाओं को अपनी क्रिएटिविटी शेयर करने का मौका देना चाहती हैं।
उनका मानना है कि ऐसे मंच भविष्य में भारतीय और रूसी विद्यार्थियों के बीच संवाद, शैक्षणिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
मॉस्को में अपने प्रोजेक्ट को पेश करने का मौका
सारिका के इस प्रयास को अक्टूबर 2026 में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। उन्हें ईमेल के जरिए जानकारी मिली कि उनका प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय Eurasia Award के फाइनलिस्टों में चुना गया है। इसके बाद उन्हें मॉस्को बुलाया गया, जहां जूरी के सामने अपने प्रोजेक्ट की प्रस्तुति देनी थी और सवालों के जवाब देने थे।
14 अक्टूबर को उन्होंने जूरी के सामने ‘Soul of Russia and India’ के उद्देश्य, उसकी खासियतों और भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में इसकी भूमिका के बारे में बताया। अगले दिन, 15 अक्टूबर को मॉस्को के नेशनल सेंटर ऑफ रशिया में पुरस्कार समारोह आयोजित हुआ।
सारिका के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने विचार शेयर करना उनके लिए सीखने का महत्वपूर्ण अनुभव था। जब उन्हें जूरी के फैसले के अनुसार दूसरा पुरस्कार मिलने की जानकारी मिली, तो वह खुशी से फूली नहीं समाई।
100 फाइनलिस्ट में एकमात्र भारतीय प्रोजेक्ट
इस समारोह में रूस के राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दिमित्री पेसकोव मौजूद थे। पुरस्कार मार्गरीटा सिमोन्यान (Margarita Simonyan) ने प्रदान किया, जो RT और Rossiya Segodnya मीडिया समूह की चीफ संपादक हैं। समारोह में विभिन्न देशों की सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक पहलों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
सारिका के प्रोजेक्ट को दुनिया भर से चुने गए 100 फाइनलिस्ट में एकमात्र भारतीय प्रोजेक्ट बताया गया। उनके लिए यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और भारत-रूस मित्रता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने रखने का अवसर भी था।
वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, मित्र रितिक और भाइयों यश, गौरव एवं सागर के सहयोग को भी देती हैं। उनके मुताबिक, किसी भी उपलब्धि के पीछे उस व्यक्ति की मेहनत के साथ उन लोगों का विश्वास भी होता है, जो उसके सफर में साथ खड़े रहते हैं।
भविष्य में प्रोफेसर बनने का सपना
आगे की योजनाओं के बारे में बात करते हुए सारिका बताती हैं कि वह अपनी वेबसाइट को भारतीय और रूसी विद्यार्थियों के बीच संवाद का प्रभावी मंच बनाना चाहती हैं। उनकी इच्छा है कि भविष्य में इसके जरिए छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और सांस्कृतिक सहयोग के अवसर विकसित हों।
व्यक्तिगत तौर पर वह रूसी भाषा की टीचर या प्रोफेसर बनना चाहती हैं। साथ ही, रूसी भाषा, साहित्य और संस्कृति पर उपयोगी कंटेंट तैयार करने और अपनी वेबसाइट को आगे बढ़ाने का काम जारी रखना चाहती हैं।
उनका सपना है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय युवा रूसी भाषा सीखें, रूस की सांस्कृतिक विविधता को समझें और दोनों देशों के बीच दोस्ती के नए रास्ते बनाएं।
आखिरकार, किसी देश को जानने के लिए हमेशा हजारों किलोमीटर की यात्रा करना जरूरी नहीं। कभी किसी लेखक की कहानी, किसी गीत की धुन या किसी अनजान भाषा का पहला शब्द भी दो देशों के बीच दूरी कम करने की शुरुआत बन सकता है। सारिका का ‘Soul of Russia and India’ इसी संभावना को एक डिजिटल मंच पर साकार करने की कोशिश है।