पिछले कुछ घंटों में अफ्रीका से उड़कर कई प्लेन मॉस्को में उतरे हैं। राष्ट्राध्यक्षों को एयरपोर्ट पर ही पारंपरिक केक और चाय परोसी जा रही है। एक डिजाइनर प्लेन की काफी चर्चा है। उससे इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति आए हैं। पहले इनके प्लेन और स्वागत का वीडियो देखिए, फिर समझते हैं कि मॉस्को में अफ्रीकी देशों के नेताओं की महाजुटान क्यों हो रही है?
इसका उद्देश्य एक ऐसी नई और बेहतर साझेदारी कायम करना है, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो और 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना कर सके। इस समिट का लक्ष्य राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति और मानवीय मामलों जैसे सभी क्षेत्रों में रूस और अफ्रीकी देशों के बीच व्यापक और समान सहयोग को मजबूत करना है। आइए समझते हैं यह सम्मेलन क्यों खास है?
1. मॉस्को में किन-किन देशों के नेता जुट रहे?
रूस ने अफ्रीकी देशों के सभी राष्ट्राध्यक्षों और क्षेत्रीय संगठनों के नेताओं को आमंत्रित किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि मॉस्को में हो रहे रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन में 48 देशों ने शामिल होने की पुष्टि की है। इसमें से 22 देशों का प्रतिनिधित्व सर्वोच्च स्तर पर होगा।
वहीं, दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व उच्च-स्तरीय अधिकारी, मंत्री या दूसरे प्रतिनिधि करेंगे। पिछले शिखर सम्मेलन में भी इस महाद्वीप के 48 देशों ने हिस्सा लिया था, जिनमें 17 राष्ट्राध्यक्ष शामिल थे।
समिट के लिए जिम्बाब्वे, माली, कांगो, साउथ सूडान, लीबिया, मोजांबिक, सेनेगल, घाना के राष्ट्राध्यक्ष से लेकर प्रतिनिधि मॉस्को पहुंच चुके हैं। समिट में केन्या, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नामीबिया और यूगांडा के राष्ट्रपति भी शामिल होंगे। चुनाव के कारण दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा इस समिट के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे। उनके प्रतिनिधि इस समिट में शामिल होंगे।
2. रूस-अफ्रीका समिट 2026 का एजेंडा क्या है?
इस प्लेटफॉर्म में संप्रभुता का विषय केंद्र में है। इसमें डेवलपमेंट फाइनेंसिंग, फूड सिक्योरिटी और टेक्निकल इंडिपेंडेंस पर सेशन शामिल हैं। चर्चाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन और पेमेंट मेकेनिज्म पर बात होगी। इसका उद्देश्य डॉलर और यूरो पर निर्भरता कम करना है।
प्रतिभागी ब्रिक्स (BRICS) और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ संबंधों को और मजबूत करने पर भी विचार करेंगे। इसमें व्यापार में रुकावट डालने वाली बाधाओं का आकलन करना शामिल है।
रूस-अफ्रीका संबंधों में कृषि एक अहम क्षेत्र है। इस फोरम में फर्टिलाइजर सप्लाई, कृषि मशीनरी, लोकल प्रोडक्शन और फूड ट्रेड के सामने आने वाली वित्तीय और लॉजिस्टिक दिक्कतों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
शांतिपूर्ण न्यूक्लियर एनर्जी एक और प्राथमिकता है। रोसाटॉम मिस्र के अल-दबा न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट में चार रिएक्टर बना रहा है। साथ ही, इसने इथियोपिया और रवांडा में प्रस्तावित न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए रोडमैप पर हस्ताक्षर किए हैं।
रवांडा के साथ इसके सहयोग में एक न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर का प्रस्ताव भी शामिल है। इसका उपयोग रिसर्च, एक्सपर्ट ट्रेनिंग, मेडिकल, कृषि व उद्योग के क्षेत्रों में किया जाएगा।
अफ्रीका की ऑनलाइन अर्थव्यवस्था के विस्तार के बीच डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भी चर्चा होगी। GSMA के 2025 के आकलन के अनुसार, इस महाद्वीप में मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 41.6 करोड़ है। इसके 2030 तक 57.6 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
अफ्रीकी कंपनियों के पास फिनटेक में भी अच्छी विशेषज्ञता है। केन्या की सफारीकॉम ने बताया कि उसकी 'एम-पेसा' (M-PESA) मोबाइल मनी सेवा के ग्राहकों की संख्या मार्च 2026 तक 4 करोड़ तक पहुंच गई। दूसरे सेशन्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थ सर्विस और अफ्रीकी एक्सपर्ट्स को ट्रेनिंग देने जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
3. यह समिट क्यों महत्वपूर्ण है?
अफ्रीकी प्राथमिकताओं में अपने ही देश में संसाधनों का ज्यादा प्रोसेसिंग करना, एनर्जी और तकनीकी क्षमता का निर्माण करना, और अपनी शर्तों पर साझेदारियों में विविधता लाना शामिल है। पश्चिमी सरकारों के साथ विवादों ने संप्रभुता पर जोर को और मजबूत किया है।
सितंबर में, दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की उन वीजा पाबंदियों को चुनौती दी, जो वॉशिंगटन की तरफ से दक्षिण अफ्रीका की घरेलू नीतियों की आलोचना से जुड़ी थीं। मंत्रालय ने कहा, 'सदियों से चले आ रहे नस्लीय भेदभाव को लेकर देश की चिंताओं को दूर करने के लिए कानून बनाना हमारा संप्रभु अधिकार है।'
यह शिखर सम्मेलन लगातार चल रहे राजनयिक जुड़ाव का ही एक हिस्सा है। 2022 से, लावरोव ने इस महाद्वीप के कई देशों का दौरा किया है। इसमें मिस्र, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका की बार-बार की गई यात्राएं शामिल हैं। जुलाई 2026 के उनके दौरे में इथियोपिया, नाइजर, मोजाम्बिक और बुरुंडी शामिल थे।
HSE के 'सेंटर फॉर अफ्रीकन स्टडीज' के प्रमुख एक्सपर्ट निकोलाई गोलोव्को के अनुसार, रूस और अफ्रीका के बीच व्यापार 2019 में 16.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 27.1 अरब डॉलर हो गया। इसमें रूस का पलड़ा काफी भारी है। रूस से निर्यात 22.7 अरब डॉलर का रहा, जबकि अफ्रीका से आयात 4.4 अरब डॉलर का था।
4. इस समिट से भविष्य की क्या उम्मीदें हैं?
समिट से एक मुख्य उम्मीद 2027–2029 के लिए रूस-अफ्रीका की एक नया एक्शन प्लान है, जो सेंट पीटर्सबर्ग में अपनाए गए ढांचे की जगह लेगी। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि इसे मॉस्को में होने वाली बैठक में मंजूरी दी जाएगी।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने यह भी कहा है कि अंतर-सरकारी समझौतों और बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट्स का एक बड़ा पैकेज सामने आने की उम्मीद है। राष्ट्रपति पुतिन द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वहीं, विदेश मंत्री लावरोव 28 अक्टूबर को अफ्रीकी विदेश मंत्रियों के लिए एक 'वर्किंग ब्रेकफास्ट' को होस्ट करेंगे।
यह मीटिंग 2023–2026 की एक्शन प्लान के लागू करने की समीक्षा करने का अवसर भी प्रदान करेगी। इसके 181 बिंदुओं में राजनीति और सिक्योरिटी से लेकर कृषि, एनर्जी, ट्रांसपोर्ट, एजुकेशन और इन्वेस्टमेंट जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं।
5. इस समिट की शुरुआत कब हुई थी?
पहला रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन और आर्थिक मंच 23-24 अक्टूबर 2019 को सोची में 'शांति, सुरक्षा और विकास के लिए' विषय के साथ आयोजित किया गया था। आधुनिक रूस में इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाला यह पहला कार्यक्रम था, जो रूस-अफ्रीका संबंधों के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी।