रिश्तों की सड़क पर भारत और रूस की दोस्ती अब लग्जरी कारों के बाजार तक पहुंचने वाली है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पसंदीदा कार बनाने वाली कंपनी Aurus भारतीय बाजार में अपनी कारें बेचने को तैयार है। कंपनी के कमर्शियल डायरेक्टर आरटेम युसुपोव (Artem Yusupov) ने भारत को रूस का दोस्ताना बाजार बताते हुए कहा है कि कंपनी यहां अपनी कारें पहुंचाना चाहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की कुछ ऑटोमोबाइल कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां ऑरुस के साथ सहयोग करना चाहती हैं।
कंपनी की यह योजना ऐसे समय सामने आई है, जब उसने अपनी प्रमुख लग्जरी सेडान ऑरस सीनेट (Aurus Senat) का अपडेटेड मॉडल पेश किया है। इसकी शुरुआती कीमत रूस में 4.85 करोड़ रूबल रखी गई है, जो कि भारतीय मुद्रा में लगभग 5.5 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि, भारत में इसकी लॉन्चिंग, कीमत या बिक्री शुरू होने की तारीख का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है।
पुतिन की कार और भारत आने वाली कार में फर्क है
हां, सबसे पहले यह बात समझना जरूरी है। भारत में संभावित बिक्री की चर्चा का मतलब यह नहीं है कि रूसी राष्ट्रपति वाली स्पेशल कार भारतीय बाजार में बिकने लगेगी। Aurus Senat एक मॉडल कार फैमिली है, जिसके अलग-अलग वर्जन हैं। पुतिन की इस्तेमाल की जाने वाली कार विशेष सुरक्षा इंतजामों से लैस प्रेसिडेंट लिमोजिन है। इसके अलावा, कंपनी आम ग्राहकों के लिए भी सीनेट सेडान बनाती है।
ऑरस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेटेड Senat, Senat Long और Senat Limousine अलग-अलग वर्जन के रूप में लिस्टेड हैं। राष्ट्रपति की लिमोजिन को विशेष रूप से सुरक्षा और सरकारी इस्तेमाल को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है, जबकि सामान्य Senat लग्जरी कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए है।
कंपनी ने 16 अक्टूबर 2026 को अपडेटेड Senat के लिए प्री-बुकिंग शुरू करने की घोषणा की। यह पहले से मौजूद मॉडल का नया वर्जन है, कोई बिल्कुल नया कार मॉडल नहीं। इसके बाहरी डिजाइन और इंटीरियर में बदलाव किए गए हैं। हालांकि, Aurus ने भारत के लिए किसी खास संस्करण की पुष्टि अभी तक नहीं की है। इसलिए फिलहाल इतना कहना सही होगा कि कंपनी भारत में अपनी कारें बेचना चाहती है, लेकिन यहां कौन-सा वर्जन आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
नए ऑरस सीनेट में क्या बदला है?
अपडेटेड सीनेट में आगे और पीछे की लाइटों का डिजाइन बदला गया है। इसमें नई मैट्रिक्स हेडलाइट्स, एलईडी टेललाइट्स, नया फ्रंट ग्रिल और नए डिजाइन के पहिए दिए गए हैं। कार के केबिन में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। नया डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, मल्टीफंक्शन टचस्क्रीन और बदली हुई इंटीरियर डिजाइन इसकी प्रमुख खूबियों में शामिल हैं।
रूस के सरकारी परिवहन मंत्रालय ने अप्रैल 2026 में बताया था कि कंपनी इस अपडेटेड मॉडल के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन की तैयारी कर रही है। इसके बाद जून में सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच पर भी अपडेटेड Senat को दिखाया गया। अक्टूबर में कंपनी ने इसके लिए प्री-बुकिंग शुरू की।
रूस में इसकी शुरुआती कीमत 4.85 करोड़ रूबल है। भारतीय मुद्रा में यह लगभग 5.5 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि भारत में इंपोर्ट ड्यूटी, टैक्स और अन्य खर्चों के कारण इसकी कीमत अलग हो सकती है।
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भारत को दोस्ताना बाजार मानती है कंपनी
ऑरस के कमर्शियल डायरेक्टर आरटेम युसुपोव ने कहा कि आने वाले वर्षों में एक्सपोर्ट कंपनी की तरक्की के लिए अहम होगा। उन्होंने भारत के साथ रूस के अच्छे रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि कंपनी यहां अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है।
उन्होंने बताया कि सहयोग की संभावना सिर्फ कारों की बिक्री तक सीमित नहीं है। भारत की कुछ कंपनियां, खासकर ऑटोमोबाइल के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियां, भी ऑरस के साथ काम करना चाहती हैं। युसुपोव के मुताबिक, अभी इन कंपनियों के नाम नहीं बताए जा सकते, लेकिन सहयोग की दिशा में बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि बातचीत किस चरण में है या कोई समझौता कब तक हो सकता है।
यानी ऑरस भारत में अपनी कारें बेचने के साथ भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं भी तलाश रही है। लेकिन अभी भारत में कारों की बिक्री शुरू होने या किसी कारोबारी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्रपति की कार से लग्जरी ब्रांड तक का सफर
ऑरस की कहानी रूस की अपनी घरेलू लग्जरी कार विकसित करने की महत्वाकांक्षा से जुड़ी है। सोवियत संघ के विघटन के बाद रूसी नेतृत्व विदेशी लग्जरी कारों का इस्तेमाल करता रहा। बाद में रूस ने अपने राष्ट्रपति और शीर्ष अधिकारियों के लिए घरेलू कार विकसित करने की परियोजना शुरू की।
2012 में रूस के सरकारी रिसर्च और इंजीनियरिंग संस्थान NAMI ने Kortezh परियोजना पर काम शुरू किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रपति और शीर्ष अधिकारियों के लिए घरेलू वाहन तैयार करना था। इसी परियोजना से आगे चलकर Aurus ब्रांड की नींव पड़ी।
7 मई 2018 को व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में Aurus Senat Limousine पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दी। उसी साल अगस्त में मॉस्को अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल सैलून में Aurus Senat और Senat Limousine को प्रदर्शित किया गया।
Aurus Senat की पहचान उसके लंबे बोनट, विशाल बॉडी, क्रोम डिजाइन और राष्ट्रपति के लिए तैयार किए गए विशेष सुरक्षा इंतजामों से बनी। पुतिन की लिमोजिन को अक्सर 'चलता-फिरता किला' कहा जाता है। लेकिन कंपनी का लक्ष्य इस पहचान को केवल राष्ट्रपति की कार तक सीमित रखना नहीं है। वह Aurus को एक ऐसे लग्जरी ऑटोमोबाइल ब्रांड के रूप में विकसित करना चाहती है, जो दूसरे बाजारों में भी अपनी जगह बना सके।
भारत में संभावित कारोबार इसी दिशा में एक कदम हो सकता है। अगर कंपनी यहां कारों की बिक्री शुरू करती है, तो उसे रूस के बाहर नए ग्राहक मिल सकते हैं। साथ ही, भारतीय ऑटोमोबाइल कलपुर्जा निर्माताओं के साथ सहयोग की संभावना भी खुल सकती है। फिलहाल यह योजना शुरुआती स्तर पर है, लेकिन Aurus के बयान से साफ है कि कंपनी भारत को अपने भविष्य के कारोबार के लिए अहम बाजारों में देख रही है।