भारत-रूस के बीच कैसे मजबूत हो रहे आर्थिक संबंध, देखिए पूरी तस्वीर

भारत-रूस की दोस्ती की किताब में बिजनेस की कामयाबी के पन्ने लगातार बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते रक्षा और स्पेस से बढ़कर अन्य सेक्टर्स में मजबूत हो रहे हैं।

'भारत एक बहुत बड़ा बाजार है, यहां रूसी बिजनेस के लिए ढेरों अवसर हैं। 2026 के पहले छह महीनों में ही कारोबार 1 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, यानी इसमें तीन गुना वृद्धि हो चुकी है। बिजनेस के मजबूत संबंध दोनों देशों के लिए फायदेमंद होंगे।'

ये कहना है तातारस्तान इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट एजेंसी की चीफ एग्जिक्यूटिव तालिया मिनुलिना का। तालिया ने यह बात रूस के कजान में 'इंडिया-रूस बिजनेस फोरम' के दूसरे एडिशन - 'टाइम: इंडिया - रूस म्यूचुअल एफिशिएंसी' (TIME: India - Russia. Mutual Efficiency) में कही। दो दिन के इस इवेंट का आयोजन भारत के महावाणिज्य दूतावास और तातारस्तान इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट एजेंसी ने मिलकर किया था।

दरअसल पिछले कुछ साल में भारत और रूस के बीच व्यापार संबंधों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच ट्रेड से जुड़े डेटा भी इस बात की पुष्टि करते हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों में इनकी लीडरशिप और बिजनेस फोरम की खास भूमिका रही है।

बिजनेस फोरम इवेंट रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना दोनों नेताओं की प्राथमिकता रही है। दोनों देशों ने 2025 तक द्विपक्षीय निवेश को 50 अरब डॉलर और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024-25 में 68.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 59.863 अरब डॉलर रहा। पिछले साल, भारत से 4.88 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। रूस से 55.369 अरब डॉलर का इंपोर्ट किया गया।

भारत से निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में फार्मास्यूटिकल्स, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, लोहा और इस्पात तथा सी प्रोडक्ट्स शामिल रहे।

वहीं रूस से इंपोर्ट की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट, वनस्पति तेल (विशेष रूप से सूरजमुखी का तेल), फर्टिलाइजर, कोकिंग कोल, कीमती पत्थर और मेटल्स शामिल हैं।

भारत-रूस के बीच बढ़ता व्यापार

द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में लगभग 13 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2022-23 में लगभग 49 अरब अमेरिकी डॉलर (276% की वृद्धि) हो गया। 2023-24 में यह रुझान और मजबूत हुआ, जब द्विपक्षीय व्यापार 65 अरब अमेरिकी डॉलर (32% की वृद्धि) के पार पहुंच गया।

इसका मुख्य कारण रूस से ऊर्जा आयात (मुख्य रूप से कच्चे तेल) में भारी वृद्धि होना है। हालांकि रूस को भारत का निर्यात 35% बढ़ा है। 2021-22 में 3.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2022-23 में 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। हालांकि, रूस से होने वाले इंपोर्ट में भारी वृद्धि के सामने यह बढ़त दब गई है।

रूस में भारतीय निवेश अनुमानित 16 अरब अमेरिकी डॉलर (अनुमानित) है। वहीं, भारत में रूसी निवेश अनुमानित 18 अरब अमेरिकी डॉलर है। इसमें एस्सार समूह के अधिग्रहण के लिए रोसनेफ्ट के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा किया गया 13 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश भी शामिल है।

कैसे बढ़ रहे कारोबारी रिश्ते?

12 अक्टूबर 2026 को, भारतीय दूतावास ने मॉस्को में व्यापारिक संपर्क स्थापित करने के लिए एक भारत-रूस B2B कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें ऊर्जा, बैंकिंग, भर्ती सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा, IT और कृषि-व्यवसाय जैसे क्षेत्रों से दोनों देशों की 120 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया।

इस नेटवर्किंग सत्र में इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO), कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) और इंटरनेशनल ट्रेड, इंडस्ट्रियल एंड एग्रीकल्चरल चैंबर 'मिलेनियल इंडिया' (MIICCIA) के व्यापार प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

मॉस्को चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और स्बेरबैंक (Sberbank) ने भी इस बात पर अपने विचार साझा किए कि भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश और व्यावसायिक साझेदारियों के विकास को कैसे बढ़ावा दिया जाए।

vinay k
दोनों देश व्यापार में विविधता लाने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए मिलकर प्रयास कर रहे हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस रिश्ते पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दे रहे हैं। रूस के तातारस्तान गणराज्य में आयोजित 'कजान फोरम', पिछले महीने नई दिल्ली में हुए 'इनोप्रोम.इंडिया' (INNOPROM.India) ट्रेड फेयर के बाद हो रहा है।
विनय कुमार
विनय कुमार
रूस में भारत के राजदूत

रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने इंजीनियरिंग सामान, मैन्यूफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, पेमेंट सिस्टम, फूड और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्रों में मौजूद अवसरों की जानकारी दी और कारोबारियों को प्रोत्साहित किया कि वे इनका लाभ उठाएं।

बिजनेस हाउसेज से उन्होंने कहा कि वे 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य और 50 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश लक्ष्य को हासिल करने में योगदान दें। इस दौरान, भारत में व्यापार और निवेश के अवसरों के साथ-साथ भारत और रूस के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की गई।

किन मुद्दों पर हुई चर्चा

MSME विकास कोष: 100 अरब रुपये का एक फंड। इसे SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) के पास 'अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड' (AIF) के रूप में रजिस्टर्ड किया गया है। यह फंड विनिर्माण क्षेत्र के छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में दीर्घकालिक पूंजी (patient capital) उपलब्ध कराता है। इसका मुख्य फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों पर है, साथ ही इन उद्यमों को ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ना है।

इंडियन ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स एपेक्स काउंसिल (ITLA): लॉजिस्टिक्स की एकीकृत योजना के लिए भारत की एक नई शीर्ष संस्था। यह राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, विमानन, जलमार्गों और शहरी परिवहन को एक समन्वित प्रणाली के तहत एक साथ लाती है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III (GEC-III): 1.86 ट्रिलियन रुपये का निवेश। इसका उद्देश्य 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी को ग्रिड से जोड़ना और 50 GWh क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तैयार करना है। इससे इंफ्रास्ट्रक्टर, मैन्यूफैक्चरिंग और क्लीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में व्यापक अवसर खुलेंगे।

साल 2000 के बाद संबंधों का नया रूप

भारत और रूस रक्षा, एनर्जी तथा आर्थिक एजेंडे के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं। रूस और भारत लंबे समय से भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। भारत-रूस के बढ़ते संबंध भारत की विदेश नीति पर भी असर डालते हैं। अक्टूबर 2000 में 'भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी घोषणापत्र' पर हस्ताक्षर होने के बाद से, दोनों देशों के संबंधों ने एक नया रूप ले लिया है।

इसमें द्विपक्षीय संबंधों के लगभग सभी क्षेत्रों में सहयोग का स्तर काफी बढ़ा है। दोनों देशों ने राजनीति, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बनाए रखा है। जुलाई 2024 में मॉस्को की अपनी यात्रा के दौरान मोदी ने 2030 तक दोनों देशों के बीच 100 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य तय किया था।

भारतीय मार्केट में रूसी कंपनियों की एंट्री

रूस और अन्य सदस्य देशों को निर्यात बढ़ाने के लिए, भारत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहा है। कजान में रूस में भारतीय राजदूत विनय कुमार ने भरोसा जताया कि भारत और रूस 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल कर लेंगे।

कुमार ने बताया कि इस साल के पहले छह महीनों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 38 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत, रूसी अधिकारियों के साथ मिलकर मानकों से जुड़ी समस्याओं और गैर-शुल्क बाधाओं (non-tariff barriers) को दूर करने पर काम कर रहा है, खासकर कृषि और समुद्री उत्पादों के क्षेत्र में।

इन प्रयासों का उद्देश्य बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना और अधिक भारतीय कंपनियों को रूसी बाजार में प्रवेश करने में सक्षम बनाना है।

putin
मुझे यह देखकर खुशी है कि इस साल हमारे व्यापार कारोबार में बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल इसमें थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है। दोनों देश न्यूक्लियर एनर्जी, हाई-टेक्निक एरिया और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए भी काम कर रहे हैं और इसमें लगातार काफी प्रगति हो रही है।
व्लादिमीर पुतिन, रूसी राष्ट्रपति
व्लादिमीर पुतिन, रूसी राष्ट्रपति
अगस्त 2026 में मॉस्को में जयशंकर से मुलाकात के दौरान

858 करोड़ रुपये की डील

27 मार्च 2026 को, रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद और P8I लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम टोही विमान के डिपो-स्तरीय निरीक्षण के लिए 858 करोड़ रुपये (92.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर) के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए।

28 जनवरी 2026 को, भारत और रूस ने Su-57 लड़ाकू विमानों के जॉइंट प्रोडक्शन की संभावना पर तकनीकी बातचीत शुरू की। यह एडवांस डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन में तेजी का संकेत है, जो दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर सकता है।

भारत-रूस की मजबूत पार्टनरशिप

भारत-रूस पार्टनरशिप मजबूत है। ये पार्टनरशिप भविष्य पर केंद्रित है। दोनों देशों के नेताओं ने रणनीतिक, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग वाले आपसी लाभकारी संबंधों को फिर से दोहरा रहे हैं। ये संबंध संयुक्त पहलों और संस्थागत संवादों पर आधारित हैं, जो लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं।

दोनों देशों ने अपने राजनयिक संबंधों के रिश्तों के पीछे एक साझा रणनीतिक सोच है। द्विपक्षीय सहयोग के अलावा, भारत और रूस ब्रिक्स (BRICS), आरआईसी (RIC), जी20 (G20), ईस्ट एशिया समिट और एससीओ (SCO) जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों के सदस्य हैं। इनमें आपसी महत्व के मुद्दों पर सहयोग करने के अवसर मौजूद हैं।