भारत और रूस के बीच पार्टरनशिप डिफेंस, स्पेस से बढ़कर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के फील्ड में बढ़ रही है। भारत और रूस का तातारस्तान रिपब्लिक जॉइंट डेटा सेंटर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत, भारतीय क्लाउड सेवा प्रदाता 'भारत AI क्लाउड' वहां के IT पार्क के साथ एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहा है। ये योजनाएं गुरुवार को कजान में आयोजित दूसरे रूस-भारत 'TIME' बिजनेस फोरम के दौरान सामने आईं।
रूस के तातारस्तान क्षेत्र के डिजिटल विकास उप-मंत्री बुलात गाबद्रखमानोव ने बताया कि भारत के दक्षिणी राज्य तेलंगाना के एक टेक्नोलॉजी हब ने तातारस्तान में संयुक्त रूप से बुनियादी ढांचा विकसित करने में रुचि दिखाई है।
इस प्रस्तावित साझेदारी से दोनों पक्षों को क्लाउड तकनीकों और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान करने का मौका मिल सकता है। 'भारत AI क्लाउड' - जिसने पहले कजान में एक ऑफिस खोलने की योजना की घोषणा की थी - रूसी मार्केट में भी एंट्री करने की कोशिश कर रहा है।
फोरम में 'चैंबर फॉर इंडो-रशियन टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन' (CIRTC) के निदेशक शुभम सरकार ने कहा कि रूस के पास डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर मौजूद हैं, जबकि भारत का विशाल घरेलू बाजार डिजिटल सेवाओं के विस्तार के अवसर प्रदान करता है।
पिछले साल भी हुआ था एग्रीमेंट
ये चर्चाएं दोनों पक्षों के बीच पहले से चले आ रहे सहयोग को और आगे बढ़ाती हैं। पिछले साल के 'टाइम' (TIME) फोरम में, तातारस्तान के आईटी पार्क ने टेक्निकल पार्टनरशिप, निवेश और मार्केट तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए CIRTC के साथ तीन साल का एग्रीमेंट किया था।
अधिकारियों ने पिछले साल अक्टूबर में भारतीय ऑपरेटर 'CtrlS' के साथ मिलकर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर बनाने की संभावना पर भी चर्चा की थी। तातारस्तान के डिजिटल विकास मंत्रालय के अनुसार, यह प्रस्तावित परियोजना अभी भी विचाराधीन है। इसकी प्रोग्रेस बिजली की लागत, बाजार की मांग और रूस में विस्तार के अवसरों पर निर्भर करेगी।
'डेटा एंबेसी' बनाने पर चर्चा
हाल की बातचीत में एक 'डेटा एंबेसी' (डेटा दूतावास) बनाने की संभावना पर भी चर्चा हुई है। इसमें डेटा संप्रभुता की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाओं के तहत, विदेश में डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना शामिल होगा। सरकार ने इस प्रस्तावित व्यवस्था की तुलना राजनयिक मिशनों (डिप्लोमैटिक मिशन) को मिलने वाली सुरक्षा से की। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से यह प्रोजेक्ट संभव है, हालांकि संप्रभुता और नियमन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में समय लगेगा।
भारत ने अन्य देशों के साथ भी ऐसी ही व्यवस्थाओं पर विचार किया है। जनवरी में, नई दिल्ली और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आपसी सहमति वाली संप्रभुता व्यवस्था के तहत 'डिजिटल एंबेसी' बनाने की संभावना तलाशने पर सहमत हुए थे। दोनों देशों ने डेटा सेंटरों के मामले में सहयोग करने पर भी चर्चा की।
ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर सॉफ्टवेयर तक
भारत और तातारस्तान के बीच चर्चा का दायरा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से आगे बढ़कर हेल्थकेयर, AI, साइबर सुरक्षा और डिजिटल पब्लिक सर्विस तक फैला हुआ है। कजान फोरम में, तातारस्तान आईटी केंद्र के उप महानिदेशक कामिल गजिजोव ने कहा कि रूस अपने इंडियन पार्टनर्स को देश में डेवलप ऑपरेटिंग सिस्टम, ऑफिस सॉफ्टवेयर, ईमेल प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग सेवाएं उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने साइबर सुरक्षा खतरों के खिलाफ दोनों पक्षों के मिलकर काम करने के अवसरों पर भी जोर दिया।
दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूती
कजान में भारत के महावाणिज्य दूत (कॉन्सुल जनरल), जेसुंधर देवीप्रसाद ने कहा कि कजान शहर और तातारस्तान क्षेत्र रूस के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले और सबसे समृद्ध हिस्सों में से एक हैं। यही वजह है कि हम यहां इस शिखर सम्मेलन और बिजनेस फोरम का आयोजन कर रहे हैं।
इसका उद्देश्य भारतीय व्यवसायों को यहां लाना है, ताकि वे अपने रूसी समकक्षों के साथ बातचीत कर सकें। इससे न केवल दोनों देशों के बीच मौजूद संभावनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि हमारे मौजूदा संबंधों को और मजबूत करने में भी मदद मिलेगी। हम यह भी तलाशेंगे कि अपने व्यावसायिक संबंधों को कैसे और मजबूत किया जा सकता है, ताकि इसे केवल राजनीतिक दायरे से आगे बढ़ाकर आर्थिक संबंधों के क्षेत्र में ले जाया जा सके।