आज से 56 साल पहले 1970 में एक फिल्म आई थी- 'पवित्र पापी'। उस फिल्म में किशोर कुमार का एक गाना खूब मशहूर हुआ था,
तेरी दुनिया से होके मजबूर चला...
मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय मजबूर ही तो हैं। मिडिल ईस्ट में खुद टेंशन पैदा की और अब खुद के देश में तेल का संकट हो गया है। ट्रंप के अमेरिका में डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। एक लीटर औसतन $1.64 यानी लगभग 160 रुपये का बिक रहा है।
अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव हैं और सरकार की साख भी बचानी है तो ट्रंप ने फिर यूटर्न मार दिया या कहिए मजबूरी में ऐसा किया। जिस रूस से तेल लेने पर कई देशों पर 100 फीसदी का टैरिफ बम फोड़ा, उसी से डीजल मांग रहे हैं। दो दिन पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमार पुतिन से फोन पर बात की, जन्मदिन की बधाई दी और बातों-बातों में डीजल मांग लिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने इसे डीजल समझौता बताते हुए डील की बात की तो रूस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सोवियत दौर के स्टाइल वाले कई पोस्टर वायरल हो गए। 'पिकाबू' नाम के रूस के मशहूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तंज कसते हुए ‘मॉर्निंग प्रोपेगैंडा’ नाम के एक पोस्ट में इसके कई पोस्टर्स पोस्ट किए। ये वायरल मीम्स के रूप में खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं।
पिकाबू ठीक 'रेडिट' जैसी एक वेबसाइट है, जहां लोग मनोरंजन से जुड़ा कंटेंट बनाते हैं और कहानियां, तस्वीरें व मीम्स शेयर करते हैं। आइए इन मजेदार मीम्स के बारे में आपको बताते हैं।
'रूस नहीं, तुम्हारा दुश्मन ये हरा चूहा है'
इस एक तस्वीर पर गौर कीजिए। ऊपर एक अमेरिकी है तो नीचे डीजल का ड्रम लिए रूसी शख्स मुस्कुरा रहा है। रूस के इस पिकाबू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने तंज कसते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की को भी लपेट लिया। लिखा,
'अमेरिकी नागरिक याद रखो! तुम्हारा दुश्मन रूसी नहीं है। रूसी तो तुम्हें डीजल देता है! तुम्हारा असली दुश्मन वो 'हरा चूहा' है, जो रूस में तुम्हारे डीजल पर बमबारी करता है!'
यह तंज सीधे तौर पर व्लादिमीर जेलेंस्की पर किया गया है, जो हमेशा अपने खास हरे कपड़ों के लिए जाने जाते हैं और जिनके उपनाम (सरनेम) का संबंध भी रूसी और यूक्रेनी भाषा में 'हरे' रंग से है।
'फ्रॉम रशिया विद डीजल'
ट्रंप की इस डीजल डील पर एक और मीम वायरल है। तस्वीर में दो दंपती दिख रहे हैं, एक रूस के हैं तो दूसरे अमेरिका। कैप्शन में लिखा है,
”फ्रॉम रशिया विद डीजल” (रूस की तरफ से डीजल का तोहफा)।
इस पोस्टर में पारंपरिक रूसी पोशाक पहने एक जोड़ा एक अमेरिकी परिवार को ईंधन का ड्रम भेंट करता हुआ नजर आता है।
ये तीसरा वाला मीम तो एक कदम और आगे है
तीसरे पोस्टर में दोनों देशों की इस उभरती दोस्ती को एक कदम और आगे दिखाया गया है। इसमें एक खुशहाल अमेरिकी परिवार दिखाई दे रहा है और दोनों देशों के सैनिक पेट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के सामने खड़े होकर आपस में हाथ मिला रहे हैं।
इसके कैप्शन में लिखा है:
”क्या वो 'हरा चूहा' रूस में हमारे डीजल पर बम बरसा रहा है? तो फिर चलो अपने रूसी दोस्तों को पैट्रियट डिफेंस सिस्टम सौंपते हैं और अपने मूल्यों की रक्षा करते हैं!”
डीजल वाली डील के पीछे की पूरी कहानी जानिए
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी डीजल के निर्यात और बिक्री की अनुमति देने के लिए 7 अप्रैल 2027 तक प्रतिबंधों में अस्थायी छूट को मंजूरी दे दी है।
- शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद, ट्रंप ने घोषणा की कि मॉस्को अमेरिका और वैश्विक बाजारों को तुरंत 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करने के लिए सहमत हो गया है। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और कुछ ही समय बाद अन्य 10 लाख टन डीजल भेजा जाएगा।
- मॉस्को ने भी पुष्टि की है कि वह योजना से पहले ही डीजल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देगा और कहा कि इस कदम से वैश्विक अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।
- इसके अगले दिन, ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि यूक्रेन को अब नए राष्ट्रपति की जरूरत है। ट्रंप ने शनिवार को कहा, “मुझे लगता है कि अब समय आ गया है जब यूक्रेन को एक नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए… मेरा सुझाव है कि वे कोई ऐसा नया नेता चुनें जो समझौता कर सके।”
- उधर मियामी में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर के साथ बातचीत कर रहे यूक्रेनी वार्ताकार तय कार्यक्रम से एक दिन पहले ही बैठक छोड़कर चले गए थे।
क्यों ट्रंप को मांगना पड़ा रूस से डीजल?
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और महंगाई से जनता को राहत देने के लिए रूस से डीजल खरीदने का समझौता करना पड़ा है।
- अमेरिका में डीजल की औसत कीमत लगभग $6.28 प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो सितंबर के अंत में $6.53 के रिकॉर्ड स्तर पर थी।
- अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। चुनावों से ठीक पहले महंगे ईंधन का यह मुद्दा ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया था, जिससे निपटने के लिए उन्हें जल्द से जल्द कीमतें घटाने की जरूरत थी।
- अमेरिका में इस समय डीजल का औसत दाम लगभग 1.64 डॉलर प्रति लीटर है, जो भारतीय मुद्रा के अनुसार करीब 157 रुपये प्रति लीटर बैठता है।
- डीजल महंगा होने का असर सिर्फ पंप तक सीमित नहीं रहता। अमेरिकी किसान इसे मशीनों में इस्तेमाल करते हैं और माल ढुलाई के लिए ट्रक भी इसी पर निर्भर हैं। बाकी अन्य कामों में भी इसका प्रयोग होता है।
- ट्रंप ने रूसी डीजल डील का ऐलान करते हुए यही तर्क दिया था कि ईंधन की कम कीमतें, खासकर किसानों, पशुपालकों और ट्रक चालकों के लिए, उनकी प्राथमिकता है।