चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल धीरज सेठ तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर रूस पहुंचे हैं। 2018 के बाद यह किसी भी इंडियन आर्मी चीफ की पहली रूस यात्रा है। भारत और रूस के डिफेंस रिलेशन कितने मजबूत हैं, इसे ब्रह्मोस से लेकर एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम से समझा जा सकता है। अब दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों के नए दौर में प्रवेश करने की उम्मीद है।
इस दौरे पर जहां एक तरफ दोनों देशों के बीच भारतीय सेना में इस्तेमाल हो रहे रूसी मूल के इक्यूपमेंट्स (जैसे असॉल्ट राइफल, टैंक और एयर डिफेंस सिस्टम) के लिए स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस सपोर्ट समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। वहीं, फ्यूचर वॉरफेयर को देखते हुए जॉइंट स्ट्रैटिजिक मिलिट्री फ्यूचर पर भी चर्चा हो सकती है। इस बात की उम्मीद है कि इस दौरे पर भारत-रूस डिफेंस रिलेशन 2.0 की नई स्क्रिप्ट लिखी जाएगी। इसकी ठोस वजह है दुनिया में मौजूदा समय में मॉर्डन वॉरफेयर पूरी तरह से बदल गया है। ऐसे में भारत के लिए रूस की भूमिका अधिक अहम हो जाती है।
भारत भले ही अपने डिफेंस इक्यूपमेंट्स को बड़े पैमाने पर स्वदेशी बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी पूरी आर्मर्ड कॉर्प्स और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रूसी प्लेटफॉर्म पर ही निर्भर है। रूस ने नए सिस्टम भी पेश किए हैं। इनमें पैंटसिर-S1M एयर डिफेंस सिस्टम और BMP-3 का लेटेस्ट वर्शन शामिल है। इसके अलावा, रूस ने भारत के 'फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल' प्रोग्राम के लिए भी प्रस्ताव दिए हैं।
इसका उद्देश्य आगे चलकर T-72 और T-90 टैंक बेड़े को बदलना है। भारत ने रूस के साथ मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल भी विकसित की है। रूस भारत को Su-57 फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदने का प्रस्ताव दे रहा है। अपनी तीन दिन की यात्रा के दौरान, जनरल सेठ रूसी थल सेना के कमांडर-इन-चीफ, कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसमें पेशेवर मिलिट्री कोऑपरेशन और ट्रेनिंग शामिल हैं।
आर्मी चीफ का दौरा क्यों है खास
आर्मी चीफ की रूस यात्रा पर डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) राज शुक्ला ने कहा कि आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ का यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी तीन वजह है।
पहला हमारा जिस तरह से रूस के साथ संबंध है। रूस हमारा बहुत विश्वनीय साझेदार है। यह संबंध समय के साथ यह साबित हो चुके हैं। यह सिर्फ डिफेंस क्षेत्र ही स्पेस और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से लेकर एडवांस मैटिरियल तक शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत सोवियत संघ समझौते ने 1971 में उस बड़े संकट से पार पाने में मदद की थी। यह हमारे संबंधों का एक पक्ष है।
संबंधों का दूसरा पक्ष है कि इंडियन आर्मी चीफ आर्मर्ड कोर के एक टैंक मैन की तरह होता है। भारत इस समय रूस के साथ सिर्फ टैंक टेक्नोलॉजी, एयर डिफेंस, फायर एंड मैनूवर, आर्मी कोर्सेज शामिल है। लेफ्टिनेंट जनरल(रि.) शुक्ला ने कहा, मुझे याद है कि भारत का मेकेनाइजेशन की ओर बढ़ना असल में पाकिस्तान को एक मजबूत संकेत देने जैसा था।
उन्होंने कहा कि 80 और 90 के दशक में, भारत के साथ न सिर्फ साजो-सामान का लेन-देन था, बल्कि गहरे रणनीतिक और ऑपरेशनल सिद्धांत भी जुड़े हुए थे। टैंक टेक्नोलॉजी, ऑपरेशन की कला, फायर और मूवमेंट (हमले और चाल-ढाल) की पूरी प्रक्रिया और एयर डिफेंस के मामले में, अधिकारियों की एक पूरी पीढ़ी ने वहां ट्रेनिंग ली थी।
उन्होंने कहा कि रूस शाहेद ड्रोन में जेट इंजन फिट करने में माहिर है। टेक्नोलॉजी में बदलाव के बाद इन ड्रोन्स का पता लगाना बहुत मुश्किल है। इसके अलावा कम लागत वाले बैलिस्टिक मिसाइल, ग्लाइड बॉम्ब। लेफ्टिनेंट जनरल (रि)राजीव शुक्ला ने कहा तेजी से स्ट्रैटिजिक ऑटोनमी के लिए हमें पूरी दुनिया के साथ जुड़े रहना होगा लेकिन रूस हमारा बहुत स्थिर पार्टनर रहा है। रूस ने संकट के समय में हमें जो टेक्नोलॉजी दी है, वह किसी ने नहीं किया।
लेफ्टिनेंट जनरल (रि)राजीव शुक्ला ने कहा कि पिछले दो दशक में अमेरिका को इतना तव्वजो देने के बाद भी आज उनके साथ हमारे रक्षा संबंध बिल्कुल आगे नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीसरा कारण जो मैं कहना चाहूंगा कि दुनिया आज नेशनल सिक्योरिटी के दौर से गुजर रही है। इसमें सबसे अधिक गतिविधियां रूस-यूक्रेन में हो रही हैं। इसमें ड्रोन, एआई, बैटल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर शामिल है। ऐसे में उम्मीद है कि जनरल धीरज सेठ इन मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
भारत और रूस की मजबूत डिफेंस पार्टरनशिप
1. ब्रह्मोस मिसाइल : यह इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि भारत और रूस मिलकर क्या बना सकते हैं। दोनों देशों ने मिलकर एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित की है। अब इसका प्रोडक्शन भारत में भी किया जा रहा है।
2. सुखोई Su-30MKI: यह रूसी डिजाइन पर आधारित फाइटर जेट है, लेकिन इसमें भारत की जरूरत के मुताबिक कई बदलाव किए गए हैं। इसका निर्माण भी भारत में होता है और यह भारतीय वायुसेना के प्रमुख फाइटर जेट्स में शामिल है।
3. टी-72 टैंक: भारत ने हाल ही में अपने T-72 बेड़े के लिए नए इंजन खरीदने के लिए लगभग 248 मिलियन डॉलर का एक समझौता किया है। इसलिए, रूस के पुराने प्लेटफॉर्म भी भारत के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
4. एके-203 राइफल्स: ये रूसी-डिजाइन वाली राइफलें हैं, लेकिन भारतीय प्रोडक्शन के बढ़ते स्तर के साथ, इनका निर्माण भारत में किया जा रहा है।
5. INS विक्रमादित्य : यह एयरक्राफ्ट कैरियर मूल रूप से रूस में बनाया गया था। बाद में इसे भारतीय नौसेना के लिए तैयार किया गया। यह भारत के कैरियर बेड़े का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।
6. S-400 : भारत ने 2018 में रूस से पांच सिस्टम का कॉन्ट्रेक्ट किया था। इनकी डिलीवरी नवंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है।
भारत और रूस के बीच का रिश्ता फाइटर जेट, मिसाइल, टैंक, राइफ़ल और एयर डिफेस के मामले में, सिर्फ इक्यूपमेंट खरीदने से कहीं आगे बढ़ गया है। दोनों देशों का रिश्ता मुख्य रूप से खरीदार और विक्रेता के तौर पर शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे जॉइंट डेवलपमेंट, प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी में सहयोग वाले रिश्ते में बदल गया है।
अब नेक्सट जेन वेपन्स पर फोकस
पैंटसिर-S1M: रिपोर्ट के अनुसार रूस ने भारत को यह अपग्रेडेड मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम देने की पेशकश की है।
BMP-3: यह एक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल है, जिसका इस्तेमाल सैनिकों को युद्ध क्षेत्र में ले जाने और उन्हें लड़ाई में मदद देने के लिए किया जाता है। भारत अपनी मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री को आधुनिक बनाने के लिए इस पर विचार कर सकता है।
T-14 Armata: इसे भारत के फ्यूचर के कॉम्बैट व्हीकल प्रोग्राम से भी जोड़ा गया है। हालांकि, T-14 को खरीदने के बारे में भारत का कोई पक्का फैसला नहीं हुआ है।
तुंगुस्का: यह एक और रूसी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे पहले ही भारत के साथ खरीद का कॉन्ट्रैक्ट मिल चुका है।
नेशनल डिफेंस सेंटर जाएंगे आर्मी चीफ
आर्मी चीफ मॉस्को में नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा करेंगे और रूसी रक्षा मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों से बातचीत करेंगे। इनमें रक्षा उद्योग और खरीद मामलों के लिए जिम्मेदार रक्षा उप-मंत्री श्री वसीली सर्गेयेविच ओसमाकोव भी शामिल होंगे। इन मुलाकातों से मौजूदा सैन्य घटनाक्रमों पर विचारों के आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा। इस दौरे के हिस्से के तौर पर, जनरल धीरज सेठ सेंट पीटर्सबर्ग भी जाएंगे, जहां वे मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी एकेडमी का दौरा करेंगे और वहां के नेतृत्व और फैकल्टी से बातचीत करेंगे।