ममता आईं, अखिलेश-DMK दूर... INDIA अलायंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

सितंबर महीने की आखिरी तारीख और INDIA गठबंधन ने दिल्ली में बैठक कर विपक्ष के एजेंडे को धार दी। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अक्तूबर और नवंबर में 5 बड़ी रैलियां करने की घोषणा की। बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग हो रही है, इन सबके बीच कई बड़े सवाल उठ रहे हैं।

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की लगातार मांग कर रहा है। अक्तूबर में राष्ट्रपति से भी मिलने का प्लान है। दिल्ली आईं ममता बनर्जी ने कहा कि INDIA गठबंधन एकजुट है। हालांकि, इस बैठक में अखिलेश यादव नहीं पहुंचे थे। डीएमके और AAP ने दूरी बनाए रखी। उद्धव ठाकरे ऑनलाइन जुड़े थे। महबूबा मुफ्ती, सुप्रिया सुले, उमर अब्दुल्ला और तेजस्वी यादव जरूर राहुल गांधी के बगल में बैठे दिखे।

ऐसे में सवाल यह है कि बंगाल चुनाव के बाद और यूपी चुनाव से पहले विपक्ष कितना एकजुट है। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी की टिप्पणी-

'DMK ने अपने आपको दूर कर लिया है, आम आदमी पार्टी इससे निकल चुकी है, पार्टियों के निकलने से गठबंधन कमजोर जरूर हुआ है। लेकिन आज विपक्ष के सामने जो चुनौती है खासतौर से, चुनाव आयोग में ड्राफ्ट वोटर रोल से 13 करोड़ लोगों के नाम निकले हैं। उसकी काफी निंदा हुई है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने धांधलीबाजी का आरोप लगाया है। वोटर लिस्ट से इतने लोगों का निकलना और वापस नहीं आना, वोटर का राइट भी है... ये सब मामला पेचीदा है। कोर्ट के सामने है। इलेक्शन कमीशन के सामने है।

ऐसे समय में विपक्ष का एक होना महत्व रखता है। सवाल यह है कि देश में अगर मूड बदल रहा है, लोग नाराज हो रहे हैं तो क्या विपक्ष उसे भुना पाएगा? और चुनाव में जीत हासिल कर पाएगा? लोगों के मन में सवाल हैं। स्वाभाविक तौर पर लोग कांग्रेस की तरफ, इंडिया ब्लॉक की तरफ देख रहे हैं।

केजरीवाल ने तो ये भी कहा है कि हमें सिर्फ ज्ञानेश कुमार नहीं, पीएम का भी इस्तीफा मांगना चाहिए। अगर वो दिल्ली मीटिंग में नहीं आते हैं।

आज जो मीटिंग हुई है उससे ये नहीं लगता कि आगे कदम उठाए गए। वैसे भी इंडिया ब्लॉक के न तो संयोजक हैं, न ही सचिवालय है। इतने समय से बात होती रही है। 

आप संसद में बोल सकते हैं। आप टीवी पर बोल सकते हैं। आप धरना भी कर सकते हैं, जो कि कांग्रेस ने पिछले दो दिनों कई स्टेट कैपिटल में किया है और बड़े प्रदर्शन हुए हैं लेकिन केवल प्रदर्शन से वोट नहीं मिलते। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती है- इकट्ठा होना, मतभेद खत्म करना और बड़े चैलेंज को मिलकर फेस करना- ये INDIA ब्लॉक के सामने चैलेंज रहेगा। दिल्ली मीटिंग में न तो केजरीवाल गए, न डीएमके वापस आई और न ही अखिलेश यादव गए हैं।

हो सकता है यूपी चुनाव को लेकर कांग्रेस और अखिलेश यादव के बीच मनमुटाव हो। कांग्रेस 100 सीटें मांग रही है और सपा को लगता है कि उसकी इतनी हैसियत ही नहीं है, जहां वो जीत सके। अगर आप पब्लिकली नहीं जाते हैं... एडजस्टमेंट करना पड़ेगा। अब कांग्रेस को लगता है कि हमको रिवाइव करने का मौका मिला है। रीजनल पार्टियां कमजोर हो गई हैं, तो हम उनको क्यों भाव दें... ऐसे तो बीजेपी को नहीं हरा पाएंगे।

और रीजनल पार्टियों को इकट्ठा करके काम करना राहुल गांधी के सामने आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है। आज के संदर्भ में रीजनल पार्टियां राहुल गांधी की लीडरशिप को स्वीकार कर लेंगी, पर जैसे अंग्रेजी में एक कहावत है ना कि आपको झुककर, विनम्रता से, मिलकर-बात करके सबको साथ लाना पड़ेगा। अगर वे कुछ ज्यादा सीटें मांग रहे हैं तो दे दीजिए। 2029 आपके लिए बहुत अहमियत रखता है खासकर कांग्रेस के लिए, देखते हैं कांग्रेस इस चुनौती को कैसे फेस करती है। आज इंडिया की बैठक निराशाजनक रही है। उद्धव ठाकरे भी नहीं आए। अभी तो ये उम्मीद थी कि इस गठबंधन को और बड़ा करेंगे- वाईएसआर जगन रेड्डी को लाएंगे। बीजेडी को लाएंगे। एनडीए में सेंध लगाएंगे।

कुल मिलाकर अनिश्चितता की स्थिति है। डैमेज कंट्रोल तो भाजपा भी कर रही है ना। इलेक्शन कमीशन ने शनिवार को 9 पॉइंट्स में जो बात कही है, उससे साफ है कि दो इलेक्शन कमिश्नरर्स ने कई निर्णयों को illegal कहा था, जो इंडियन एक्सपर्स की रिपोर्ट थी। वो शायद मुद्दा अब सुलट चुका है। बीजेपी नहीं चाहेगी कि ज्ञानेश कुमार रिजाइन करें क्योंकि इससे उसकी मुसीबतें बढ़ेंगी। लेकिन इस तरफ (कांग्रेस+) का आक्रामक रवैया भाषा में तो है, जमीन पर नहीं दिख रहा है।

यह एक मौका भी था। अब सीजेपी क्या करेगी 2 अक्टूबर को, वो देखने वाली बात होगी लेकिन कांग्रेस ने भी 5-6 दिन लगा दिए मीटिंग बुलाने में। ऐसी स्थिति में तो आप तुरंत मूव करते हैं ना।'