रूस के साथ जारी संघर्ष के बीच यूक्रेनी नेता जेलेंस्की ने भारत पर निशाना साधा है। जेलेंस्की का दावा है कि रूस अपनी इकोनॉमी को भारत पर टिका रहा है, क्योंकि नई दिल्ली रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए है। जेलेंस्की का तर्क है कि अगर भारत और चीन रूस से तेल खरीदना बंद कर दें, तो मॉस्को बहुत तेजी से संघर्ष खत्म कर देगा। उनका कहना है कि इन दोनों देशों और अमेरिका का दबाव उन्हें रोकने के लिए काफी होगा।
यूक्रेनी नेता का यह बयान तब आया है जब जेलेंस्की ने अमेरिका के उस नए कानून का समर्थन किया है जिसके तहत रूसी एनर्जी खरीदने वालों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। जेलेंस्की का कहना है कि रूसी एनर्जी खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला बिल 'शांति और पक्की सुरक्षा' लाएगा। यह स्पष्ट है कि भारत का रूस-यूक्रेन संघर्ष से कुछ भी लेना-देना नहीं है। ऐसे में आखिर क्यों यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की भारत पर निशाना साध रहे हैं।
ट्रंप के बिल पर क्या कह रहा है भारत?
ट्रंप के सेकेंडरी सैंक्शंस एक्ट पर दस्तखत करने के बाद, जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा है कि एनर्जी की उपलब्धता और कीमत में हेर-फेर को रोका जाना चाहिए। इससे पहले बिल के सीनेट से पास होने पर भी भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। भारत ने साफ कहा था कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
17 सितंबर को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास किया था। इस बिल से ट्रंप प्रशासन को रूसी तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की इजाजत मिल चुकी है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
US पर दबाव के लिए जेलेंस्की का बयान
विदेश मामलों की जानकार अनुराधा चिनॉय ने कहा कि जेलेंस्की का यह बयान अमेरिका पर दबाव डालने के लिए है। इसकी वजह है कि अमेरिका ने हाल ही में रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ 100 परसेंट टैरिफ लगाने संबंधी बिल पास किया है। अमेरिका की तरफ 100% टैरिफ लगाना अपने सहयोगियों के साथ दुश्मन की तरह कदम उठाना है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका यह अच्छी तरह से जानता है कि भारत और भारत के लिए रूस के तेल पर निर्भर हैं। अनुराधा चिनॉय ने कहा कि मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और लाल सागर में बाब अल मंदेब चोकपोइंट बंद है। ऐसे में यूएई की तरफ से वैकल्पिक सोर्स भी संभव नहीं है। अमेरिका चाहता है कि हम वेनेजुएला से तेल खरीदें। उसने वेनेजुएला के तेल पर कब्जा किया है।
विदेश मामले की जानकार ने कहा कि अब मुद्दा यह है कि क्या रूस पर प्रतिबंध काम कर रहे हैं। यह संघर्ष का पांचवां साल है। रूस पर किसी भी तरह से प्रतिबंध का प्रभाव नहीं पड़ रहा है। रूस लगातार इस संघर्ष में जीत की तरफ बढ़ रहा है। यह उनके लिए प्रभावी साबित नहीं हो रहा है। ऐसे में अमेरिका भारत को सीधा टारगेट कर रहा है। यह न सिर्फ हमे टारगेट किया जा रहा है, बल्कि हमारे राष्ट्रीय हितों के साथ ही एनर्जी सिक्योरिटी को भी निशाना बना रहा है। इससे आखिर कौन प्रभावित होगा?
उन्होंने कहा कि यह मानव सुरक्षा को निशाना बनाया जा रहा है। यदि फैक्ट्रियां बंद होंगी, तो निश्चित रूप से लोगों की नौकरियां जाएंगी। यह पूरे ओवरऑल पॉलिटिकल सिस्टम, लोग, सरकार, संस्थानों पर सीधा वार है। ऐसे में भारत को अमेरिका के सामने नहीं झुकना चाहिए। हमें काउंट प्रेशर डालना चाहिए जैसे चीन और ईरान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को धमकाना पसंद है। इसमें जेलेंस्की इस धमकी में उनके पार्टनर बन रहे हैं।
अनुराधा चिनॉय ने कहा कि इसके बावजूद वह लगातार इस तरह के प्रयास कर रहे हैं। ऐसा पहले विश्व युद्ध, दूसरे विश्वयुद्ध में भी हुआ। जब भारत का इजरायल से लेकर ईरान पर अमेरिकी हमले से कोई लेना देना नहीं है तो हमें क्यों कॉलेट्रल डैमेज किया जा रहा है। भारत को मौजूदा दोनों संघर्षों से कुछ लेना-देना नहीं है।
'भारत को US के सामने झुकना नहीं चाहिए'
यूक्रेन और अमेरिका की तरफ से शांति की बात पर अनुराधा चिनॉय ने कहा कि यदि दोनों देश शांति चाहते हैं तो उन्हें यह बात अच्छी तरह से पता है कि यह कैसे होगा। उन लोगों को बातचीत करनी होगी। उनके लिए भारत पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, भारत तो इसमें मध्यस्थ की भूमिका में भी नहीं है। आखिर में शांति तो यूएस, यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत से ही आएगी। इसलिए यदि वह सही में शांति चाहते हैं तो दूसरे देश को शामिल करने से कुछ नहीं होगा। आपने जेरेड कुशनर और विटकॉफ को भेजा। उससे हल निकालिए।
भारत को अमेरिका के सामने झुकना नहीं होगा। यदि अमेरिका कहता है कि हम 100% टैरिफ लगाएंगे, तो उन्हें लगाने दें। यदि वह प्रतिबंध लगाए, तो हमें दूसरे विकल्प देखने चाहिए। हमें दूसरे विकल्प तलाशने होंगे। हमें अमेरिका का मोहरा नहीं बनना होगा। हमें उन पर दबाव डालना होगा। भारत को अमेरिका के सामने नहीं झुकना होगा।
'ये कैसा बेतुका दावा है'
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के रूस द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को भारत और 'कभी-कभी तुर्की और चीन' पर आधारित करने के दावे पर पूर्व राजनयिक कंवल सिब्बल ने हैरानी जताई। सिब्बल ने कहा कि जेलेंस्की ऐसा बेतुका दावा कैसे कर सकते हैं?
उन्होंने कहा कि चीन एनर्जी के मामले में भी रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। रूस के लिए तुर्की एक बहुत अहम देश है। रूस और तुर्की बड़े ट्रांस-ब्लैक सी नेचुरल गैस पाइपलाइनों जैसे कि तुर्कस्ट्रीम और ब्लू स्ट्रीम से जुड़े हुए हैं, जो रूसी गैस को तुर्की और वहां से आगे दक्षिणी और पूर्वी यूरोप तक पहुंचाती हैं।
पूर्व राजनयिक ने कहा कि रूस के लिए, तुर्की पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने का एक जरिया है। उन्होने आगे कहा कि इस साल अगस्त में तुर्की ने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में डीजल खरीदा। जेलेंस्की खुलेआम हमें निशाना बना रहे हैं। हम उनके साथ उनकी असल जरूरत से अधिक नरमी बरत रहे हैं।
रूस से कितना तेल इम्पोर्ट कर रहा भारत
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, रूस भारत के लिए क्रूड ऑयल का एक बड़ा सोर्स बना हुआ है। सितंबर में अब तक हर दिन लगभग 1.95 मिलियन बैरल का इम्पोर्ट हुआ है। रूस के इकोनॉमिक डेवलपमेंट मिनिस्टर मैक्सिम रेशेतनिकोव ने इस महीने की शुरुआत में RT इंडिया को बताया था कि पिछले साल भारत-रूस ट्रेड $79 बिलियन तक पहुंच गया था, जो पिछले पांच सालों में सात गुना बढ़ा है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी होने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी थी।