प्लेन में पावर बैंक ले जा रहे हैं तो गांठ बांध लीजिए ये बातें

हाल ही में चेन्नई जा रही एक फ्लाइट को हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी, वजह एक पावर बैंक था।

अगर आप भी फ्लाइट से यात्रा करते समय मोबाइल फोन या गैजेट्स को चार्ज करने के लिए पावर बैंक साथ लेकर जाते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। रविवार 11 अक्टूबर को चेन्नई जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट को हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। वजह यही पावर बैंक था।

फ्लाइट जब ऊंचे आसमान पर थी, तभी एक यात्री के पावर बैंक में आग लग गई। विमान के केबिन में धुआं भर गया। आनन-फानन में क्रू मेंबर्स ने किसी तरह आग बुझाई। अधिकारी अब जांच पड़ताल में जुटे हैं।

फ्लाइट के दौरान पावर बैंक में आग का एक मामला इसी साल मई में भी आया था। तब चंडीगढ़ जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट के लैंड होने के बाद, एक यात्री का पावर बैंक फट गया था। इससे विमान में अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों को तुरंत बाहर निकालना पड़ा था।

ऐसे में अगर आप भी पावर बैंक लेकर हवाई यात्रा करते हैं, तो आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए बताते हैं।

पहले समझिए मामला क्या था?

11 अक्टूबर 2026, इंडिगो की एक फ्लाइट दिल्ली से चेन्नई जा रही थी। सबकुछ सामान्य था, तभी कुछ ऐसा हुआ कि प्लेन में बैठे यात्री कुछ देर के लिए सकते में आ गए। विमान के अंदर एक यात्री के पावर बैंक में आग लग गई थी। देखते ही देखते लपटें उठने लगीं। विमान के केबिन में धुआं भर गया। क्रू मेंबर्स ने थोड़ी मशक्कत के बाद आग बुझा दी। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए फ्लाइट को हैदराबाद के हवाई अड्डे में लैंड कराना पड़ा।

एक यात्री ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया था। एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें यात्री अपने बैगों की मदद से आग बुझाने की कोशिश करते दिखाई दे रहे थे। इंडिगो की इस फ्लाइच के उड़ान भरने का तय समय दोपहर 1:10 बजे था, लेकिन इसने दोपहर 1:30 बजे उड़ान भरी। मार्ग बदले जाने (डायवर्जन) से पहले, इसका चेन्नई पहुंचने का निर्धारित समय शाम 4:00 बजे था। लेकिन उससे पहले ही ये दुर्घटना हो गई।

पावर बैंक में आग क्यों लगी?

पावर बैंक में आमतौर पर लिथियम कोबाल्ट ऑक्साइड (LCO) या लिथियम-आयन बैटरी सेल्स होते हैं। सस्ते पावर बैंकों में खराब तरीके से बने या घटिया क्वालिटी के कई सेल्स लगा दिए जाते हैं, या पुरानी बैटरियों का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। जानकार बताते हैं कि पावर बैंक की इन बैटरियों में बहुत अधिक ऊर्जा घनत्व (एनर्जी डेंसिटी) होता है, जिसके चलते खास परिस्थितियों में इनके अत्यधिक गर्म होने और आग पकड़ने का खतरा बना रहता है।

जब असली की जगह घटिया और बिना मानकों के तैयार सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है, तो मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट्स भी आते हैं। 11 अक्टूबर की फ्लाइट में पावर बैंक में लगी आग की एक संभावित वजह यह भी हो सकती है।

थर्मल रनअवे (अत्यधिक गर्म होने की स्थिति) के दौरान, बैटरी जितनी तेजी से गर्मी बाहर निकाल पाती है, उससे कहीं अधिक तेजी से गर्मी पैदा करने लगती है। तापमान बढ़ने से सेल के केमिकल रिएक्शन्स और तेज हो जाते हैं, जिससे ज्वलनशील गैसें, धुआं और अत्यधिक गर्मी पैदा हो सकती है।

जानकारों का ये भी कहना है कि लैंडिंग के समय विमानों में आमतौर पर हल्का झटका लगता है, जिससे पावर बैंक में मैकेनिकल कंपन (वाइब्रेशन) हो सकता है। पूरी तरह चार्ज LCO बैटरी होने के कारण, ये झटके अंदरूनी शॉर्ट सर्किट को ट्रिगर कर सकते हैं और आग लग सकती है।

बैटरी बनाने वाली कंपनी 'पावरट्रॉन' के एमडी विवेक पांचाल ने कहा,

“कई लोग अनजाने में अपने पावर बैंक को बहुत अधिक तापमान में छोड़ देते हैं, जरूरत से ज्यादा चार्ज (ओवरचार्ज) कर देते हैं, या फिर खराब/क्षतिग्रस्त उपकरणों का इस्तेमाल जारी रखते हैं, जिससे वे असुरक्षित हो जाते हैं।”

आमतौर पर यह सलाह दी जाती है कि पावर बैंक को केवल 80% तक ही चार्ज रखें और इसे 100% क्षमता तक चार्ज करने से बचें। इससे बैटरी सेल्स पर दबाव कम पड़ता है और उनकी लाइफ भी बढ़ती है।

प्लेन में पावर बैंक ले जाने के क्या नियम हैं?

इंडिगो, स्पाइसजेट और एयर इंडिया सहित भारत की अधिकांश एयरलाइंस यात्रियों को चेक-इन बैगेज (जमा कराने वाले बैग) में पावर बैंक ले जाने की अनुमति नहीं देती हैं। हालांकि, कुछ शर्तों के साथ इन्हें केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत होती है।

नवंबर 2025 में, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने खतरनाक सामान संबंधी एडवाइजरी जारी की, जिसमें उड़ान के दौरान यात्रियों के पावर बैंक का उपयोग करने या उन्हें चार्ज करने पर रोक लगा दी गई।

DGCA ने यात्रियों को ओवरहेड बिन (सीट के ऊपर बने सामान के रैक) में पावर बैंक रखने से भी मना किया है, क्योंकि आग लगने की स्थिति में वहां रखे उपकरण तक तुरंत पहुंच न बन से आपातकालीन बचाव में देरी हो सकती है।

इसके अलावा, एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे विमान के अंदर घोषणाएं करके यात्रियों को लिथियम बैटरी के खतरों और शॉर्ट सर्किट से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करें।

लिथियम-आयन बैटरियों को लेकर चिंताएं कोई नई नहीं हैं। साल 2016 में, पायलटों और विमान निर्माताओं द्वारा आग के खतरों की बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद, अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने यात्री विमानों के कार्गो शिपमेंट में लिथियम-आयन बैटरियों के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

यात्रियों के ध्यान देने वाली बात

आग लगने के जोखिम के अलावा, अत्यधिक गर्म होना (ओवरहीटिंग) भी पावर बैंक से जुड़ी एक बड़ी समस्या है। तकनीशियनों का कहना है कि इन उपकरणों को आदर्श रूप से 55 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर ही रखा जाना चाहिए।

अधिकांश लेटेस्ट पावर बैंकों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) द्वारा संचालित इन-बिल्ट ओवर-टेंपरेचर कट-ऑफ फीचर होता है, जो बैटरी के स्टेटस पर नजर रखते हुए उसे ओवरचार्जिंग, अत्यधिक डिस्चार्ज और ज्यादा गर्म होने से बचाता है। डिवाइस के आधार पर, यूजर इस फीचर को खुद सेट कर सकते हैं या फिर स्मार्ट BMS पर निर्भर रह सकते हैं।

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पावर बैंक खरीदते समय बैटरी लाइफ साइकिल, सेल्स की क्वालिटी और वारंटी को प्राथमिकता देनी चाहिए। जिन उत्पादों का 'मीन टाइम बिटवीन फेलियर' (MTBF या विश्वसनीयता दर) बेहतर होता है, वो आमतौर पर लंबे समय तक सुरक्षित रूप से चलते हैं।

चार्जिंग या डिस्चार्जिंग के दौरान यदि कोई पावर बैंक जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाए तो करना चाहिए? इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे में पावर बैंक का उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। बैटरी का फूलना, लीक होना, अजीब गंध आना या अत्यधिक गर्म होना जैसी चीजें खतरे के संकेत हैं। इसका मतलब है कि पावर बैंक अनसेफ हो गया है। उसकी तुरंत जांच कराएं या नया ले लेना चाहिए।