नवंबर की शुरुआत से पहले ही देश के तीन शहरों में हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है। इनमें हरियाणा का पंचगांव और उत्तर प्रदेश के बड़ौत और हापुड़ शामिल हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से गुरुवार शाम जारी आंकड़ों के मुताबिक, पंचगांव का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सबसे ज्यादा 378 दर्ज किया गया। यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। पंचगांव में PM 2.5 प्रमुख प्रदूषक रहा।
वहीं, उत्तर प्रदेश के बड़ौत और हापुड़ का AQI 328 दर्ज किया गया। इन दोनों शहरों में भी हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही।
हरियाणा का 1 और यूपी के 4 शहर सबसे प्रदूषित
देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा का एक और उत्तर प्रदेश के चार शहर शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश के 254 शहरों में से 123 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘अच्छा’ या ‘संतोषजनक’ दर्ज किया गया। वहीं, बाकी शहरों में वायु गुणवत्ता इन दोनों श्रेणियों से नीचे रही।
CPCB ने यह आंकड़े शाम 4 बजे जारी बुलेटिन में दिए हैं। आइए, इसके मुताबिक देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों पर नजर डालते हैं।
टॉप-5 प्रदूषित शहरों की सूची
| शहर | प्रदेश | एक्यूआई | श्रेणी |
| पंचगांव | हरियाणा | 378 | बहुत खराब |
| बड़ौत | उत्तर प्रदेश | 328 | बहुत खराब |
| हापुड़ | उत्तर प्रदेश | 328 | बहुत खराब |
| बागपत | उत्तर प्रदेश | 282 | खराब |
| मेरठ | उत्तर प्रदेश | 281 | खराब |
दिल्ली का AQI भी 200 के पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली का AQI 223 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। फिलहाल, दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहरों के मुकाबले बेहतर रही।
एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली में प्रदूषण की यह स्थिति पांच दिनों तक बनी रह सकती है। इसकी वजह प्रदूषकों का वातावरण में जमा होना और उनका धीरे-धीरे छंटना है।
GRAP-I के उपायों की समीक्षा
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने प्रदूषण से निपटने के लिए गुरुवार को ग्रैप (GRAP) के पहले चरण के उपायों की समीक्षा की। इसके लिए एक अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में तय किया गया कि नियमों का पालन नहीं करने वाली बसों को दिल्ली की सीमाओं पर डायवर्ट किया जाएगा। इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक वाहनों के प्रवेश से जुड़े प्रतिबंधों को सख्ती से लागू किया जाएगा।
वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की नियमित जांच की जाएगी। साथ ही, सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के उपाय किए जाएंगे।
संबंधित एजेंसियों को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के दिशा-निर्देशों को तय समयसीमा में लागू करने और रियल-टाइम समन्वय मजबूत करने का निर्देश भी दिया गया है।
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