बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हमले का केस जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, नई जानकारियां निकलकर सामने आ रही हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच को पता चला है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के निशाने पर टाइगर नहीं बल्कि सलमान खान थे। चूंकि सलमान की सिक्योरिटी इस वक्त काफी टाइट रहती है, इसलिए शूटर्स ने टाइगर श्रॉफ पर हमला करने का प्लान बनाया।
इसी से जुड़ी एक और बात पता चली है कि टाइगर पर हमले की प्लानिंग 2.5 महीने पहले से बनाई जा रही थी। लॉरेंस गैंग का मानना था कि सलमान की जगह किसी बॉलीवुड एक्टर पर हमला करने से डर और दहशत बढ़ जाएगी।
टाइगर पर हमला करने वाले तीनों हमलावर फूल सिंह, ऋतिक कुमार और रेहान को पुलिस कोटा से मुंबई ले आई है। आज तड़के 4 बजे तीनों का मेडिकल हुआ, जिसके बाद उन्हें आज ही कोर्ट में पेश भी किया गया। अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
आइए आपको बताते हैं, टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अब तक क्या-क्या पता चला।
रिपोर्ट के अनुसार शूटिंग के तार राजधानी दिल्ली से भी जुड़े हैं। दिल्ली की स्पेशल सेल ने हमले से जुड़े 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, इनमें दो महिलाएं हैं।
कोटा से मुंबई लाए गए तीनों शूटर्स
मुंबई पुलिस तीनों आरोपियों को मुंबई लेकर आ गई है। कोटा पुलिस ने तीनों को ट्रेन में पकड़ा था। तीनों भागने की फिराक में थे। कोटा एसपी तेजस्वनी गौतम के नेतृत्व में तीनों को पकड़कर मीडिया के सामने लाया गया। कोटा पुलिस ने इसके बाद शूटर्स को मुंबई पुलिस को सौंप दिया जिसके बाद उन्हें सड़क के रास्ते मुंबई लाया गया। सुबह 4 बजे तीनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और इसके बाद उन्हें मुंबई एंटी-एक्सटॉर्शन सेल (Anti-Extortion Cell) की यूनिट में ले जाया गया। आज तीनों की कोर्ट में पेशी है।
सुरक्षा नहीं, इसलिए टाइगर बने निशाना?
हां, टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की जांच कर रहे मुंबई पुलिस के अधिकारियों को पता चला है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का असली निशाना अभिनेता सलमान खान थे, लेकिन उन्हें दी गई कड़ी सुरक्षा की वजह से गैंग ने प्लान बदल दिया। इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान टाइगर श्रॉफ की तरफ मोड़ लिया। शूटर्स ने फैन बनकर सलमान के घर की भी रेकी की थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गैंग को पता चला कि टाइगर काफी लो-प्रोफाइल रहते हैं और बिना किसी सुरक्षा के घूमते हैं। जांच में पुलिस ने बताया कि शूटर्स टाइगर पर हमला कर यह मैसेज देना चाहते थे कि किसी भी बॉलीवुड हस्ती पर हमला करने से डर का माहौल पैदा होता है। कुछ रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि हमले से पहले गैंग ने श्रॉफ को धमकियां भी दी थीं।
ढाई महीने से चल रही थी प्लानिंग
टाइगर पर हमला सोची-समझी साजिश थी। उन पर अटैक के लिए लॉरेंस गैंग से कमांड देने वाले अनिल पंडित ने 2.5 महीने पहले से ही इसकी तैयारी कर ली थी। तीनों ने 10 दिनों तक घटनास्थल की रेकी की थी। तीनों ने पुलिस को बताया कि पंडित ने उनसे वादा किया था कि टाइगर को मारने और नेपाल भाग जाने के बाद उन्हें विदेश में बेहतर भविष्य मिलेगा।
11 अक्टूबर को भी बनाया था हमले का प्लान
आरोपियों ने टाइगर और उसके प्रशंसकों की ओर से साझा किए गए सोशल मीडिया पोस्ट और रील्स के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। 10 दिनों तक जुहू खेल के मैदान पर नजर रखी, यहां तक कि 11 अक्टूबर को एक योजना भी बनाई, लेकिन टाइगर वहां नहीं आए। चलाई गई सात गोलियों के कारतूस बरामद कर लिए गए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा गया है। रविवार को हुई गोलीबारी में इस्तेमाल किए गए दो हथियार अभी बरामद होने बाकी हैं। गोली लगने से घायल हुए व्लॉगर उमेश चौहान से अस्पताल में टाइगर की मां ने मुलाकात की और उन्हें आर्थिक मदद का भरोसा दिया है।
अनिल पंडित नहीं, रणदीप मलिक ने दिए थे निर्देश!
पुलिस सूत्रों की मानें तो लॉरेंस बिश्नोई गैंग में एक टॉप ऑपरेटिव है, नाम है रणदीप मलिक। पुलिस उसकी भी भूमिका की जांच कर रही है। इस घटना की जिम्मेदारी भले अनिल पंडित ने ली हो, पर पंडित और शूटर रेहान दोनों कुछ महीने पहले तक मलिक को ही रिपोर्ट करते थे। पंडित को हाल ही में स्वतंत्र रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मुंबई पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि अभी तीनों से अलग से पूछताछ होना बाकी है।
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टाइगर पर हमले का दिल्ली कनेक्शन
जांच जैसे ही आगे बढ़ी, इसका दिल्ली कनेक्शन भी निकल आया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े कथित फायरिंग मामले में चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। आरोपियों की पहचान कुणाल (21) और सुमित (19) - दोनों हरियाणा के सोनीपत निवासी हैं। इसके अलावा राधा (23) और बबीता (23) का नाम है। ये दोनों उत्तर प्रदेश की हैं। सभी को अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड में भेज दिया गया है।
- ANI ने बताया कथित तौर पर लगभग दो महीने पहले कुणाल की मुलाकात राधा से हुई थी।
- उसने उसे अपनी गतिविधियों के बारे में बताया और हथियार लेकर मुंबई जाने के लिए राजी कर लिया।
- 15 अक्टूबर को कुणाल, राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर गया, कथित तौर पर पिस्तौल राधा के बैग में रखी गई थी।
- यात्रा के दौरान, कुणाल एक एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए उनके संपर्क में रहा और अनिल पंडित के निर्देश पहुंचाता रहा।
- 17 अक्टूबर को दोनों महिलाएं मुंबई के दादर पहुंचीं और एक होटल में ठहरीं।
- सुबह करीब 11 बजे, एक नाबालिग लड़के ने कथित तौर पर होटल के पास राधा से वह बैग ले लिया।
- 18 अक्टूबर को शाम करीब 7 बजे अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की खबर आई।
- इसके बाद अनिल पंडित ने कथित तौर पर कुणाल को बताया कि शूटर मुंबई में फंस गए हैं और उसने कुणाल से उनके भागने का इंतजाम करने को कहा।
- उसी दिन, राधा और बबीता कथित तौर पर दादर-हरिद्वार एक्सप्रेस से मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं।
- 20 अक्टूबर को राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया, जबकि कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से पकड़ा गया।
- अनिल पंडित के निर्देश पर, कुणाल ने शायद अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 राउंड कारतूस जुटाए थे।
- चारों आरोपियों को शुरुआत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(1)(बी) के तहत एक कलंदरा (Kalandra) के जरिए अदालत में पेश किया गया था।
- इसके बाद मुंबई पुलिस की सीआईडी (CID) ने हिरासत में पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति मांगते हुए एक याचिका दायर की।
- अदालत ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने चारों आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
- अदालत ने बाद में आगे की जांच के लिए मुंबई पुलिस को आरोपियों की तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दी।
- आरोपियों की कथित भूमिकाओं और गोलीबारी की इस घटना से जुड़े उनके संपर्कों की आगे की जांच जारी है।
बाइक किसकी है?
मुंबई पुलिस ने हमलावरों की ओर से इस्तेमाल की गई बजाज पल्सर बाइक के मालिक की कड़ियों का पता लगाया है। बाइक के तीसरे मालिक रज्जब अली शेख ने कहा,
“बाइक बेचने के इरादे से बाहर रखी हुई थी। मेरे भतीजे ने इसे बेचने का फैसला किया था। जान-पहचान वालों के जरिए किसी ने संपर्क किया और बाइक खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। खरीदार आया और चूंकि सभी लोग आपसी दोस्तों के जरिए जुड़े हुए थे, इसलिए सौदा हो गया और हमने इसे 25,000–26,000 रुपये में बेच दिया। जब मीडिया में इस घटना की खबर आई, तब पुलिस हमारे घर पहुंची। तब हमें अहसास हुआ कि जिसे हमने गाड़ी बेची थी, या शायद किसी और ने इसका इस्तेमाल किया हो। हमें यह तक नहीं पता था कि इसका इस्तेमाल किसने किया। अब जाकर यह साफ हो रहा है कि वह वास्तव में हमारी ही बाइक थी।”
रज्जब अली शेख ने आगे बताया,
”मुंबई पुलिस आई और हमसे पूछताछ की। हमने उन्हें सब कुछ बता दिया। जैसा हुआ था, हमने पूरी सच्चाई साझा कर दी। हमने उन्हें भरोसा दिलाया कि अगर आगे किसी भी कार्रवाई की जरूरत होगी, तो जब भी उन्हें आवश्यकता होगी, हम सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह एक पल्सर बाइक थी। मैं लोगों से गुजारिश करता हूं कि जब भी वे अपनी बाइक बेचें, तो कागजी कार्रवाई (पेपरवर्क) पूरी तरह ठीक से करवाएं। यह बहुत बड़ी परेशानी की बात है। हम काफी चिंतित हैं। हमने वाहन बेचा था और उसका इस्तेमाल गलत मकसद के लिए हो गया। पुलिस काफी सहयोगी रही है और हमारा इरादा मुंबई पुलिस के साथ पूरा सहयोग करने का है। अगर वे हमसे गवाह बनने के लिए कहेंगे, तो हम निश्चित रूप से ऐसा करेंगे। हम इसके तीसरे मालिक थे और हमने इसे चौथी बार बेचा था।”