भारत की हवाई ताकत को लेकर वायुसेना प्रमुख ने एक साथ कई अहम संकेत दिए हैं। एक तरफ वायुसेना की घटती स्क्वॉड्रन क्षमता चिंता बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ रूस ने अपने पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट भारत को देने की पेशकश की है। नई दिल्ली में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने आधुनिक हथियारों की जरूरत, वायुसेना की मौजूदा क्षमता और भविष्य की चुनौतियों पर खुलकर बात की।
एयर पावर सबसे बड़ा हथियार
दुनिया भर में चल रहे तनाव और युद्धों का हवाला देते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी देश की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति का आधार उसकी मजबूत सेना ही होती है। पर्याप्त सैन्य शक्ति के अभाव में कोई भी मुल्क बाहरी दबाव और ब्लैकमेलिंग के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में रणनीतिक सौदे और चर्चाएं उन्नत लड़ाकू विमानों, लंबी दूरी के सटीक हथियारों, एकीकृत एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। इन बदलावों के अनुरूप भारतीय वायुसेना लगातार अपनी क्षमता और ताकत बढ़ा रही है, ताकि किसी भी मोर्चे पर देश की हवाई सर्वोच्चता बनी रहे।
हर साल चाहिए 36 से 40 नए लड़ाकू विमान
वायुसेना में लड़ाकू विमानों की घटती संख्या पर गंभीर चिंता जताते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि पुराने विमानों के रिटायर होने और नई डिलीवरी में देरी के कारण यह अंतर बढ़ा है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा, “हर कोई इस बात को समझता है कि हमारे विमानों की संख्या कम हो रही है। जिन विमानों पर हम पहले निर्भर थे, उनमें से मिग-21 को पिछले साल सेवामुक्त कर दिया गया, जबकि यह फैसला दो या तीन साल पहले भी हो सकता था।”
उन्होंने उम्मीद जताई कि तेजस एलसीए मार्क 1A, मार्क 2 और 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) से जुड़े सौदों में हो रही प्रगति से आने वाले समय में स्क्वॉड्रन की इस कमी को पूरा किया जा सकेगा।
PRS की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 तक भारतीय वायुसेना के पास 31 सक्रिय फाइटर स्क्वॉड्रन थे, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वॉड्रन की है। एक फाइटर स्क्वॉड्रन में करीब 20 विमान होते हैं।
रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने 2024 में कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वायुसेना को कम से कम 180 अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की जरूरत है। समिति ने यह भी बताया था कि वायुसेना के पास करीब 130 ट्रेनर विमानों की कमी है।
रूस का Su-57 ऑफर
भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर प्रोग्राम 'एएमसीए' (AMCA) को लेकर वायुसेना प्रमुख ने व्यावहारिक रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि वायुसेना इस परियोजना को पूरा समर्थन दे रही है, लेकिन अगर AMCA कार्यक्रम में देरी होती है तो वायुसेना को दूसरे लड़ाकू विमानों के विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि एएमसीए को उड़ान भरने और पूरी तरह ऑपरेशनल होने में अभी वक्त लगेगा। इसलिए इसे 'होल-ऑफ-नेशन' अप्रोच यानी पूरे देश के साझा प्रयास के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) इसे समय पर पूरा कर सकें।
'अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं'
अलग ड्रोन फोर्स बनाए जाने के सवाल पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए ड्रोन कोई नई या अचानक आई क्षमता नहीं है। वायुसेना में इस तरह की क्षमताएं कई दशकों से मौजूद हैं। अब इनका विस्तार किया जा रहा है और ड्रोन की संख्या के साथ-साथ लॉइटरिंग म्यूनिशन और इनके अलग-अलग प्रकार भी बढ़ाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह हमारी मौजूदा क्षमता का अगला चरण है। हम ड्रोन की संख्या बढ़ा रहे हैं। लॉइटरिंग म्यूनिशन की संख्या और इनके प्रकार भी बढ़ रहे हैं।"
अलग ड्रोन फोर्स बनाए जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई जरूरत नहीं दिखती। उनके मुताबिक, ड्रोन को वायुसेना के मौजूदा ढांचे का हिस्सा बनाकर दूसरे हथियारों और सिस्टम के साथ मिलकर इस्तेमाल करना ज्यादा जरूरी है।
उन्होंने बताया कि वायुसेना में ड्रोन के लिए कुछ विशेष यूनिट पहले से मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर इन यूनिटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
वायुसेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस फोर्स भी तैयार कर रही है, जहां फैसले इंसानी दिमाग के ही होंगे, लेकिन डेटा और ऑपरेशनल सपोर्ट में AI मददगार बनेगा। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि राजस्थान में आयोजित ‘द्रुतड्रोन’ (Dhrutron) अभ्यास में 20 प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स और डिफेंस पीएसयू ने हिस्सा लेकर इस दिशा में बड़ी क्षमता प्रदर्शित की है।
'आत्मनिर्भरता' केवल नारा नहीं, आज की जरूरत
दुनिया भर में चल रहे युद्धों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और गोला-बारूद के भंडार पर पड़ रहे असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लिए आत्मनिर्भर होना अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी है।
उन्होंने बताया कि स्वदेशी हथियारों के विकास में वायुसेना पूरा सहयोग दे रही है। इसमें आकाश-एनजी, कुशा, प्रलय, ब्रह्मोस, अस्त्र मिसाइलें, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (AEW&C Netra/AWACS), एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट, ध्रुव, प्रचंड (LCH), आईएमआरएच और अश्लेषा, इंद्रधनुष, अश्विनी व अरूद्रा जैसे आधुनिक रडार सिस्टम शामिल हैं।
एयर डिप्लोमेसी और 24x7 हवाई सुरक्षा
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा कर रहा है, बल्कि 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ युगांडा, वेनेजुएला, फिलीपींस, मेडागास्कर, थाईलैंड, क्यूबा और जमैका जैसे देशों में मानवीय सहायता (HADR) पहुंचाकर देश की साख बढ़ा रहा है। हाल ही में बिहार में आई बाढ़ के दौरान भी वायुसेना लगातार राहत कार्यों में जुटी रही।
इसके साथ ही जोधपुर में चल रहा 'तरंग शक्ति' बहुपक्षीय युद्धाभ्यास भारत की बढ़ती सैन्य कूटनीति का प्रमाण है।
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