कॉकपिट का दरवाजा खुलना बताता है कैसे भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने लड़ा दी थी जान

मजबूत लॉकिंग सिस्टम के साथ सिक्योर्ड कॉकपिट दरवाजा… घायल हालत में भारतीय कैप्टन ने आखिर इसे कैसे खोला? 33 हजार फीट ऊपर स्मित मच्छार ने जो किया, अब पूरी दुनिया उनकी बहादुरी की बातें कर रही है।

33 हजार फीट ऊपर उड़ता एक विमान... सामने बंद कॉकपिट का मजबूत दरवाजा... और उस दरवाजे के पीछे 174 जिंदगियां बचाने की लड़ाई लड़ता एक भारतीय पायलट।

कुछ मिनट पहले तक Flydubai की फ्लाइट FZ1073 बिल्कुल सामान्य सफर पर थी। दुबई से तेल अवीव जा रहे इस विमान में 174 यात्री सवार थे। लेकिन आसमान में करीब 33 हजार फीट की ऊंचाई पर अचानक सबकुछ बदल गया।

कॉकपिट के अंदर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके साथ मौजूद को-पायलट ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। बाहर बैठे यात्रियों को शायद उस वक्त अंदाजा भी नहीं था कि कॉकपिट के उस बंद दरवाजे के पीछे क्या हो रहा है। फिर विमान अचानक नीचे जाने लगा।

करीब करीब एक मिनट में एयरक्राफ्ट ने लगभग 16 हजार फीट की ऊंचाई खो दी। तभी कहानी का एक और अहम किरदार सामने आया- कॉकपिट का दरवाजा...

प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में स्मित ने बताया कि उन्होंने कैसे कॉकपिट का दरवाजा खोला। उन्होंने कहा,

वह आगे कहते हैं, “मैं पिछले 17 साल से जहाज उड़ा रहा हूं और पिछले 11 साल से कैप्टन हूं। मुझे आंखें बंद करके भी पता चल जाता है कि प्लेन के साथ क्या हो रहा है।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने एक बयान में कैप्टन स्मित मच्छार को हीरो बताया और कहा कि बुरी तरह घायल होने के बावजूद कैप्टन कॉकपिट का दरवाजा खोलने और मदद मांगने में कामयाब रहे।

वो गेट, जिसे खोलना आसान नहीं होता

RT हिंदी ने कनाडा में बतौर कमर्शियल पायलट काम कर रहे सुशील कलान से बात की और उनसे समझने की कोशिश की कि एक फ्लाइट का कॉकपिट डोर कैसे काम करता है? 

उन्होंने बताया कि दरवाजा काफी मजबूत होता है। लॉकिंग सिस्टम के साथ सिक्योर्ड भी रहता है। इसे खोलने और बंद करने के लिए तय सुरक्षा प्रोटोकॉल होते हैं। बाहर से कोई भी नहीं खोल सकता। यानी हजारों फीट ऊपर उड़ते विमान में यह सिर्फ एक दरवाजा नहीं, कॉकपिट की सुरक्षा का सबसे अहम फिजिकल बैरियर है।

लेकिन FZ1073 में समस्या दरवाजे के बाहर नहीं थी। समस्या उस दरवाजे के अंदर थी। और अब उसी दरवाजे को खोलना जरूरी था।

दरवाजे के पीछे कैप्टन ने क्या किया?

सोचिए उस पल को। कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार घायल हैं। सामने चाकू जैसी चीज से हमला करने वाला को-पायलट है। विमान हजारों फीट नीचे जा चुका है। कॉकपिट के बाहर 174 यात्रियों को अभी पूरी तरह पता नहीं कि अंदर क्या चल रहा है। और इस पूरी स्थिति के बीच कैप्टन को विमान का कंट्रोल भी बनाए रखना है।

रिपोर्टों के मुताबिक हमलावर विमान पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन स्मित ने उसे एयरक्राफ्ट का कंट्रोल अपने हाथ में नहीं लेने दिया। यानी वह एक साथ हमले से बच रहे थे और विमान को संभालने की कोशिश कर रहे थे।

कॉकपिट के अंदर हालात बेहद भयावह थे। कैप्टन स्मित मच्छार खून से लथपथ फर्श पर पड़े थे। विमान नीचे जा रहा था और खतरा अभी टला नहीं था।

इजरायली प्रधानमंत्री के प्रवक्ता डोरॉन स्पीलमैन के मुताबिक इसी बीच स्मित ने अपनी बची हुई आखिरी ताकत जुटाई और कॉकपिट के दरवाजे का रिलीज खोल दिया। दरअसल पायलट के ठीक पास एक स्विच होता है, जिससे वे अंदर से कॉकपिट का दरवाजा अनलॉक कर सकते हैं। दरवाजा खुलते ही कुछ यात्री और क्रू सदस्य कॉकपिट में पहुंचे और घायल कैप्टन को फर्श पर पड़ा देखा, जबकि हमलावर पायलट नियंत्रण पैनल के पास खड़ा था।

दरवाजा खुला... और बाहर वालों को अंदर आने का रास्ता मिला

कॉकपिट डोर खुलते ही केबिन और फ्लाइट डेक के बीच वह बैरियर हट गया, जो सामान्य स्थिति में सुरक्षा के लिए बंद रहता है। क्रू मेंबर्स और कुछ पैसेंजर्स कॉकपिट तक पहुंचे। हमलावर को काबू करने की कोशिश शुरू हुई।

विमान में मौजूद off-duty pilots ने भी मदद की। और सबसे महत्वपूर्ण बात- कॉकपिट में एयरक्राफ्ट का कंट्रोल वापस सुरक्षित हाथों में आ गया।

कुछ ही देर पहले जो दरवाजा बाहर से किसी को अंदर जाने से रोक रहा था, उसी दरवाजे ने अब लोगों को अंदर पहुंचकर कैप्टन की मदद करने का रास्ता दिया।

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अगर वो दरवाजा नहीं खुलता तो?

यही इस पूरी घटना का सबसे तनावपूर्ण सवाल है। कॉकपिट एक ऐसी जगह है जहां सामान्य तौर पर केवल ऑथराइज्ड क्रू को एक्सेस मिलता है। फ्लाइट के दौरान डोर लॉक रहता है और एक्सेस के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल होता है। लेकिन इमरजेंसी की उस स्थिति में खतरा पहले ही फ्लाइट डेक के अंदर मौजूद था। इसलिए कैप्टन के लिए कॉकपिट को पूरी तरह सील रखना समाधान नहीं था। उन्हें मदद चाहिए थी। और मदद उस दरवाजे के दूसरी तरफ थी।

कॉकपिट गेट इतना मजबूत क्यों होता है?

इस एक घटना को समझने के लिए उस दरवाजे को समझना भी जरूरी है।

9/11 आतंकी हमले के बाद यात्री विमानों के कॉकपिट के दरवाजों की सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई थी। 9/11 हमले में चार विमानों में हमलावर कॉकपिट तक पहुंच गए थे और नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। इसके बाद कॉकपिट के दरवाजों को इस तरह मजबूत बनाया गया कि कोई व्यक्ति जबरदस्ती अंदर न घुस सके। विमानन सुरक्षा के तय मानकों में इन दरवाजों को कुछ तरह के हथियारों और हमलों से बचाव के लिए भी मजबूत बनाने की जरूरत शामिल है। 

दरवाजा लॉक रहता है। एक्सेस कंट्रोल्ड होता है। बाहर से कौन कॉकपिट में आ रहा है, इसकी जांच की जाती है। कुछ एयरक्राफ्ट में मेन कॉकपिट डोर खुलने के दौरान अतिरिक्त फिजिकल बैरियर भी इस्तेमाल की जाती है।

क्या कॉकपिट का दरवाजा हमेशा बंद रहता है?

सामान्य तौर पर हां। उड़ान के दौरान कॉकपिट डोर लॉक रहता है। इसे केवल जरूरत पड़ने पर तय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत खोला जाता है। मकसद साफ है- कॉकपिट तक अनऑथराइज्ड पहुंच को रोकना।

फिर केबिन क्रू कॉकपिट में कैसे जाता है?

केबिन क्रू को जरूरत पड़ने पर कॉकपिट में प्रवेश दिया जाता है, लेकिन यह कंट्रोल्ड प्रोसेस होता है। बाहर से एक्सेस रिक्वेस्ट की जाती है और अंदर मौजूद क्रू स्थिति की पुष्टि करने के बाद दरवाजा खोलता है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इसके एक्सएक्ट कोड्स या unlocking sequence सार्वजनिक रूप से नहीं बताए जाते हैं।

अगर कॉकपिट में इमरजेंसी हो जाए तो?

कॉकपिट सिक्योरिटी का मतलब यह नहीं कि दरवाजा हर परिस्थिति में पूरी तरह पहुंच से बाहर हो जाए। विमान की safety requirements में ऐसी इमरजेंसी हालात के लिए भी नियम होते हैं, जैसे कॉकपिट डोर जाम हो जाना या फ्लाइट क्रू के incapacitated यानी काम करने की स्थिति में न होने की स्थिति।

दरवाजा लॉक कैसे रहता है?

पायलट सुशील ने कॉकपिट डोर लॉक की पूरी प्रोसेस को बहुत आसान तरीके से तीन लेयर में समझाया। 

पहली लेयर- मजबूत दरवाजा और लॉक

कॉकपिट का दरवाजा मजबूत होता है और उसके साथ ऐसा लॉकिंग मैकेनिज्म होता है, जो उड़ान के दौरान उसे सुरक्षित रखता है।

दूसरी लेयर- कंट्रोल पायलट के पास

दरवाजे का एक्सेस मुख्य रूप से कॉकपिट के अंदर मौजूद क्रू के control में रहता है। यानी बाहर खड़ा व्यक्ति सामान्य तरीके से दरवाजा खोलकर अंदर नहीं जा सकता।

तीसरी लेयर- पहचान और निगरानी

अगर कोई केबिन क्रू मेंहर या ऑथराइज्ड व्यक्ति कॉकपिट में आना चाहता है, तो अंदर मौजूद पायलट पहले स्थिति वेरिफाई करता है। कॉकपिट से दरवाजे के बाहर के एरिया को मॉनिटर करने की व्यवस्था भी होती है। कुछ विमानों में इसके लिए कैमरा सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है।

लेकिन उस दिन इस दरवाजे की भूमिका उलट गई

सामान्य फ्लाइट में कॉकपिट डोर का मतलब है- बाहर के खतरे को अंदर मत आने दो। FZ1073 में खतरा पहले ही अंदर था। इसलिए उसी डोर का दूसरा मतलब बन गया- बाहर मौजूद मदद को अंदर आने दो। और उस वक्त इसे खोलने वाला कोई सामान्य पैसेंजर नहीं था। वह घायल कैप्टन था। जिस पायलट पर हमला हुआ था, उसी ने वह रास्ता खोला जिससे दूसरे लोग कॉकपिट तक पहुंच सके।

आखिर में लैंड हुई फ्लाइट

हमलावर को काबू करने के बाद एयरक्राफ्ट को सऊदी अरब के तबूक (Tabuk) की ओर डायवर्ट किया गया। विमान में मौजूद दूसरे क्वालिफाइड पायलट्स ने एयरक्राफ्ट को संभालने में मदद की। 

आखिरकार FZ1073 फ्लाइट ताबुक में सुरक्षित उतर गई। कॉकपिट में हुई कुछ मिनटों की लड़ाई खत्म हो चुकी थी।

लेकिन उसके निशान रह गए थे- घायल कैप्टन, घायल co-pilot और 174 यात्रियों के लिए वह सफर, जिसे वे शायद कभी भूल नहीं पाएंगे।

कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार?

भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के पास करीब 9,750 flying hours का अनुभव बताया गया है। उन्होंने Boeing 737-800 और Boeing 737 MAX पर उड़ान भरी है। जून 2022 में वह Flydubai में डायरेक्ट एंट्री कप्तान के रूप में शामिल हुए थे। इससे पहले वह SpiceJet में भी काम कर चुके हैं। लेकिन 30 सितंबर की उस उड़ान में उनकी पहचान इन आंकड़ों से कहीं बड़ी कहानी बन गई। 

एक दरवाजा... और उसके पीछे की पूरी कहानी

आज जब FZ1073 की कहानी याद की जाएगी, तो शायद सबसे पहले उस चाकू के हमले की बात होगी। फिर विमान के अचानक नीचे आने की। फिर तबूक की इमरजेंसी लैंडिंग की।

लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे प्रतीकात्मक दृश्य शायद वह है- 

34 हजार फीट ऊपर… कॉकपिट बंद… अंदर घायल कैप्टन… विमान तेजी से नीचे जा रहा है… और फिर अचानक खुलता है कॉकपिट का दरवाजा। दरवाजा खुलता है। बाहर मौजूद लोग अंदर पहुंचते हैं। हमलावर काबू होता है। विमान संभलता है। और कुछ देर बाद 174 लोगों वाला विमान जमीन पर होता है। उस दिन कॉकपिट का दरवाजा सिर्फ खुला नहीं था। उसने एक बंद कॉकपिट को मदद के लिए खोल दिया था।