फ्रांस से लेकर इटली तक...दंगों की आग में क्यों झुलस रहा यूरोप?

विरोध की आग फ्रांस में सबसे ज्यादा है। France24 की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने 1200 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया और 150 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।
फ्रांस में हालात इतने बेकाबू हैं कि वहां प्रदर्शनकारियों ने 143 साल पुराने लिमोज सिटी हॉल (टाउन हॉल) को आग के हवाले कर दिया। दंगाइयों ने गैलरी लाफायेत (Galeries Lafayette) डिपार्टमेंटल स्टोर में घुसने की कोशिश की, बैंकों में तोड़फोड़ की, लैकोस्टे (Lacoste) स्टोर व अन्य बुटीक लूटे।
इटली में भी लोग बढ़ती महंगाई से नाराज होकर हिंसक प्रदर्शन शुरू हैं। मिलान में मार्च हिंसक झड़पों में बदल गया, जिसके बाद पुलिस को शहर के सेंट्रल कैथेड्रल स्क्वायर (पियाज़ा डेल डुओमो) को खाली कराने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
इटली के बोलोग्ना में, एक अन्य प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों (वाटर कैनन) का इस्तेमाल किया। रॉयटर्स के अनुसार, इस दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अल्बानिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एएफपी को बताया कि शनिवार को 18 पुलिस अधिकारियों और 17 प्रदर्शनकारियों सहित 35 लोग घायल हुए हैं। पुलिस प्रमुख स्केंडर हिता ने कहा कि167 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 388 लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई है।
अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन पांचवे दिन और उग्र हो गया। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट, बैंकों और डाकघर सहित कई इमारतों में आग लगा दी गई या उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया।
इटली, फ्रांस की तरह पुर्तगाल में भी महंगाई और बढ़ते खर्चों के खिलाफ विरोध जताने के लिए लिसबन की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए।
2017 के बाद से पुर्तगाल में मकानों की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं, जिसने यूरोप के सबसे गंभीर आवास संकटों में से एक को बढ़ावा दिया है।
बेल्जियम में युवा प्रदर्शनकारियों सहित कई सौ लोग ब्रुसेल्स की सड़कों पर उतर आए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हो गई। छात्र संगठनों ने कहा कि वे शिक्षा की बढ़ती लागत और उन सुधारों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।

यूरोप संकट में है। इसके तहत आने वाले देश दंगों की आग में जल रहे हैं। फ्रांस, इटली, बेल्जियम समेत कई देशों में विरोध की आग तेज होती जा रही है। प्रदर्शनकारी किसी को भी नहीं छोड़ रहे हैं। कहीं बिल्डिंग में आग लगा दी तो कहीं पुलिस पर पथराव कर रहे। सड़कों पर इनका गुस्सा सामने आने वाली हर चीज को बस तहस-नहस करना चाहता है। इसके पीछे की वजह बेतहाशा बढ़ती महंगाई, जीवन यापन का संकट, स्वास्थ्य सेवाओं में कमी और बदहाल स्कूल हैं। फ्रांस से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब पूरे यूरोप में फैल गया है।